महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना के भीतर बड़े राजनीतिक भूचाल के संकेत दिखाई दे रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों की बगावत के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। शिंदे ने कहा कि जो कुछ अभी दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ ट्रेलर है और पूरी फिल्म अभी बाकी है। उनके इस बयान को शिवसेना (यूबीटी) में संभावित दूसरी बड़ी टूट और कथित ऑपरेशन टाइगर से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2022 के बाद उद्धव ठाकरे को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। क्या है शिंदे का ‘सिर्फ ट्रेलर’ वाला संदेश? शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में नौ में से छह सांसदों का अनुपस्थित रहना इस पूरे विवाद की शुरुआत बना। पार्टी की ओर से व्हिप जारी किए जाने के बावजूद केवल अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही बैठक में पहुंचे। इसके बाद छह सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की। बागी सांसदों का आरोप है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर चली गई है और कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियों को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है। एकनाथ शिंदे ने पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा कि लोगों के पार्टी छोड़ने के पीछे के कारणों पर आत्मचिंतन किया जाना चाहिए। उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि बाघ की खाल ओढ़ लेने से कोई बाघ नहीं बन जाता। शिंदे ने यह भी कहा कि विपक्ष हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिंदे का यह बयान शिवसेना (यूबीटी) के भीतर बढ़ती ना …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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