छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी कर घिरे धीरेंद्र शास्त्री: विरोध के बाद मांगी माफी, सफाई में कही ये बातें
नागपुर के एक कार्यक्रम में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने शिवाजी महाराज को लेकर एक दावा किया था। उन्होंने कहा था कि शिवाजी महाराज युद्धों से थक गए थे। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को त्यागने की इच्छा जताई थी। शास्त्री के अनुसार, महाराज अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास के पास पहुंचे थे। शिवाजी महाराज ने अपना मुकुट उनके चरणों में रख दिया था। शास्त्री ने यह भी कहा था कि तब गुरु रामदास ने मुकुट वापस शिवाजी के सिर पर रखा और उन्हें सिखाया कि थकान के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना ही सच्ची सेवा है।इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया। पूर्व राज्यसभा सदस्य संभाजीराजे छत्रपति ने शास्त्री पर गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस मध्य प्रदेश से शास्त्री आते हैं, वहां के महान योद्धा छत्रसाल बुंदेला ने शिवाजी महाराज से ही प्रेरित होकर मुगलों के खिलाफ जंग जीती थी। संभाजीराजे ने शास्त्री के ज्ञान पर सवाल उठाते हुए उन्हें अपने ही राज्य का इतिहास न जानने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे पाखंडी बाबाओं के कार्यक्रमों पर राज्य में रोक लगाई जाए।विवाद बढ़ता देख बागेश्वर धाम सरकार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रविवार को नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। उन्होंने सफाई दी कि वे महाराज का अपमान सह भी नहीं सकते। शास्त्री ने कहा कि उनका हिंदू राष्ट्र का संकल्प हिंदवी स्वराज से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि मैं तो संतों के प्रति महाराज की भक्ति बता रहा था।राजनीतिक स्तर पर भी हमला तेज रहा। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इसे इतिहास बदलने की साजिश बताया। उन्होंने नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस से भी माफी की मांग की। फडणवी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...