किन राज्यों में यूसीसी की दिशा में कदम बढ़े? अब तक चार भाजपा शासित राज्यों ने यूसीसी से जुड़े कानून पारित किए हैं, उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश। उत्तराखंड में यूसीसी लागू हो चुका है, जबकि बाकी राज्यों में कानून लागू होने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं गोवा- राज्य में 1867 से समान सिविल कोड लागू है। उत्तराखंड उत्तराखंड में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। इसमें शादी, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार के लिए समान नियम हैं। बहुविवाह पर रोक और शादी का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी इसमें खास प्रावधान हैं। जोड़ों को लिव-इन रिलेशनशिप और उसके खत्म होने का पंजीकरण कराना होता है। ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चों को वैध माना गया है। गुजरात गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च 2026 को यूसीसी बिल पारित किया। इसका मॉडल काफी हद तक उत्तराखंड जैसा है। इसमें शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधान हैं और बहुविवाह पर रोक का प्रावधान है। असम असम ने मई 2026 में यूसीसी बिल पारित किया। इसमें शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को शामिल किया गया है। बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान भी है। मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश विधानसभा ने जुलाई 2026 में यूसीसी बिल पारित किया। इसमें शादी, तलाक और उत्तराधिकार के साथ गोद लेने से जुड़े प्रावधान भी हैं। इसमें ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला से जुड़े प्रावधानों का भी उल्लेख है। बहुविवाह पर रोक और लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण का प्रावधान भी है। पश्चिम बंगाल राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की घोषणा की है। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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