अमेरिकी केंद्रीय बैंक का बड़ा फैसला: राष्ट्रपति ट्रंप के दबाव को दरकिनार कर फेड ने बढ़ाई ब्याज दरें, वजह क्या?

फेडरल रिजर्व ने मुख्य ब्याज दर (बेंचमार्क रेट) में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 फीसदी) की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद अमरीका में मुख्य ब्याज दर बढ़कर लगभग 3.9 फीसदी हो गई है। बैंक के इस कदम का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा, जिससे समय के साथ होम लोन, ऑटो लोन और क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें महंगी हो जाएंगी। त्रैमासिक अनुमानों को जारी करते हुए फेड की दर-निर्धारण समिति (एफओएमसी) ने संकेत दिया है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए इस साल के अंत तक ब्याज दरों को एक बार फिर बढ़ाकर 4.1 फीसदी तक किया जा सकता है।केंद्रीय बैंक ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया, ‘आज की नीतिगत कार्रवाई मुद्रास्फीति (महंगाई) को केंद्रीय बैंक के दो प्रतिशत के लक्ष्य पर समयबद्ध तरीके से वापस लाने में मदद करेगी।‘फेड का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी जनता पहले से ही खाद्य पदार्थों, पेट्रोल-डीजल और आवास की बढ़ती कीमतों से जूझ रही है। अमेरिका में महज सात हफ्ते बाद मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, और ऐसे में बढ़ती महंगाई चुनावी अभियानों का सबसे मुख्य मुद्दा बन चुका है। ब्याज दरों के बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के लिए कर्ज लेना और महंगा हो जाएगा।यह फैसला फेडरल रिजर्व के नए चेयरपर्सन केविन वॉश के रुख में आए एक बड़े मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नियुक्त किए गए केविन वॉश ने इसी साल मई में फेड अध्यक्ष का पद संभाला था। पिछले साल जब ट्रंप इस पद के लिए उनके नाम पर विचार कर रहे थे, तब वॉश ने कई बार संकेत दिए थे कि फेड ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। उन्होंने कम ब्याज दरों की राष्ट्रपति ट्रंप की मांग का समर्थन भी किया था। हालांकि, पद संभालने और लगातार ऊंची बनी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 17, 2026 · 2 min · National Desk

टीएमसी का घमासान: ममता और ऋतब्रत गुट की आज चुनाव आयोग के सामने पेशी, बंगाल उपचुनाव से पहले सुनवाई क्यों अहम?

टीएमसी का यह विवाद अब तक कई दौर की दलीलों और सुनवाई से गुजर चुका है। दो जुलाई को ऋतब्रत के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने पेश हुआ था। गुट ने बहुमत का समर्थन होने का दावा करते हुए पार्टी के संगठन और संपत्तियों पर नियंत्रण की मांग की थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से जवाब मांगा। ममता गुट ने असंतुष्ट नेताओं के दावे को खारिज करते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे को वैध बताया। आयोग ने 12 सितंबर को दोनों गुटों की फिर सुनवाई की और 16 सितंबर की समयसीमा से पहले अतिरिक्त सामग्री मांगी। टीएमसी के बागी गुट के विधायक संदीपन साहा ने कहा, “हम वहां अपना पक्ष रखेंगे। हमें उम्मीद है।” ममता गुट के एक वरिष्ठ सदस्य ने भी पुष्टि की कि उसके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को शाम चार बजे पेश होने के लिए बुलाया गया है। ममता गुट के वरिष्ठ सांसद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सभी जरूरी सबूत और दस्तावेज होने के बावजूद मामले में जानबूझकर देरी कर रहा है और इस मुद्दे को लेकर “बहुत शोर पैदा करने की कोशिश कर रहा है।“दोनों गुटों की लगातार होने वाली यह सुनवाई बुधवार को आयोग में दस्तावेज और कानूनी सामग्री जमा करने के एक दिन बाद हो रही है। यह नंदीग्राम और रेजिनगर में छह अक्तूबर को होने वाले उपचुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की 16 सितंबर की समयसीमा खत्म होने के कुछ घंटे बाद भी हो रही है।इस समय ने संगठनात्मक नियंत्रण तक सीमित इस विवाद को और महत्वपूर्ण बना दिया है। तत्काल सवाल यह है कि क्या दोनों में से कोई गुट उपचुनाव में ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेगा या अंतिम फैसला होने तक आयोग इस चिह्न को रोक देगा।ममता गुट का कहना है कि पार्टी के संविधान के तह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 17, 2026 · 2 min · National Desk

एक्सप्लेनर: ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा बढ़ने से आपकी बचत पर क्या होगा असर, नियोक्ता पर कितना भार, समझें गणित

कर्मचारियों के लिए क्या कोई नुकसान है? नहीं, सिवाय इसके कि हर महीने हाथ में आने वाली तनख्वाह यानी इन-हैंड सैलरी में कुछ अधिक कटौती हो जाएगी। इसे इस उदाहरण से समझिए: सरकार के फैसले के बाद कर्मचारी के पीएफ व पेंशन खाते में करीब 2400 रुपये अधिक जमा होंगे। इसमें से 1200 रुपये का भार कर्मचारी को खुद उठाना होगा यानी उसे 1200 रुपये और अधिक अपने इन हैंड वेतन से कटवाने होंगे। इसके अलावे, अतिरिक्त 1200 रुपये का भार नियोक्ता को उठाना पड़ेगा। नियोक्ताओं पर कितना भार बढेगा? सरकार के नए निर्णय से नियोक्ताओं पर देनदारी का भार बढ़ेगा जैसा कि ऊपर के गणित में स्पष्ट है। पहले 15000 रुपये की सैलरी की स्थिति में नियोक्ता को कर्मचारी के मद में ईपीएफओ स्कीम के तहत पीएफ और पेंशन खाते में 1800 रुपये जमा करने होते थे। अब उन्हें भी कर्मचारी की तरह 1200 रुपये अधिक चुकाने होंगे। इसके अलावे नियोक्ताओं व कर्मचारियों को ईडीएलआई (इम्प्लाईज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस) के तहत सुरक्षा के लिए प्रशासनिक शुल्क के रूप में 0.5% का अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा। जैसे सैलरी अब अगर 10000 रुपये बढ़ी है तो ऐसे में प्रशासनिक शुल्क के मद में 10000 का .05 प्रतिशत यानी करीब 100 रुपये का भार भी नियोक्ताओं व कर्मियों को उठाना पड़ेगा। प्रशासनिक शुल्क के साथ नियोक्ता और कर्मियों पर अतिरिक्त भार कितना? नियोक्ता पर अतिरिक्त भार राशि EPF + EPS में अतिरिक्त योगदान ₹1,200 ₹10,000 अतिरिक्त वेतन पर 0.5% प्रशासनिक शुल्क ₹50 कुल अतिरिक्त मासिक भार ₹1,250 कुल अतिरिक्त सालाना भार ₹15,000 अब आगे क्या? इस निर्णय से पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना ( …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 17, 2026 · 2 min · National Desk

अमेरिका: अफीम पर अंकुश लगाने के लिए ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ, फिर भी ड्रग सूची में भारत का नाम क्यों?

अमेरिका ने वित्त वर्ष 2027 के लिए उन देशों की सूची जारी की है, जिन्हें प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध ड्रग उत्पादन वाले देशों के तौर पर चिन्हित किया गया है। इस सूची में भारत समेत 23 देश शामिल हैं। अमेरिकी निर्धारण को 15 सितंबर को कांग्रेस के सामने पेश किया गया। खास बात यह है कि भारत का नाम इस सूची में होने के साथ अमेरिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम की खेती रोकने तथा सप्लाई चेन की सुरक्षा मजबूत करने की कोशिशों की सराहना भी की है। भारत को लेकर अमेरिका ने क्या कहा? अमेरिकी निर्धारण में साफ किया गया है कि इस सूची में किसी देश का नाम होने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि वहां की सरकार ड्रग तस्करी रोकने में नाकाम रही है। किसी देश को भौगोलिक, कारोबारी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण भी इस सूची में शामिल किया जा सकता है, अगर वहां से ड्रग्स या उन्हें बनाने वाले रसायनों की आवाजाही या उत्पादन की स्थिति बनती हो। इसलिए भारत का इस सूची में शामिल होना अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं देता कि अमेरिका भारत को ड्रग नियंत्रण में विफल मानता है। अमेरिकी दस्तावेज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम की खेती से निपटने और सप्लाई चेन की विश्वसनीयता मजबूत करने की कोशिशों का स्वागत किया गया है। अमेरिका ने भारत के साथ ड्रग नीति के क्षेत्र में आगे भी सहयोग जारी रखने की बात कही है। यानी सूची में भारत का नाम होने के साथ दोनों देशों के बीच नशीली दवाओं के खिलाफ सहयोग का उल्लेख भी किया गया है। अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिए आगे सहयोग जारी रखने की बात कही गई है। चीन और पाकिस्तान का नाम भी सूची में क्यों आया? चीन और पाकिस्तान भी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 17, 2026 · 2 min · National Desk

यूपीआई शुल्क पर कांग्रेस में ही उलझा पेच: राहुल का विरोध, लेकिन पार्टी सांसदों ने की थी पैरवी; क्या है मामला?

यूपीआई के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था जरूरी है, ताकि पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र को लगातार सरकारी मदद पर निर्भर न रहना पड़े। समिति ने चरणबद्ध राजस्व मॉडल तलाशने की बात कही, जबकि छोटे शहरों में डिजिटल भुगतान बढ़ाने के लिए तीन साल की योजना और कैशबैक को भी जरूरी माना। समिति के मुताबिक, पहले की सिफारिशों के तहत चरणबद्ध एमडीआर व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान आगे बढ़ाए गए हैं। समिति ने कहा कि 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर तय दर से एमडीआर लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। समिति के अनुसार, इस ढांचे को लागू करने में देरी से भुगतान सेवा प्रदाताओं की सब्सिडी पर निर्भरता बनी रहेगी और साइबर सुरक्षा तथा धोखाधड़ी रोकने के निवेश पर असर पड़ सकता है। समिति ने टियर-3 से टियर-6 शहरों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित तीन साल की बहुवर्षीय योजना और कैशबैक व्यवस्था को भी जरूरी बताया। रिपोर्ट को 12 अगस्त को अपनाए जाने के समय समिति के पांच कांग्रेस सांसद मौजूद थे और प्रकाशित कार्यवाही में कोई असहमति दर्ज नहीं हुई। इस साल संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने यूपीआई के लिए चरणबद्ध एमडीआर व राजस्व व्यवस्था बनाने पर जोर दिया था। समिति ने कहा था कि इस व्यवस्था को बिना देरी अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए। उसका तर्क था कि यूपीआई व्यवस्था को लंबे समय तक सरकारी खजाने पर निर्भर रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं है।वित्त संबंधी स्थायी समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। ये पांचों 12 अगस्त को संसद में मौजूद थे, जब समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया। प्रकाशित कार्यवाही में किसी अस …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 17, 2026 · 2 min · National Desk

अनंत नाग: पद्मभूषण के बाद दिग्गज अभिनेता को दादा साहब फाल्के सम्मान, 300 से ज्यादा फिल्में की; पीएम ने दी बधाई

करियर में शानदार योगदान के लिए मिलेगा सम्मान 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अभिनेता अनंत नाग को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस समारोह का आयोजन 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में होगा। दादासाहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश के बाद भारत सरकार ने अनंत नाग के नाम की घोषणा की है। अनंत नाग ने अपने लंबे करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं और खास तौर पर कन्नड़ सिनेमा में उनका योगदान काफी अहम रहा है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अभिनेता अनंत नाग को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। इस समारोह का आयोजन 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में होगा।दादासाहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश के बाद भारत सरकार ने अनंत नाग के नाम की घोषणा की है। अनंत नाग ने अपने लंबे करियर में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं और खास तौर पर कन्नड़ सिनेमा में उनका योगदान काफी अहम रहा है। साल 2024 का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार वरिष्ठ भारतीय कलाकार अनंत नाग को दिया जाएगा। यह सम्मान भारतीय सिनेमा में उनके शानदार योगदान और लंबे सिनेमाई सफर के लिए दिया जा रहा है। इस सम्मान को पाने के बाद पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है। इससे पहले साल 2025 में उन्हें पद्मभूषण से भी सम्मानित किया गया था। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 16, 2026 · 2 min · National Desk

पीएम मोदी का 76वां जन्मदिन: शत्रुघ्न सिन्हा ने एक दिन पहले क्यों दी बधाई? बताई इसके पीछे की दिलचस्प वजह

जाने-माने अभिनेता और नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन से एक दिन पहले ही अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को अपना 76वां जन्मदिन मनाएंगे। बुधवार को शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पीएम मोदी के साथ अपनी दो पुरानी तस्वीरें साझा कीं और एक दिन पहले बधाई संदेश भेजने का कारण भी स्पष्ट किया। Wishing you in advance before it gets lost in the flood of good well wishes tomorrow. How do you like the idea Sirji? Many happy returns of the day for our friend, friend of society, hon’ble PM @narendramodi. May you be blessed with great well-being,love, happiness, peace & a… pic.twitter.com/oL57QKRQnv — Shatrughan Sinha (@ShatruganSinha) September 16, 2026 शत्रुघ्न सिन्हा ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘कल मिलने वाली ढेरों शुभकामनाओं की बाढ़ में मेरी बधाई कहीं खो न जाए, इसलिए आपको समय से पहले ही बधाई दे रहा हूं। सरजी, आपको यह विचार कैसा लगा? हमारे मित्र, समाज के मित्र और माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपको उत्तम स्वास्थ्य, अपार स्नेह, खुशियां, शांति और एक बहुत लंबी उम्र प्रदान करे। गॉड ब्लेस!“बता दें कि नरेंद्र मोदी मई 2014 से लगातार देश के प्रधानमंत्री पद पर कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और बुनियादी ढांचे के विकास जैसी कई बड़ी पहलों पर खास जोर दिया गया है। हर साल उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके समर्थक और विभिन्न संगठन सार्वजनिक कार्यक्रम, जनसेवा और कल्याणकारी गतिविधियां आयोजित करते हैं।वहीं, फिल् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 16, 2026 · 2 min · National Desk

एक्सप्लेनर: 21 राज्यों में UCC लागू करने का भाजपा ने बनाया प्लान, 2029 तक इसे जमीन पर उतारने की क्या है योजना?

किन राज्यों में यूसीसी की दिशा में कदम बढ़े? अब तक चार भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी से जुड़े कानून पारित किए हैं, उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश। उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है, जबकि बाकी राज्यों में कानून लागू होने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं गोवा- राज्य में 1867 से समान सिविल कोड लागू है। उत्तराखंड उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। इसमें शादी, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार के लिए समान नियम हैं। बहुविवाह पर रोक और शादी का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी इसमें खास प्रावधान हैं। जोड़ों को लिव-इन रिलेशनशिप और उसके खत्म होने का पंजीकरण कराना होता है। ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध माना गया है। गुजरात गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को यूसीसी बिल पारित किया। इसका मॉडल काफी हद तक उत्तराखंड जैसा है। इसमें शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान हैं और बहुविवाह पर रोक का प्रावधान है। असम असम ने मई 2026 में यूसीसी बिल पारित किया। इसमें शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को शामिल किया गया है। बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान भी है। मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा ने जुलाई 2026 में यूसीसी बिल पारित किया। इसमें शादी, तलाक और उत्तराधिकार के साथ गोद लेने से जुड़े प्रावधान भी हैं। इसमें ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है। बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान भी है। पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की घोषणा की है। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 16, 2026 · 2 min · National Desk

पंजाब चुनाव 2027: वोटर दोहराएगा 2022 का बदलाव या लौटेगी विरासत, होगी व्यक्तिगत जनाधार की परीक्षा

2022 में मिले थे चाैंकाने वाले नतीजे 2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके। प्रकाश सिंह बादल को भी अपेक्षाकृत नए उम्मीदवार से हार मिली। मजीठिया को अमृतसर ईस्ट में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार जीवनज्योत कौर ने शिकस्त दी। यानी 2022 में लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं रही, बल्कि मतदाता ने स्थापित राजनीतिक पहचान और पीढ़ियों से चली आ रही राजनीतिक पकड़ को भी चुनौती दी। राजनीति विशेषज्ञ प्रोफेसर कुणाल मेहता के अनुसार, “2022 का जनादेश पंजाब की पारंपरिक राजनीतिक विरासत के लिए एक बड़ा झटका था। मतदाताओं ने यह स्पष्ट कर दिया था कि केवल परिवार का नाम और राजनीतिक विरासत अब चुनाव जीतने की गारंटी नहीं है। 2027 में इन राजनीतिक परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी खोई हुई विश्वसनीयता और जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। अब देखना यह है कि पुरानी विरासत खुद को बदलते पंजाब की राजनीतिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ पाती है या नए चेहरे इस बदलाव की प्रक्रिया को आगे ले जाते हैं।” विरासत बचाने की लड़ाई यही वजह है कि 2027 का विधानसभा चुनाव अब पुराने राजनीतिक परिवारों के लिए केवल सत्ता में वापसी का चुनाव नहीं बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत बचाने की लड़ाई भी बनता दिखाई दे रहा है। करीब पांच साल बाद वही नेता और उनके राजनीतिक परिवार फिर अपनी जमीन तलाश रहे है …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 16, 2026 · 2 min · National Desk

रिपोर्ट में खुलासा: अमेरिका ने ईरान से जंग में फूंके 38 अरब डॉलर; कितने विमान गंवाए, हर महीने कितना खर्च?

50 से ज्यादा विमान-हेलिकॉप्टर और ड्रोन गंवाए ईरानी हमले में तबाह बोइंग ई-3 सेंट्री सीबीओ ने कहा कि इस युद्ध का असर महंगाई पर 2027 की पहली तिमाही तक रह सकता है। इसके कारण महंगाई पहले के अनुमान से करीब 0.5 प्रतिशत अंक ज्यादा रह सकती है। इसकी बड़ी वजह तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी है। ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से इनकी आवाजाही प्रभावित हुई है। लाल सागर से होने वाली जहाजों की आवाजाही में भी बाधा आई है।यह अनुमान प्रतिनिधि ब्रेंडन बॉयल के जानकारी मांगने के बाद तैयार किया गया। बॉयल प्रतिनिधि सभा की बजट समिति में सबसे वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य हैं। सीबीओ का यह अनुमान पहले दिए गए रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुमान से काफी मिलता है। हेगसेथ ने सीनेट में गवाही के दौरान युद्ध की लागत 37.5 अरब डॉलर बताई थी।सीबीओ के मुताबिक, इस खर्च का बड़ा हिस्सा युद्ध में इस्तेमाल हुई या नष्ट हुई मिसाइलों, हथियारों और सैन्य उपकरणों को फिर से खरीदने पर हो रहा है। इसमें युद्ध में मारे गए या घायल हुए अमेरिकी सैनिकों का खर्च शामिल नहीं है। इसमें भविष्य में सैनिकों की स्वास्थ्य देखभाल और विकलांगता मुआवजे का खर्च भी शामिल नहीं किया गया है।ब्रेंडन बॉयल ने कहा कि युद्ध की मानवीय कीमत के अलावा अमेरिकी लोगों को इसकी आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सीबीओ की गैर-दलीय रिपोर्ट से साफ है कि युद्ध पर अमेरिकी करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च हो चुके हैं। खर्च अभी भी बढ़ रहा है। इसके साथ ही आम लोगों के लिए चीजों की कीमतें भी बढ़ रही हैं।बॉयल ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन कई वर्षों से अमेरिकी लोगों से कहते रहे हैं कि देश में परिवारों की मदद करने के लिए पर् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 16, 2026 · 2 min · National Desk