इस नए युद्धविराम को अमली जामा पहनाने में तीन देशों ने बड़ी भूमिका निभाई है। क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक कतर, अमेरिका और ईरान ने मिलकर मध्यस्थता की है। इन तीनों देशों के साझा प्रयासों से दोनों पक्ष फिर से रुकने को तैयार हुए। युद्धविराम की खबर दो क्षेत्रीय अधिकारियों और एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से सामने आई है। तीन अधिकारियों ने इस बात की पूरी पुष्टि की है।इस समझौते से ठीक पहले भारी गोलाबारी हुई थी। भीषण लड़ाई के कारण एक अहम कूटनीतिक बैठक टल गई थी। स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने वाली थी। यह बातचीत बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। लेकिन अचानक भड़की हिंसा के कारण इस वार्ता को स्थगित करना पड़ा। इसके बाद युद्धविराम के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए गए।इससे ठीक पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की आलोचना करने पर इस्राइल को कड़ी चेतावनी दी है। हफ्तों के तनाव के बाद हुए इस समझौते का बचाव करते हुए वेंस ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप इस्राइल के इकलौते सहयोगी हैं। उनकी यह टिप्पणी उन खबरों के बीच आई है जिनमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके साथी इस समझौते से निजी तौर पर नाखुश हैं। यह समझौता ईरान के साथ संघर्ष को खत्म करने के लिए किया गया है। वेंस ने कहा था कि इस्राइल बुरी तरह अलग-थलग पड़ गया है और उसके नेता अमेरिकी कूटनीतिक और सैन्य समर्थन के महत्व को समझने में नाकाम रहे हैं।बता दें कि इस्राइल और लेबनान के बीच 16 अप्रैल को 10 दिनों के लिए युद्धविराम हुआ था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि सीजफायर को तीन और हफ्तों के लिए बढ़ा दिया है। इस युद्धविराम के कुछ ही दिनों बा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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