कर्मचारियों के लिए क्या कोई नुकसान है? नहीं, सिवाय इसके कि हर महीने हाथ में आने वाली तनख्वाह यानी इन-हैंड सैलरी में कुछ अधिक कटौती हो जाएगी। इसे इस उदाहरण से समझिए: सरकार के फैसले के बाद कर्मचारी के पीएफ व पेंशन खाते में करीब 2400 रुपये अधिक जमा होंगे। इसमें से 1200 रुपये का भार कर्मचारी को खुद उठाना होगा यानी उसे 1200 रुपये और अधिक अपने इन हैंड वेतन से कटवाने होंगे। इसके अलावे, अतिरिक्त 1200 रुपये का भार नियोक्ता को उठाना पड़ेगा। नियोक्ताओं पर कितना भार बढेगा? सरकार के नए निर्णय से नियोक्ताओं पर देनदारी का भार बढ़ेगा जैसा कि ऊपर के गणित में स्पष्ट है। पहले 15000 रुपये की सैलरी की स्थिति में नियोक्ता को कर्मचारी के मद में ईपीएफओ स्कीम के तहत पीएफ और पेंशन खाते में 1800 रुपये जमा करने होते थे। अब उन्हें भी कर्मचारी की तरह 1200 रुपये अधिक चुकाने होंगे। इसके अलावे नियोक्ताओं व कर्मचारियों को ईडीएलआई (इम्प्लाईज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस) के तहत सुरक्षा के लिए प्रशासनिक शुल्क के रूप में 0.5% का अतिरिक्त भुगतान भी करना होगा। जैसे सैलरी अब अगर 10000 रुपये बढ़ी है तो ऐसे में प्रशासनिक शुल्क के मद में 10000 का .05 प्रतिशत यानी करीब 100 रुपये का भार भी नियोक्ताओं व कर्मियों को उठाना पड़ेगा। प्रशासनिक शुल्क के साथ नियोक्ता और कर्मियों पर अतिरिक्त भार कितना? नियोक्ता पर अतिरिक्त भार राशि EPF + EPS में अतिरिक्त योगदान ₹1,200 ₹10,000 अतिरिक्त वेतन पर 0.5% प्रशासनिक शुल्क ₹50 कुल अतिरिक्त मासिक भार ₹1,250 कुल अतिरिक्त सालाना भार ₹15,000 अब आगे क्या? इस निर्णय से पात्र कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ) बचत, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना ( …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
एक्सप्लेनर: ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा बढ़ने से आपकी बचत पर क्या होगा असर, नियोक्ता पर कितना भार, समझें गणित
कर्मचारियों के लिए क्या कोई नुकसान है? नहीं, सिवाय इसके कि हर महीने हाथ में आने वाली तनख्वाह यानी इन-हैंड सैलरी में कुछ अधिक कटौती हो जाएगी। इसे इस उदाहरण से समझिए: सरकार के फैसले के बाद कर्मचारी के पीएफ व पेंशन खाते में करीब 2400 रुपये अधिक जमा होंगे। इसमें से 1200 रुपये का भार कर्मचारी को खुद उठाना होगा यानी उसे 1200 रुपये और अधिक अपने इन हैंड वेतन से कटवाने होंगे। इसके अलावे, अतिरिक्त 1200 रुपये का भार नियोक्ता को उठाना पड़ेगा। नियोक्ताओं पर कितना भार बढेगा? सरकार के नए निर्णय से नियोक्ताओं प