जन्माष्टमी: भक्तों के 'बिजनेस पार्टनर' हैं सांवरियाजी, मुनाफे के रूप में हर महीने आता है करोड़ों का चढ़ावा
जन्माष्टमी: भक्तों के ‘बिजनेस पार्टनर’ हैं सांवरियाजी, मुनाफे के रूप में हर महीने आता है करोड़ों का चढ़ावा व्यापार में पार्टनरशिप की बात आम है लेकिन चित्तौड़गढ़ के कृष्णधाम मंडफिया स्थित प्रसिद्ध सांवरिया सेठ के भक्त भगवान को ही अपना बिजनेस पार्टनर मानकर व्यापार करने की परंपरा निभा रहे हैं। श्रद्धालुओं की इसी आस्था के चलते सांवरिया सेठ के भंडार में हर महीने करोड़ों रुपये का दान पहुंच रहा है। इसी वजह से सांवरिया सेठ को सेठों का सेठ भी कहा जाता है। मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में जब मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, तब संत दयाराम ने प्रभु प्रेरणा से चार मूर्तियों को बागुंड-भादसौड़ा की छापर में एक वटवृक्ष के नीचे जमीन में छिपा दिया था। समय बीतने के बाद मंडफिया गांव के निवासी भोलाराम गुर्जर को सपना आया कि भादसौड़ा-बागुंड की छापर में चार मूर्तियां जमीन में दबी हुई हैं। इसके बाद जब वहां खुदाई की गई तो सपना सच निकला और चार मूर्तियां मिलीं। सभी मूर्तियां बेहद मनोहारी थीं। मूर्तियां मिलने की खबर फैलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे। बाद में सर्वसम्मति से चारों मूर्तियों में से सबसे बड़ी मूर्ति को भादसौड़ा ले जाया गया। भादसौड़ा में प्रसिद्ध गृहस्थ संत पुराजी भगत के निर्देशन में मेवाड़ राजपरिवार के भींडर ठिकाने की ओर से सांवरियाजी का मंदिर बनवाया गया। इसे सबसे पुराना …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...