FATF में भारत को अहम जिम्मेदारी: विवेक अग्रवाल बने नए उपाध्यक्ष; पाकिस्तान के क्यों छूटने लगे पसीने?

बयान में क्या कहा गया? एक बयान के अनुसार, पेरिस स्थित एफएटीएफ के मुख्यालय में आयोजित पूर्ण बैठक के समापन पर केंद्रीय संस्कृति सचिव विवेक अग्रवाल को संस्था का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया। विवेक अग्रवाल कौन हैं? विवेक अग्रवाल 1994 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं। वह मध्य प्रदेश कैडर से ताल्लुक रखते हैं। वह पहले भी एफएटीएफ में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख के रूप में काम कर चुके हैं। एफएटीएफ ने अपने बयान में कहा, सदस्यों ने ब्रिटेन के अगले अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए तय की गई प्राथमिकताओं को मंजूरी दी और भारत के विवेक अग्रवाल को जुलाई 2026 से जून 2027 तक के लिए एफएटीएफ का नया उपाध्यक्ष नियुक्त किया। पेरिस में एकत्र हुए प्रतिनिधि और पर्यवेक्षक 17 से 19 जून के दौरान 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों के प्रतिनिधि तथा पर्यवेक्षक पेरिस में एकत्र हुए। उन्होंने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता के सामने मौजूद खतरों पर चर्चा की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि विवेक अग्रवाल ब्रिटेन के नागरिक गाइल्स थॉमसन का स्थान लेंगे। थॉमसन एक जुलाई 2025 से इस पद पर कार्यरत हैं। ये भी पढ़ें: सरकार ने इस नियुक्ति पर क्या कहा? इस बीच, वित्त मंत्रालय ने इस नियुक्ति को भारत के लिए एक ऐतिहासिक सम्मान बताया। मंत्रालय ने कहा कि यह धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका की पहचान है। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, इस नियुक्ति से एक भारतीय अधिकारी को धनशोधन रोकने और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ मानक तय करने वाली दुनिया की सबसे अहम संस्था के शीर्ष नेतृत्व में स्थान मिला है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 20, 2026 · 2 min · National Desk

Politics: 'खाल ओढ़ लेने से भेड़िया बाघ नहीं बन जाता', सांसदों की बगावत पर शिंदे बोले- ये तो सिर्फ ट्रेलर

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत दिखाई दे रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों की बगावत के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। शिंदे ने कहा कि जो कुछ अभी दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ ट्रेलर है और पूरी फिल्म अभी बाकी है। उनके इस बयान को शिवसेना (यूबीटी) में संभावित दूसरी बड़ी टूट और कथित ऑपरेशन टाइगर से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2022 के बाद उद्धव ठाकरे को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। क्या है शिंदे का ‘सिर्फ ट्रेलर’ वाला संदेश? शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में नौ में से छह सांसदों का अनुपस्थित रहना इस पूरे विवाद की शुरुआत बना। पार्टी की ओर से व्हिप जारी किए जाने के बावजूद केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में पहुंचे। इसके बाद छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की। बागी सांसदों का आरोप है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर चली गई है और कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है। एकनाथ शिंदे ने पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि लोगों के पार्टी छोड़ने के पीछे के कारणों पर आत्मचिंतन किया जाना चाहिए। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि बाघ की खाल ओढ़ लेने से कोई बाघ नहीं बन जाता। शिंदे ने यह भी कहा कि विपक्ष हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिंदे का यह बयान शिवसेना (यूबीटी) के भीतर बढ़ती ना …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 20, 2026 · 2 min · National Desk

उद्धव की दो टूक : 'भरोसा नहीं तो पद छोड़ दूंगा, 30 साल BJP संग रहकर विलय नहीं किया; कांग्रेस से कैसे करेंगे'

अपनी पार्टी के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को भावुक होते हुए कहा कि चुनौतियों और हमलों के बावजूद मेरा संकल्प कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर पार्टी को मुझ पर भरोसा नहीं है, तो मैं अपना पद छोड़ने को तैयार हूं। उन्होंने कहा, ‘मैं किसी भी योग्य व्यक्ति को शिवसेना का अध्यक्ष बनाने के लिए तैयार हूं। मैं संघर्ष से पीछे हटने वाला नहीं हूं, लेकिन जिस दिन आपको लगे कि मैं इस जिम्मेदारी के सही आदमी नहीं हूं, उसी दिन यह पद छोड़ दूंगा।‘उद्धव ठाकरे ने भाजपा और कांग्रेस की राजनीति की तुलना करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ हमारे हमेशा से तीखे राजनीतिक मतभेद रहे हैं। विचारों की यह लड़ाई जगजाहिर है। लेकिन कांग्रेस ने कभी भी शिवसेना को जड़ से खत्म करने की कोशिश नहीं की। इसके विपरीत, भाजपा आज शिवसेना का नामोनिशान मिटाने पर तुली हुई है। वह हमारी पार्टी को पूरी तरह बर्बाद करना चाहती है।पश्चिम बंगाल के बाद अब महाराष्ट्र में भी बगावत की खबर सामने आ रही है। दावा किया जा रहा है कि उद्धव गुट के छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। हालांकि, इस बीच उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने साफ कहा कि इन सांसदों के दगा देने से शिवसैनिक बिल्कुल भी निराश या हताश नहीं हैं। इसके उलट, इस धोखे ने शिवसैनिकों के भीतर एक नई आग पैदा कर दी है। वे अब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक और एकजुट हो गए हैं।भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे भावुक भी हुए। उन्होंने महाराष्ट्र के उन सभी मतदाताओं से हाथ जोड़कर माफी मांगी, जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना के टिकट पर जीते सांसदों को अपना कीमती वोट दिया था …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

Kolkata Airport: अभिषेक बनर्जी के स्वागत से पहले कोलकाता एयरपोर्ट पर बवाल, TMC-भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प

#WATCH | West Bengal | Chaos erupts at Kolkata Airport as Abhishek Banerjee is reportedly expected to arrive here from Delhi pic.twitter.com/8e1aOxGeT0 — ANI (@ANI) June 19, 2026 सुकांत मजूमदार ने की ये अपील दिल्ली से लौटे थे अभिषेक बनर्जी? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच पहले बहस हुई, जो बाद में झड़प में बदल गई। घटना के चलते एयरपोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मियों और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।इस बीच केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मैं लोगों से शांति बनाए रखने और कानून पर भरोसा रखने की अपील करता हूं। किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। घटना के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की निगरानी कर रही है और स्थिति सामान्य बताई जा रही है।अभिषेक बनर्जी शुक्रवार को दिल्ली से कोलकाता लौट रहे थे। दिल्ली दौरे के दौरान अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाएं सौंपीं। इन सांसदों ने टीएमसी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा किया है।अभिषेक ने दलबदल कानून का हवाला देते हुए कहा कि जो सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर दूसरी पार्टी में शामिल हो गए हैं, उन्हें लोकसभा सदस्य बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने स्पीकर से बागी सांसदों को किसी भी तरह की अलग मान्यता या सुविधा नहीं देने की मांग भी की। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

बागी TMC सांसदों की सदस्यता पर लटकी तलवार: ओम बिरला से क्यों मिलने पहुंचे अभिषेक बनर्जी? समझिए राजनीतिक मायने

संसद के गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर आ रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी ही पार्टी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ याचिकाएं सौंपी हैं। इन सभी याचिकाओं में बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। अध्यक्ष से मुलाकात के बाद अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ये 20 बागी सांसद एक कम प्रसिद्ध दल में शामिल हो गए हैं। इस दल का नाम ‘नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) है। बनर्जी ने साफ कहा कि इन सांसदों ने अपनी मूल पार्टी छोड़ दी है। इसलिए सदन की सदस्यता से इनका पत्ता कटना तय होना चाहिए।अभिषेक बनर्जी ने बागी गुट पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि 20 लोगों ने पहले स्पीकर से मुलाकात की थी। उन्होंने खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। बाद में पता चला कि वे एनसीपीआई नाम के दल में शामिल हो गए हैं। बनर्जी ने दावा किया कि इस समूह का नाम आज तक किसी ने नहीं सुना है। यहां तक कि इन बागी सांसदों को भी पहले इस पार्टी के बारे में कुछ नहीं पता था।टीएमसी नेता ने संविधान की 10वीं अनुसूची का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दलबदल कानून बिल्कुल स्पष्ट है। अगर कोई सदस्य स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है, तो वह सांसद रहने के योग्य नहीं रहता। अभिषेक बनर्जी ने आगे कहा कि ये लोग टीएमसी के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए थे। अब चुनाव के दो साल बाद वे दावा कर रहे हैं कि वे किसी नई पार्टी में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में उनकी लोकसभा सदस्यता तुरंत खत्म होनी चाहिए।अभिषेक बनर्जी ने कान …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

Meloni Vs Trump: 'इटली और मैं कभी भीख नहीं मांगते', ट्रंप के दावे पर भड़कीं मेलोनी; आरोपों को बताया मनगढ़ंत

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यह तनातनी अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इटली के टेलीविजन नेटवर्क ‘La7’ को दिए गए एक इंटरव्यू के बाद शुरू हुई, जिसमें ट्रंप ने मेलोनी को लेकर एक विवादित दावा किया था। डोनाल्ड ट्रंप ने क्या दावा किया था? इतालवी ब्रॉडकास्टर ‘La7’ को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाने के लिए ‘भीख’ मांगी थी। ट्रंप ने आगे कहा “मेलोनी? उन्होंने मुझसे फोटो के लिए भीख मांगी थी, मुझे उनके लिए दुख महसूस हुआ (तरस आ गया), इसलिए मैं मान गया।” प्रधानमंत्री मेलोनी का तीखा पलटवार डोनाल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी पर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर खुद का एक वीडियो संदेश साझा कर ट्रंप के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। मेलोनी ने कहा कि मैं ट्रंप के इन पूरी तरह से मनगढ़ंत शब्दों से स्तब्ध हूं। कुछ चीजों का तुरंत जवाब देना जरूरी होता है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान पूरी तरह से काल्पनिक हैं। मैं सचमुच हैरान हूं। मुझे नहीं पता कि संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति अपने ही सहयोगियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों करता है। आखिरकार, यह पहली बार नहीं है जब ऐसा हुआ है।" प्रधानमंत्री मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति की राजनयिक प्राथमिकताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा “मैं केवल इतना कह सकती हूं कि यह शर्म की बात है कि उनके पास पश्चिम के दुश्मनों, अमेरिका के दुश्मनों और उन नेतृत्वों के खिलाफ वैसी प्रतिबद्धता नहीं ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

इस्राइल-हिजबुल्ला में दोबारा युद्धविराम: कतर, अमेरिका और ईरान ने कराई सुलह; वेंस की चेतावनी के बाद बनी बात!

इस नए युद्धविराम को अमली जामा पहनाने में तीन देशों ने बड़ी भूमिका निभाई है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक कतर, अमेरिका और ईरान ने मिलकर मध्यस्थता की है। इन तीनों देशों के साझा प्रयासों से दोनों पक्ष फिर से रुकने को तैयार हुए। युद्धविराम की खबर दो क्षेत्रीय अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सामने आई है। तीन अधिकारियों ने इस बात की पूरी पुष्टि की है।इस समझौते से ठीक पहले भारी गोलाबारी हुई थी। भीषण लड़ाई के कारण एक अहम कूटनीतिक बैठक टल गई थी। स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने वाली थी। यह बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। लेकिन अचानक भड़की हिंसा के कारण इस वार्ता को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद युद्धविराम के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए गए।इससे ठीक पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की आलोचना करने पर इस्राइल को कड़ी चेतावनी दी है। हफ्तों के तनाव के बाद हुए इस समझौते का बचाव करते हुए वेंस ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप इस्राइल के इकलौते सहयोगी हैं। उनकी यह टिप्पणी उन खबरों के बीच आई है जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके साथी इस समझौते से निजी तौर पर नाखुश हैं। यह समझौता ईरान के साथ संघर्ष को खत्म करने के लिए किया गया है। वेंस ने कहा था कि इस्राइल बुरी तरह अलग-थलग पड़ गया है और उसके नेता अमेरिकी कूटनीतिक और सैन्य समर्थन के महत्व को समझने में नाकाम रहे हैं।बता दें कि इस्राइल और लेबनान के बीच 16 अप्रैल को 10 दिनों के लिए युद्धविराम हुआ था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि सीजफायर को तीन और हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है। इस युद्धविराम के कुछ ही दिनों बा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

एआई-171 हादसे पर नई थ्योरी: पायलट संगठन का दावा- विमान क्रैश की वजह बिजली की खराबी थी, पेश किए नए सबूत

फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने 12 जून, 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद एयर इंडिया बोइंग फ्लाइट एआई-171 के दुखद क्रैश से जुड़ी आधिकारिक बात को चुनौती दी है। उनका दावा है कि नए सिम्युलेटर डेटा से पता चलता है कि क्रैश की वजह पायलट की अनदेखी नहीं बल्कि सिस्टम में बिजली की बड़ी खराबी थी। एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने दावा किया कि जांचकर्ताओं ने जरूरी तकनीकी सबूतों को नजरअंदाज किया और पहले से तय नतीजे को सही साबित करने के लिए भारत के प्रमुख विमानन विषेशज्ञों को जानबूझकर अलग रखा। इस हादसे की आधिकारिक अंतरिम रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फ्लाइट-क्रू ने एक सोची-समझी आत्महत्या की योजना के तहत जानबूझकर इंजन की फ्यूल सप्लाई बंद कर दी थी।सरकारी जांचकर्ताओं के मुताबिक, मैन्युअल रूप से बंद करने की वजह से विमान का ‘रैम एयर टर्बाइन’ ठीक चार सेकेंड बाद नीचे गिर गया। ‘रैम एयर टर्बाइन’ एक बैकअप पावर सिस्टम है, जो पूरी तरह से बिजली जाने पर अपने आप चालू हो जाता है। हालांकि, रंधावा ने कहा कि एफआईपी ने हाल ही में उस फ्लाइट के वजन, बैलेंस और मौसम की स्थितियों को हूबहू दोहराते हुए विस्तृत सिम्युलेटर टेस्ट किए। उन्होंने कहा कि नतीजों ने आधिकारिक टाइमलाइन को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है।उन्होंने कहा, हमारे सिम्युलेटर टेस्ट साबित करते हैं कि मैन्युअल रूप से फ्यूल बंद करने पर बैकअप टर्बाइन को नीचे गिरने में पूरे 18 सेकेंड लगते हैं। मैन्युअल शटडाउन की स्थिति में चार सेकेंड की आधिकारिक टाइमलाइन भौतिक और तकनीकी रूप से असंभव है।“एफआईपी का तर्क है कि बैकअप टर्बाइन इतनी तेजी से इसलिए चालू हुआ क्योंकि इंजन बंद होने से पहले ही बिजल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

किसानों को बड़ी राहत: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की खरीद को मंजूरी; उत्तर प्रदेश बना सबसे बड़ा लाभार्थी

इस फैसले से उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है। राज्य में ‘ग्रीष्मकालीन 2026’ सीजन के लिए 48,298 मीट्रिक टन मूंग, 97,970 मीट्रिक टन उड़द और 41,718 मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद को मंजूरी मिली है। इन फसलों की कुल एमएसपी कीमत 1,490 करोड़ रुपये से अधिक है। कृषि मंत्री के अनुसार, इस कदम से राज्य के दाल और तिलहन उगाने वाले किसानों को बहुत बड़ी मदद मिलेगी।गुजरात के लिए भी सरकार ने अहम फैसला लिया है। वहां ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए 18,250 मीट्रिक टन मूंग की खरीद को मंजूरी दी गई है। इसकी कुल एमएसपी कीमत 160 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। इससे गुजरात के मूंग किसानों को बाजार में बेहतर दाम मिल सकेंगे। इसी तरह, हरियाणा में भी ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के दौरान 2,115 मीट्रिक टन मूंग खरीदी जाएगी। इसकी कुल कीमत 18 करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। यह फैसला हरियाणा के किसानों को आर्थिक सुरक्षा देने में बड़ी भूमिका निभाएगा।तमिलनाडु के किसानों के लिए भी राहत की खबर है। कृषि मंत्री ने रबी मार्केटिंग सीजन 2025-26 के लिए मूंग की खरीद सीमा बढ़ा दी है। पहले यह सीमा 885 मीट्रिक टन थी, जिसे अब बढ़ाकर 990 मीट्रिक टन कर दिया गया है। यानी अब 105 मीट्रिक टन अतिरिक्त मूंग खरीदी जाएगी। इस पूरी खरीद की एमएसपी कीमत 8.68 करोड़ रुपये है। सरकार के इन फैसलों से किसानों को अपनी फसल कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह कदम किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए उठाया गया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 2 min · National Desk

Viksit Bharat Rozgar Yojana: आज पीएम जारी करेंगे ₹2400 करोड़ की प्रोत्साहन राशि, रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

योजना के तहत पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारियों को 15,000 रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इससे उन्हें कार्यक्षेत्र में कदम रखते समय जरूरी आर्थिक सहायता मिल पाती है। वहीं, अतिरिक्त रोजगार सृजन करने वाले नियोक्ताओं को हर नए कर्मचारी पर 3,000 रुपये प्रतिमाह तक का प्रोत्साहन मिलता है।सरकार ने विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। इस क्षेत्र के नियोक्ताओं को चार वर्षों तक प्रोत्साहन राशि मिलेगी। इसके विपरीत, अन्य क्षेत्रों के नियोक्ताओं को दो वर्षों तक यह लाभ मिलेगा। यह योजना रोजगार आधारित आर्थिक विकास को गति देने और युवाओं के लिए अच्छी गुणवत्ता वाली नौकरियां उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।यह योजना एक अगस्त 2025 से लागू हुई है और इसका कुल बजट 99,446 करोड़ रुपये है। सरकार ने दो वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक नौकरियां सृजन करने का लक्ष्य रखा है। इनमें लगभग 1.92 करोड़ ऐसे युवा शामिल होंगे जो पहली बार कार्यबल का हिस्सा बनेंगे। सरकार का मानना है कि यह योजना औपचारिक रोजगार बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 19, 2026 · 1 min · National Desk