ट्रंप ने पाम बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रा रद्द करने की कई वजहें बताईं। उन्होंने कहा कि 18 घंटे की लंबी यात्रा बहुत थका देने वाली और महंगी है। वह खुद को एक ‘किफायती व्यक्ति’ मानते हैं और फिजूलखर्ची के खिलाफ हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की तरफ से कोई बड़ा नेता बातचीत के लिए नहीं आ रहा था। वह अपने खास दूतों जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को उन लोगों से मिलने नहीं भेज सकते जिन्हें कोई जानता तक नहीं है। उनके अनुसार, ईरान का नेतृत्व आपसी झगड़ों में फंसा हुआ है।ट्रंप ने दावा किया कि उनके इस कड़े फैसले का तुरंत असर हुआ। जैसे ही उन्होंने यात्रा रद्द की, उसके 10 मिनट के भीतर ईरान ने एक नया और बेहतर प्रस्ताव भेज दिया। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनका एकमात्र मकसद यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों। उन्होंने कहा कि यह मामला बहुत सीधा है और अमेरिका इस समय मजबूत स्थिति में है।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्होंने युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक ठोस योजना साझा की है। उन्होंने अमेरिका की गंभीरता पर सवाल उठाए। अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेताओं के साथ बैठक की थी और अपनी मांगों की एक आधिकारिक सूची सौंपी थी। पाकिस्तान इस पूरे मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन ट्रंप के इस फैसले से उसकी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।युद्धविराम को आगे बढ़ाने के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने अभी इस पर विचार नहीं किया है। शांति समझौते के लिए 4 मई की समयसीमा तय है। ट्रंप ने अंत में कहा कि अगर ईरान बात करना चाहता है, तो उसे बस फोन करने की जरूरत है। अब आगे की बातचीत व्हाइट हाउस की शर्तों पर ही होगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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