सोमालिया तट पर समुद्री डाकुओं का आतंक: तुर्किये के हथियारों से लदा जहाज हाईजैक, छह भारतीय समेत 10 क्रू फंसे

सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री लुटेरों ने कैमरून के झंडे वाले एक कार्गो जहाज को हाईजैक कर लिया। जहाज पर तुर्किये के हथियार और संचार व सैटेलाइट उपकरण लदे थे। एक सोमाली अधिकारी के मुताबिक, समुद्री लुटेरे जहाज को पुंटलैंड के नुगाल तट की ओर ले गए। एम/वी लुटुफ को कब और कहां कब्जे में लिया गया? सोमाली अधिकारी ने बताया कि एम/वी लुटुफ को सोमवार को पुंटलैंड के ईयल जिले में मारेया से करीब साढ़े तीन नॉटिकल मील दूर कब्जे में लिया गया। अधिकारी ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें संवेदनशील मामले पर सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी। जहाज पर कौन-कौन सवार था? अधिकारी के मुताबिक, जहाज के 10 सदस्यीय चालक दल में छह भारतीय नागरिक, एक तुर्किये का नागरिक, एक जॉर्जियाई नागरिक और दो सर्बियाई सुरक्षा गार्ड शामिल थे। जहाज का मालिकाना हक पोलर मूवमेंट शिपिंग के पास बताया गया है। जहाज पर क्या सामान लदा था? म/वी लुटुफ तुर्किये के हथियार लेकर जा रहा था। ये हथियार मोगादिशु में मौजूद तुर्किये के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र के लिए भेजे जा रहे थे। जहाज पर संचार और सैटेलाइट उपकरण भी मौजूद थे। घटना पर तुर्किये के अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। कितने समुद्री लुटेरों ने जहाज पर कब्जा किया? अधिकारी के अनुसार, आठ समुद्री लुटेरों ने जहाज पर कब्जा किया। माना जा रहा है कि ये वही समूह है, जो 26 अप्रैल को M/V Sward के हाईजैक में भी शामिल था। लुटेरे जहाज को पुंटलैंड के डांगोरोयो जिले में गारमाल के पास तट की ओर ले गए। सोमाली अधिकारी ने बताया कि बाद में तुर्किये के स्वामित्व वाले दो जहाज हाईजैक किए गए पोत के पास पहुंचे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर?: छात्र नेता से बांग्लादेश के राष्ट्रपति तक; जानें पांच दशक का सियासी सफर

क्या छात्र राजनीति से शुरू हुआ था मिर्जा फखरुल का सफर? मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राजनीति में कदम उस दौर में रखा, जब बांग्लादेश आजाद देश नहीं था और उसे पूर्वी पाकिस्तान के तौर पर जाना जाता था। ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह वामपंथी विचारधारा वाले ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़े। 1969 में तत्कालीन सैन्य समर्थित सरकार के खिलाफ हुए जन आंदोलन के दौरान आलमगीर संगठन की ढाका विश्वविद्यालय इकाई के अध्यक्ष बने। यह वह दौर था जब पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक असंतोष तेजी से बढ़ रहा था और आगे चलकर यही घटनाक्रम बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन की पृष्ठभूमि बना। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान आलमगीर ने वामपंथी विचारों वाले स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन और लामबंदी में मदद की। उन्होंने भारत में शरण लेकर भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई। यानी उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत सीधे किसी बड़े राजनीतिक दल से नहीं हुई थी। वह पहले छात्र आंदोलन और विचारधारा आधारित राजनीति से जुड़े और धीरे-धीरे सक्रिय राजनीतिक जीवन की ओर बढ़े। राजनीति में आने से पहले क्या करते थे मिर्जा फखरुल? राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले आलमगीर सरकारी सेवा में थे। 1972 में उन्होंने सिविल सेवा के शिक्षा कैडर में प्रवेश किया और अर्थशास्त्र के शिक्षक बने। सरकारी सेवा के दौरान उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं। लेकिन 1986 में उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और सक्रिय राजनीति में उतर गए। इसके दो साल बाद, 1988 में वह अपने गृह क्षेत्र ठाकुरगांव की नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए। खास बात यह थी कि उन्होंने यह चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता था। यहीं से उनकी स्थानीय राजनीति में पकड़ मजबूत हुई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

IND vs ENG Hockey Live: भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरे क्वार्टर का खेल जारी, गोलरहित बराबरी पर चल रहा मैच

भारतीय महिला टीम ने पहले क्वार्टर में शानदार खेल दिखाया और गोल करने के कुछ मौके बनाए। हालांकि, टीम के खिलाड़ी इसे गोल में तब्दील नहीं कर सके। भारत के लिए इश्किा ने दबदबा बनाते हुए इंग्लैंड के डिफेंस को भेदा और शॉट लगाया, लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर ने गोल होने से रोक दिया। इसके बाद भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला और नवनीत ने शॉट लगाया। लेकिन इस गोल को अमान्य घोषित किया गया। भारत को इसके बाद गोल करने के दो मौके और मिले, लेकिन टीम इसे भुना नहीं सकी। पहला क्वार्टर गोल रहित बराबरी पर छूटा।भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत ओलंपिक रजत पदक विजेता और दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोककर की थी। इसके बाद टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। मुख्य कोच शोर्ड मारिन की टीम ने टूर्नामेंट में अब तक प्रभावी प्रदर्शन किया है। चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेलने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि भारत के छह गोल छह अलग-अलग खिलाड़ियों ने किए। भारतीय टीम की 11 खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक बिना किसी दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखाया है।सविता (गोलकीपर), सलिमा टेटे (कप्तान), नवनीत कौर, साक्षी राणा, ऋतुजा डाडोसा पिसल, इश्किा चौधरी, लालरेमसियामी, सुनेलिता टोप्पो, नेहा, ज्योति, सुशीला चानू।बिच्छू देवी खरीम्बाम (गोलकीपर), इश्किा, दीपिका, बलजीत कौर, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग, शिल्पी दबास। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

जंतर-मंतर प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय समिति, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के आरोपों की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, अर्धसैनिक बलों और अन्य सुरक्षा कर्मियों की ओर से कथित तौर पर किए गए अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। समिति में कौन-कौन शामिल हैं? इस पांच सदस्यीय समिति में जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी के अलावा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक डॉ. एलआर बिश्नोई भी समिति के सदस्य हैं। प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के किन आरोपों की होगी जांच? समिति प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के कथित अत्यधिक इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच करेगी। इसके साथ ही महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और पुलिस निगरानी से जुड़े आरोप भी समिति के दायरे में होंगे। समिति यह भी देखेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की ओर से उठाए गए कदम स्थिति के अनुपात में थे या नहीं। इसके अलावा घायलों को दी गई चिकित्सीय सहायता और पीड़ितों को मुआवजे से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जाएगी। पुलिस और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े आरोपों का क्या होगा? समिति केवल प्रदर्शनकारियों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों की ओर से पुलिस कर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान से जुड़े आरोपों पर भी विचार किया जाएगा। इस तरह समिति प्रदर्शन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: लद्दाख में होगी J&K हाईकोर्ट की बेंच, अमित शाह बोले- न्याय तक पहुंच होगी आसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने का फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से लद्दाख के दूरदराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों को न्याय तक पहुंच आसान होगी। अमित शाह के मुताबिक, हाईकोर्ट की बेंच स्थापित होने से लोगों को अपनी कानूनी सेवाओं का लाभ लेने में लगने वाला समय कम होगा। अमित शाह ने फैसले को लेकर क्या कहा? अमित शाह ने अपने पोस्ट में कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच को बेहतर करेगा। उनके अनुसार, लोगों को उन कानूनी सेवाओं को हासिल करने में कम समय लगेगा, जिनके वे हकदार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लद्दाख के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। The Union Cabinet, under the leadership of the PM Shri @narendramodi Ji, has decided to set up a bench of the High Court of Jammu and Kashmir in Ladakh. This will significantly enhance access to justice for citizens living in remote areas of Ladakh by reducing the time required… — Amit Shah (@AmitShah) August 20, 2026 लद्दाख के लोगों को क्या फायदा होगा? सरकार के मुताबिक, हाईकोर्ट की बेंच बनने से लद्दाख के दूरदराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों को न्यायिक सेवाओं तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी। कानूनी सेवाओं के लिए लगने वाला समय कम होने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस फैसले का उद्देश्य लद्दाख में न्याय व्यवस्था तक नागरिकों की पहुंच को और बेहतर करना है। अमित …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

IND vs ENG Hockey Live: सेमीफाइनल के लिए दावा मजबतू करने उतरेगी भारतीय महिला टीम, सामने इंग्लैंड की चुनौती

भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत ओलंपिक रजत पदक विजेता और दुनिया की चौथे नंबर की टीम चीन को 2-2 से ड्रॉ पर रोककर की थी। इसके बाद टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। मुख्य कोच शोर्ड मारिन की टीम ने टूर्नामेंट में अब तक प्रभावी प्रदर्शन किया है। चीन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 2-2 से ड्रॉ खेलने के बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि भारत के छह गोल छह अलग-अलग खिलाड़ियों ने किए। भारतीय टीम की 11 खिलाड़ी पहली बार विश्व कप में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक बिना किसी दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखाया है।सविता (गोलकीपर), सलिमा टेटे (कप्तान), नवनीत कौर, साक्षी राणा, ऋतुजा डाडोसा पिसल, इश्किा चौधरी, लालरेमसियामी, सुनेलिता टोप्पो, नेहा, ज्योति, सुशीला चानू।बिच्छू देवी खरीम्बाम (गोलकीपर), इश्किा, दीपिका, बलजीत कौर, निक्की प्रधान, ब्यूटी डुंगडुंग, शिल्पी दबास। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 1 min · National Desk

बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव: मिर्जा फखरुल ने ओली अहमद को हराया, कब लेंगे शपथ?

बांग्लादेश को नया राष्ट्रपति मिल गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्होंने सेवानिवृत्त कर्नल ओली अहमद को हराया। यह चुनाव कई मायनों में खास रहा। बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए सीधा मुकाबला हुआ। 1991 के बाद पहली बार इस पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने थे। हाल के वर्षों में राष्ट्रपति का चुनाव ज्यादातर आम सहमति या निर्विरोध हुआ था। मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन ने नतीजों का एलान किया। उनके मुताबिक, मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को 255 वोट मिले। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट हासिल हुए। यानी आलमगीर ने 167 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 349 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 343 सांसदों ने मतदान किया। छह सांसदों ने वोट नहीं डाला। वोटिंग गुरुवार को संसद भवन में हुई। मतदान के बाद वोटों की गिनती की गई। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने नतीजे घोषित किए और आलमगीर को बांग्लादेश का निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित किया।ओली अहमद लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष हैं। वह जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार थे। वहीं, 78 वर्षीय मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर सत्तारूढ़ बीएनपी के उम्मीदवार थे। चुनाव जीतने के साथ ही वह बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति चुने गए हैं।यह राष्ट्रपति चुनाव अचानक खाली हुए पद की वजह से कराना पड़ा। बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। मोहम्मद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

उत्तर भारत में मानसूनी आफत: प्रयागराज हुआ पानी-पानी, हिमाचल और उत्तराखंड में भूस्खलन से तीन-तीन लोगों की मौत

1 of 4 उत्तर भारत में बारिश और भूस्खलन से बढ़ी मुसीबत - फोटो : अमर उजाला खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें मानसूनी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के उफान से बाढ़ का संकट गहरा गया है, वहीं पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और मकान ढहने जैसी घटनाओं में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 2 of 4 प्रयागराज में जल भराव। - फोटो : अमर उजाला। उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में मंडराया बाढ़ का संकट कानपुर गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं, जहां से 2,95,637 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। 24 घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर नैनी में 59 सेंटीमीटर और छतनाग में 57 सेंटीमीटर बढ़ गया है। फाफामऊ में गंगा 80.39 मीटर पर बह रही है, जो प्रयागराज के 84.734 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 4.34 मीटर नीचे है। कानपुर से छोड़े जा रहे इस पानी के कारण प्रयागराज और कौशांबी के कछारी व निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है। 3 of 4 हिमाचल में मानसून कहर बरपा रहा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क हिमाचल प्रदेश: भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित खदान में हुए भूस्खलन में दबे तीनों मजदूरों के शव मलबे से बरामद कर लिए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 167 सड़कें, 222 पेयजल योजनाएं और 130 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। कालका-शिम …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

RSS पर राहुल गांधी का हमला: 'कोई कैसे जान सकता है 1.5 अरब लोगों की सच्चाई?' स्वराज-शिक्षा व्यवस्था पर भी बरसे

दिल्ली में ‘हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी एक समूह या व्यक्ति को यह मानने का अधिकार नहीं है कि वह देश की 1.5 अरब आबादी की सच्चाई जानता है। राहुल गांधी ने कहा “यही आरएसएस के साथ मेरी समस्या है। आरएसएस ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों की सच्चाई जानता है। मैं कहता हूं कि केवल 1.5 अरब लोग ही अपनी सच्चाई जान सकते हैं।” उन्होंने कहा कि अगर वह यह मान लें कि वह किसी दूसरे व्यक्ति की सच्चाई जानते हैं तो यह गलत होगा, क्योंकि उन्होंने उस व्यक्ति के अनुभवों और परिस्थितियों को नहीं देखा है। भारत की असली वैचारिक लड़ाई क्या है? राहुल गांधी ने कहा कि आज देश में वैचारिक लड़ाई सिर्फ पर्यावरण, राजनीति या स्वतंत्र मीडिया जैसे मुद्दों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, असली सवाल यह है कि क्या कोई समूह यह तय कर सकता है कि देश के हर व्यक्ति की सच्चाई वही जानता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्रों से जुड़े एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इसका मतलब यह संदेश देना है कि “मैं सब कुछ जानता हूं, आप कुछ नहीं जानते।” राहुल गांधी ने ‘स्वराज’ को लेकर क्या कहा? राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्रों ने विरोध किया तो मोहन भागवत की ओर से भी छात्रों पर हमला नहीं करने की बात कही गई, लेकिन उनके अनुसार छात्रों पर लगातार हमला इसलिए हो रहा है क्योंकि कुछ लोग मानते हैं कि वे उनकी सच्चाई जानते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि अगर देश के हर कारोबार का मालिक एक ही व्यक्ति हो तो बड़ी आबादी के लिए स्वराज संभव नहीं है। उन्होंने कहा “अगर एक व्यक्ति इस देश के हर एक कारोबा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk

JPSC विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 11वीं-13वीं परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के आदेश पर रोक

झारखंड सरकार की ओर से 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में बीते दिन बुधवार को दो अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की गई थी। वहीं, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ भी हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई थी।इस दौरान जेएएस अधिकारी सूर्य प्रकाश कुजूर ने कहा, “हमें सरकार की ओर से देर रात करीब 12:30 या 1 बजे नोटिस मिला था। जब हमें 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने की जानकारी मिली तो हम पूरी तरह टूट गए थे। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा कुछ हो सकता है। गौरतलब है कि झारखंड परीक्षा विवाद को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दबाव के बाद प्रदेश सरकार को 45 परीक्षाएं रद्द और स्थगित करनी पड़ी है। सरकार को झुकना पड़ा। इस सच को हलक से नीचे उतारने में सरकार को 25 दिन से ज्यादा का समय लग गया। वहीं, जब सरकार ने सच स्वीकार किया तो परिणाम सामने आया 22 परीक्षाओं का रद्दीकरण, छह परीक्षाओं का स्थगन और 17 आयोजित परीक्षाओं की सीआईडी जांच का फैसला लिया था। लेकिन सीजीएल परीक्षा रद्द किए जाने के बाद चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन का आज तीसरा दिन है। रांची में अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा हुआ है। ऐसे में सरकार के सामने चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभ्यर्थियों ने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले को वापस लेने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर विरोध जताया और कहा कि सरकार नौकरी नहीं दे सकती तो उन्हें फांसी दे दे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 20, 2026 · 2 min · National Desk