1 of 4 उत्तर भारत में बारिश और भूस्खलन से बढ़ी मुसीबत - फोटो : अमर उजाला खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें मानसूनी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। जहां एक तरफ उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के उफान से बाढ़ का संकट गहरा गया है, वहीं पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और मकान ढहने जैसी घटनाओं में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 2 of 4 प्रयागराज में जल भराव। - फोटो : अमर उजाला। उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में मंडराया बाढ़ का संकट कानपुर गंगा बैराज के सभी 30 गेट खोल दिए गए हैं, जहां से 2,95,637 क्यूसेक पानी प्रति सेकंड गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। 24 घंटे के भीतर यमुना का जलस्तर नैनी में 59 सेंटीमीटर और छतनाग में 57 सेंटीमीटर बढ़ गया है। फाफामऊ में गंगा 80.39 मीटर पर बह रही है, जो प्रयागराज के 84.734 मीटर के खतरे के निशान से लगभग 4.34 मीटर नीचे है। कानपुर से छोड़े जा रहे इस पानी के कारण प्रयागराज और कौशांबी के कछारी व निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा काफी बढ़ गया है। 3 of 4 हिमाचल में मानसून कहर बरपा रहा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क हिमाचल प्रदेश: भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त कमरऊ क्षेत्र के बागनाधार स्थित खदान में हुए भूस्खलन में दबे तीनों मजदूरों के शव मलबे से बरामद कर लिए गए हैं। आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, प्रदेश में 167 सड़कें, 222 पेयजल योजनाएं और 130 बिजली ट्रांसफार्मर ठप हो गए हैं। कालका-शिम …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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