Explainer: राज्यसभा चुनाव कहां निर्विरोध निर्वाचन और कहां मतदान की नौबत; जहां वोटिंग वहां किसके पक्ष में गणित?

कर्नाटक कर्नाटक में क्यों हो रहा चुनाव? कर्नाटक में कुल 12 राज्यसभा सीटें हैं। इनमें से चार सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। जिन सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें जनता दल (सेक्युलर) के सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री एचेडी देवेगौड़ा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, भाजपा के इरन्ना कदादी और नारायण कोरगप्पा शामिल हैं। इन सभी का 25 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। चार सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर 11 जून तक कोई भी उम्मीदवार नाम वापस नहीं लेता तो यहां 18 जून को मतदान होगा। कर्नाटक में कौन कितनी सीटें जीत सकता है? नामांकन दाखिल करने वाले पांच उम्मीदवारों में मल्लिकार्जुन खरगे, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति सचिव मंसूर अली खान और पार्टी के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा शामिल हैं। भाजपा ने यहां से एम नागराज को उम्मीदवार बनाया है। कोडागु जिले के बोजन्ना सोमैया निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर उतरे हैं। क्या है कर्नाटक का समीकरण? 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में इस वक्त दो सीटें खाली हैं। किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए कम से कम 45 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इस वक्त कांग्रेस के पास विधानसभा अध्यक्ष समेत कुल 135 विधायक हैं। सत्ताधारी दल को दो निर्दलियों और एसकेएम के एक विधायक का भी समर्थन है। इस लिहाज से पार्टी अपने तीनों उम्मीदवार जिता सकती है। वहीं, भाजपा के 62 विधायक हैं। उसके पास जेडीएस 18 और केआरपीपी के एक विधायक का भी समर्थन है। यानी, वो अपने आधिकारिक उम्मीदवार को आसानी से जिता सकती है। भाजपा से असंबद्ध किए गए तीन विधायक किसे वोट करते हैं ये देखना होगा। अगर निर्दलीय सोमैया भाजपा और उसके सहयोगियों के वोट के साथ कांग्र …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) मूल लेख स्रोत पर पढ़ें ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

ममता के मन में क्या?: 24 घंटे में दूसरी बार सोनिया से मिलीं, TMC में बगावत के बाद आगे की रणनीति पर चर्चा संभव

विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक में सहयोगी दलों के बीच एकता और बेहतर तालमेल पर जोर दिए जाने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी मंगलवार को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंचीं। यह बैठक सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर हुई। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा की संभावना? सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच विपक्षी गठबंधन की बैठक के बाद की राजनीतिक स्थिति और हालिया बंगाल चुनावों में भाजपा से हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम पर चर्चा होने की संभावना है। साथ ही दोनों दलों की आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जा सकता है। ये भी पढ़ें: आंतरिक असंतोष से गुजर रही टीएमसी यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है, जब सोमवार को विपक्षी गठबंधन की बैठक के दौरान सोनिया गांधी और ममता बनर्जी ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का अभिवादन किया था। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की आत्मीयता दर्शाने वाली तस्वीरें भी साझा की थीं। तृणमूल कांग्रेस इस समय आंतरिक असंतोष के दौर से गुजर रही है। पार्टी के कई सांसदों ने अलग गुट बनाने और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ जाने का फैसला किया है। बंगाल चुनावों में तृणमूल की हार और चुनाव के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं तथा सांसद अभिषेक बनर्जी पर कथित हमलों के बाद ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच यह पहली बंद कमरे में होने वाली बैठक होगी। सोनिया-ममता के बीच 10 मिनट तक हुई थी बातचीत इससे पहले इंडिया ब्लॉक की बैठक शुरू होने से पहले का एक दृश्य राजनीतिक घटनाक्रम पर भारी पड़ गया था। बैठक स्थल पर तय समय से कुछ मिनट पहले पहुंचीं कांग्रेस नेता सोनिया गांधी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

Explainer: जोजिला सुरंग कितनी खास? करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने रची हमले की साजिश, अब मिली अभेद्य सुरक्षा

Explainer: जोजिला सुरंग कितनी खास? करगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान ने रची हमले की साजिश, अब मिली अभेद्य सुरक्षा ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जोजिला दर्रे पर बन रही इस सुरंग का इतिहास क्या है? इसे बनाने की जरूरत क्यों महसूस की गई? सुरंग कहां से कहां तक स्थित है? इसे बनाने में कितना खर्च आया है? इसके अलावा इस सुरंग की खास बातें क्या हैं? साथ ही कारगिल युद्ध से जुड़ी इसकी कहानी क्या है? आइये जानते हैं… भारत के अहम जोजिला सुरंग प्रोजेक्ट में मंगलवार (9 जून) को एक बड़ा पड़ाव आया। जोजिला दर्रे के ठीक नीचे स्थित निर्माणाधीन इस सुरंग में अहम ब्रेकथ्रू हासिल किया गया। केंद्रीय सड़क-परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में कारगिल की तरफ खुलने वाले इस सुरंग के हिस्से पर ब्लास्टिंग (धमाकों) का आखिर राउंड पूरा कर लिया गया। यानी सुरंग से आखिरी ब्लॉक हटने के बाद अब जोजिला सुरंग का निर्माण और तेज होते हुए अपने अंतिम चरण तक पहुंच गया है। जोजिला दर्रे पर बन रही इस सुरंग का इतिहास क्या है? जोजिला दर्रे पर बन रही इस अहम सुरंग के निर्माण का इतिहास करीब एक दशक पुराना है। यूं तो इसका अधिकतर काम मोदी सरकार में ही हुआ है, लेकिन इसकी योजना को आधिकारिक तौर पर मंजूरी 2013 में ही मिल गई थी। जोजिला दर्रे पर बन रही इस अहम सुरंग के निर्माण का इतिहास करीब एक दशक पुराना है। यूं तो इसका अधिकतर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

Explainer: भारत में गिरती प्रजनन दर पर मस्क क्यों चिंतित, इससे कितना नुकसान; खतरे से कैसे निपट रहीं सरकारें?

Explainer: भारत में गिरती प्रजनन दर पर मस्क क्यों चिंतित, इससे कितना नुकसान; खतरे से कैसे निपट रहीं सरकारें? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर एलन मस्क का पूरा बयान क्या था और इसमें किस ओर इशारा किया गया? भारत में प्रजनन दर गिरने की वजह क्या है? इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है? अब देश में इस समस्या से निपटने के लिए क्या किया जा रहा है? इससे पहले गिरती प्रजनन दर की समस्या किन देशों के सामने खड़ी हुई और उन्होंने इससे निपटने के लिए क्या किया है? आइये जानते हैं… भारत में गिरती प्रजनन दर का मुद्दा इस वक्त चर्चा में है। इसकी वजह है भारत से करीब 14 हजार किलोमीटर अमेरिका में बैठे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क का एक बयान। मस्क ने हाल ही में एक्स पर एक पोस्ट में चिंता जताते हुए कहा था कि भारत में जन्म दर अब रिप्लेसमेंट स्तर से नीचे गिर गई है। हालिया वर्षों की बात करें तो मस्क ने ऐसी ही कुछ चेतावनियां जापान और दक्षिण कोरिया को लेकर भी दी थीं। लेकिन अब उनका ध्यान दुनिया के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश- भारत की तरफ है। क्या है एलन मस्क का पूरा बयान? टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क ने एक्स पर अमेरिकी मैगजीन द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट साझा करते हुए अपना बयान दिया था। उन्होंने जिस रिपोर्ट का ग्राफिक साझा किया उसका शीर्षक था- ‘भारत की आबादी जल्द ही कम ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

Delhi: 'हम सब घुटकर मर जाएंगे', जिमखाना क्लब मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, जज ने पूछे ये सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की दिल्ली जिमखाना क्लब, इंडियन पोलो क्लब और दिल्ली रेस क्लब की मूल्यवान जमीन से जुड़ी योजना पर कड़े सवाल पूछे हैं। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने साफ कहा, प्रदूषण से पहले ही घुट रही दिल्ली की सांसें अब और भी छोटी हो जाएंगी, क्योंकि नई दिल्ली नगर पालिका क्षेत्र की बची-खुची हरी-भरी जगहों को भी सरकार ले रही है। थोड़ी-बहुत सांस लेने की जगह बची है, वह भी चली जाएगी। हम सब घुटकर मर जाएंगे। जस्टिस कृष्णा ने इंडियन पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, पोलो क्लब क्यों चाहिए आपको? जिमखाना जैसे हेरिटेज स्ट्रक्चर्स का क्या करेंगे? क्या 20 मंजिला इमारतें बनाएंगे? दिल्ली को क्या बनाना चाहते हैं? पिछले 200 साल में जमीन नहीं चाहिए थी, अब अचानक क्यों? केंद्र सरकार ने 20 मई को जयपुर पोलो ग्राउंड (रेस कोर्स) खाली करने का नोटिस जारी किया था। एसोसिएशन ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की, लेकिन स्टे नहीं मिलने पर हाईकोर्ट की शरण ली थी।हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट को 10 जून तक खाली करने के नोटिस पर स्टे एप्लीकेशन का फैसला करने का निर्देश दिया। पोलो क्लब को बीस जून तक खाली किए जाने का नोटिस दिया गया है।केंद्र सरकार के स्थायी वकील अशीष दीक्षित ने दलील दी, यह जमीन सार्वजनिक व रक्षा प्रयोजनों के लिए जरूरी है। न्यायमूर्ति कृष्णा ने सरकार के तर्क को खारिज करते हुए पूछा-हाइराइज बनाना कैसे जनहित में है? हाइराइज इमारतों से भरी दिल्ली में अब सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा। भगवान सबको बचाए, अगर यही दिल्ली में रहने का तरीका है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

आज का शब्द: वलक्ष और रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता- प्रतिकूल

आज का शब्द: वलक्ष और रामधारी सिंह “दिनकर” की कविता- प्रतिकूल ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- वलक्ष, जिसका अर्थ है-श्वेत, सफेद, चमकीला। प्रस्तुत है रामधारी सिंह “दिनकर” की कविता- प्रतिकूल है बीत रहा विपरीत ग्रहों का लग्न - याम; मेरे उन्मादक भाव, आज तुम लो विराम। उन्नत सिर पर जब तक हो शम्पा का प्रहार, सोओ तब तक जाज्वल्यमान मेरे विचार। तब भी आशा मत मरे, करे पीयूष-पान; वह जिये सोच, मेरा प्रयास कितना महान। द्रुम अचल, पवन ले जाय उड़ा पत्ती - पराग; बुझती है केवल शिखा, कभी बुझती न आग। मेरे मन हो आश्वस्त सोचकर एक बात, इच्छा मैं भी उसकी, जिसका यह शम्ब - पात। साखी है सारा व्योम, अयाचित मिले गान; मैंने न ईष्ट से कहा, करो कवि - सत्व दान। उसकी इच्छा थी, उठा गूँज गर्जन गभीर, मैं धूमकेतु - सा उगा तिमिर का हृदय चीर। मृत्तिका - तिलक ले कर प्रभु का आदेश मान, मैंने अम्बर को छोड़ धरा का किया गान। मानव की पूजा की मैंने सुर के समक्ष, नर की महिमा का लिखा पृष्ठ नूतन, वलक्ष। हतपुण्य अनघ, जन पतित-पूत, लघु - महीयान, मानव कह, अन्तर खोल मिला सबसे समान। समता के शत प्रत्यूह देख अतिशय अधीर, सच है, मैंने छोड़े अनेक विष - बुझे तीर। वे तीर कि जिनसे विद्ध दिशाएँ उठीं जाग, भू की छाती में लगी खौलने सुप्त आग। मैंने न सुयश की भीख माँगते किया गान, थी चाह कि मेरा स्वप्न कभी हो मूर्त्तिमान। स्वर का पथ पा चल पड़ा स्वयं मन का प्रदाह, चुन ली जीवन ने स्वयं गीत की प्रगुण राह। इच्छा प्रभु की मुझमें आ बोली बार - बार, दिव को कंचन - सा गला करो भू का सिंगार। वाणी, पर, अब तक विफल मुझे दे रही खेद, टकराकर भी सकती न वज्र का हृदय भेद। जिनके हित मैंने कण …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

UNSC: 'दुनिया को गुमराह करने की कोशिश नाकाम होगी', संयुक्त राष्ट्र में भारत ने फिर पाकिस्तान को लगाई फटकार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा है। अफगानिस्तान की स्थिति पर आयोजित बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ‘फिटना अल हिंदुस्तान’ शब्द को सरकारी स्तर पर फैलाया जा रहा दुष्प्रचार और गलत सूचना अभियान करार दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि अपने ही देश के भीतर सक्रिय समूहों को ‘फिटना अल हिंदुस्तान’ बताना तथ्यों से परे एक ऐसा नैरेटिव है, जिसे धार्मिक शब्दावली का सहारा देकर पेश किया जा रहा है। भारत ने कहा कि इस तरह की शब्दावली पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान से संचालित उस सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य अपने नागरिकों का ध्यान देश की वास्तविक राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से हटाना है। पर्वथानेनी ने कहा कि भारत के खिलाफ स्थायी शत्रुता का माहौल बनाकर सत्ता और संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे पाकिस्तान की संगठित नफरत की फैक्ट्री का परिणाम बताया।UNSC में भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए गए सैन्य हवाई हमलों की भी आलोचना की। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि किसी नरसंहार को सैन्य अभियान का नाम देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या, उन्हें घायल करना और बच्चों को अनाथ बनाना आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। भारत ने आरोप लगाया कि इन हमलों से अफगान नागरिकों को भारी नुकसान और पीड़ा झेलनी पड़ी है।भारत ने कहा कि एक ओर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून और इस्लामी एकजुटता की बातें करता है, जबकि दूसरी ओर रमजान जैसे प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

शौर्य को सम्मान: मरणोपरांत बेटे को पदक मिलने पर भावुक हुई मां, राष्ट्रपति की आंखें भी नम; देखें पूरी सूची

राष्ट्रपति भवन में रक्षा अलंकरण समारोह में सोमवार को वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। भारतीय सेना के मेजर आदित्य प्रताप सिंह को अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में एक सैन्य अभियान के दौरान असाधारण साहस दिखाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। वहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस के निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर प्रसाद देशमुख को राज्य में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अदम्य साहस दिखाने के लिए शौर्य चक्र प्रदान किया गया है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 1 min · National Desk

भारतीय पेशेवरों को राहत: H-1B वीजा पर ट्रंप की 1 लाख डॉलर फीस को अदालत ने किया रद्द; जज ने कहा- कानून के खिलाफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एच-1बी वीजा नीति को लेकर बड़ा झटका लगा है। एक संघीय अदालत ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) के अतिरिक्त शुल्क को गैरकानूनी करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क अमेरिकी कानून के अनुरूप नहीं है और इसे अमान्य घोषित किया जाना चाहिए। न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि संघीय सरकार के पास इस प्रकार का शुल्क लगाने का स्पष्ट कानूनी अधिकार नहीं था। इसलिए यह निर्णय कानून की सीमाओं से बाहर माना जाएगा। अदालत ने आदेश दिया कि इस शुल्क को निरस्त किया जाए।अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ H-1B वीजा के जरिए काम करते हैं। अदालत के इस फैसले को भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों दोनों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।एच-1बी वीजा अमेरिका का एक प्रमुख कार्य वीजा कार्यक्रम है, जिसके तहत विदेशी विशेषज्ञों को तकनीक, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में काम करने की अनुमति दी जाती है। भारतीय आईटी पेशेवर इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी फीस लागू हो जाती, तो अमेरिका में विदेशी प्रतिभाओं की भर्ती प्रभावित हो सकती थी और कंपनियों के लिए कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करना महंगा हो जाता।बोस्टन की संघीय अदालत के जिला न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने सोमवार को यह फैसला सुनाया। यह मामला 20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा दायर मुकदमे से जुड़ा था। इन राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें सितंबर में नए एच-1बी वीजा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk

संसद का समीकरण: TMC में दरार, DMK का अलग रास्ता, क्या मानसून सत्र में पास होगा परिसीमन बिल? समझिए पूरा गणित

अगर यह राजनीतिक उलटफेर हकीकत में बदलता है, तो इसका सबसे बड़ा असर आगामी मानसून सत्र पर पड़ेगा। केंद्र सरकार के लिए उस परिसीमन बिल को पास कराने की राह आसान हो जाएगी, जो हाल ही में संसद के भीतर संख्या बल के चक्रव्यूह में फंसकर गिर गया था। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पिछली बार संसद में इस बिल को लेकर क्या हंगामा हुआ था, विपक्षी दलों को क्या आपत्ति थी, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर क्या स्टैंड लिया था और अब नए समीकरणों से आंकड़े कैसे बदलेंगे?सरकार जब लोकसभा में परिसीमन बिल, 2026 और उससे जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लेकर आई थी, तो सदन में भारी गतिरोध पैदा हो गया था। विपक्ष ने इस बिल को एकतरफा और संघीय ढांचे के खिलाफ बताया था। विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में आकर नारेबाजी की थी। विपक्ष का मुख्य आरोप था कि सरकार बिना व्यापक सहमति के देश का राजनीतिक नक्शा बदलना चाहती है। संख्या बल के मामले में विपक्ष उस समय पूरी तरह एकजुट था। नतीजा यह हुआ कि सरकार विशेष बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े नहीं जुटा पाई और यह महत्वपूर्ण बिल लोकसभा में गिर गया। इसे सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा गया था।परिसीमन का मतलब होता है देश में आबादी के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को दोबारा तय करना और सीटों की संख्या को बढ़ाना। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों की तीन बड़ी आपत्तियां थीं।डीएमके के नेता एमके स्टालिन और अन्य दक्षिण भारतीय नेताओं का सबसे बड़ा विरोध यह था कि उनके राज्यों ने पिछले पांच दशकों में जनसंख्या नियंत्रण पर बहुत शानदार काम किया है। इसके विपरीत, उत्तर भारत के राज्यों, जैसे उत्तर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 9, 2026 · 2 min · National Desk