Gulmarg Blast: जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में विस्फोट, एक की मौत, कई घायल; इलाके में मचा हड़कंप

आतंकी हमलों पर भारत की जवाबी कार्रवाई पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में आतंकियों की अंधाधुंध गोलीबारी में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय घोड़े वाले (पोनीवाला) समेत कुल 26 बेकसूर लोग मारे गए थे। इस क्रूर हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई, 2025 की सुबह ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। तीन दिन चला संघर्ष इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तीन दिनों तक संघर्ष चला, जिसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उसके कई सैन्य ठिकाने और हवाईअड्डे भी क्षतिग्रस्त हुए। इसके बाद, पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारत के सैन्य अभियान के महानिदेशक (डीजीएमओ) से हमले बंद करने की गुहर लगाई। पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने 10 मई को अपना अभियान रोक दिया था। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया था कि अभियान सिर्फ स्थगित किया गया है और अगर सीमा पार से दोबारा कोई हिमाकत की गई तो इसे तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 1 min · National Desk

Explainer: सुर्खियों में सिया की साजिश, पर महिलाओं के खिलाफ कितना होता है अपराध; क्या हैं देश के ताजा आंकड़े?

Explainer: सुर्खियों में सिया की साजिश, पर महिलाओं के खिलाफ कितना होता है अपराध; क्या हैं देश के ताजा आंकड़े? पुणे में कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या का मामला इस वक्त सुर्खियों में है। आरोप केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन पर है। पिछले साल हनीमून पर गए इंदौर के राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप उसकी नई नवेली पत्नी सोनम पर लगा। ये सिर्फ उदाहरण हैं। बीते कुछ वर्षों में इस तरह के कई मामले आए हैं जब किसी महिला पर अपने ही बेहद करीबी की हत्या का आरोप लगा। इस बदलते सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा जाता है। इन मामलों के बीच आइये जानते हैं कि देश में महिलाएं अपराध का कितना शिकार होती हैं? महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध का आंकड़ा बीत कुछ वर्षों में कैसा रहा है? महिलाएं किस तरह के अपराध का शिकार सबसे ज्यादा होती हैं? महिला अपराध को लेकर क्या कहते हैं एनसीआरबी के ताजा आंकड़े? एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,41,534 मामले दर्ज हुए, जो 2023 के 4,48,211 मामलों से 1.5% कम हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराध के सबसे अधिक मामले पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के रहे, जिनकी संख्या 1,22,027 (27.6%) रही। महिलाओं के अपहरण और किडनैपिंग के 71,241 (16.1%) मामले 2024 में दर्ज किए गए। महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला करने के 43,303 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

Cyber Fraud: साइबर क्राइम की जिस वेबसाइट पर करनी होती है शिकायत, अब उसे ही फर्जी बनाकर ठगी कर रहे स्कैमर्स

साइबर क्राइम की रिपोर्ट करने का आधिकारिक पोर्टल कौन सा है? - फोटो : Amar Ujala AI National Cyber Crime Reporting Fake Portal Alert: सोचिए कि सरकार ने शिकायत करने के लिए एक पोर्टल बनाया, जहां पर आप साइबर क्राइम या किसी धोखाधड़ी की शिकायत कर सकते हैं। पर जालसाज अगर इसी वेबसाइट के नाम पर ठगी करने लगे तो फिर क्या? दरअसल, स्कैमर्स ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के स्क्रीनशॉट और नकली वेबसाइट के नाम पर ठगी कर रहे हैं। चलिए जानते हैं आखिर मामला क्या है और आप इससे कैसे बच सकते हैं… …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 1 min · National Desk

Nihang Dispute: सुलह की राह पर कर्णप्रयाग विवाद, शांति-संवाद से समाधान पर सहमति, निहंगों की चार मांगें क्या?

1 of 6 निहंग विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें कर्णप्रयाग प्रकरण के बाद उत्तराखंड में तनावपूर्ण माहौल के बीच शुक्रवार को उत्तराखंड प्रशासन और निहंग सिख समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच सौहार्दपूर्ण एवं सकारात्मक माहौल में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने शांति बनाए रखने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने पर सहमति जताई। निहंगों ने प्रशासन के सामने मुकदमा वापस लेने, निहंग सिखों से मिलने समेत चार मांगें रखीं। इन पर प्रशासन ने दो दिन का समय मांगते हुए उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई है। निहंग दो दिनों तक पांवटा साहिब में ही रहेंगे। निहंग प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्णप्रयाग घटना में दोनों पक्षों से गलती हुई है और आपसी समझौते के जरिये मामले का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून-व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते, बल्कि भाईचारा और प्रेम का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने मांग रखी कि गिरफ्तार किए गए चार निहंग सिंहों की रिहाई होने तक वह वापस नहीं लौटेंगे। निहंगों ने किसी भी परिस्थिति में कानून को हाथ में नहीं लेने का दिया आश्वासन शुक्रवार को भी उत्तराखंड-हिमाचल सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इसी बीच शुक्रवार को हरिद्वार के एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर, अल्मोड़ा के एसएसपी हरबंस सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी गुरुद्वारा पांवटा साहिब पहुंचे। इस मौके पर डीएसपी पांवटा साहिब मानवेंद्र सिंह और थाना प्रभ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

अस्पतालों-कोचिंग में कब थमेंगे अग्निकांड?: सुप्रीम कोर्ट में कानून बनाने की मांग, याचिका की पांच बड़ी बातें

राष्ट्रीय स्तर पर बने कड़ा नियम: पूरे देश के सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले परिसरों के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए। तीन से चार महीने में हो विशेष ऑडिट: सभी राज्यों में स्कूल, कोचिंग, अस्पताल, होटल और मॉल का समय सीमा के भीतर सघन फायर ऑडिट हो। अवैध निर्माणों पर लगे तुरंत रोक: बिना मंजूरी के चल रहे बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और अवैध मंजिलों पर क्लासरूम, लाइब्रेरी या रेस्तरां चलाने पर पूरी तरह पाबंदी हो। दोषी अफसरों की तय हो जवाबदेही: बिना फायर एनओसी के खतरनाक इमारतों को चलने देने वाले सरकारी अधिकारियों पर सीधे क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए। हादसों के सबूत रखे जाएं सुरक्षित: मालवीय नगर और अलीगंज जैसे हालिया हादसों के सीसीटीवी फुटेज, एनओसी और निरीक्षण रिकॉर्ड को तुरंत सील कर सुरक्षित किया जाए। यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने कहा कि स्कूल, कोचिंग, हॉस्टल, होटल, रेस्तरां, मॉल और अस्पतालों के लिए एक सख्त नियम होना चाहिए। भारी भीड़ वाली इन जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं।याचिका में सभी राज्यों को एक बड़ा निर्देश देने की मांग की गई है। वकील ने कहा कि तीन से चार महीने के भीतर सभी राज्यों में फायर ऑडिट होना चाहिए। खासकर कोचिंग हब, स्कूल, अस्पताल और मॉल की जांच पहले हो।हाल ही में दिल्ली और लखनऊ में दो बड़े हादसे हुए। याचिका में इन हादसों का जिक्र है। वकील ने कहा कि देश में एक जैसा कड़ा कानून नहीं है। इसी वजह से बार-बार ऐसी लापरवाही और मौतें हो रही हैं। याचिका में लिखा है, ‘हादसे के बाद सिर्फ कमेटी बनाना काफी नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है। सरक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

Maharashtra TET 2026: NEET के बाद अब महाराष्ट्र टीईटी परीक्षा का पेपर लीक, कल होने वाला एग्जाम किया गया रद्द

राजनीतिक बयान बाजी तेज मामला प्रकाश में आने पर विपक्षी राजनीतिक दलों ने सरकार पर तीखा हमला किया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के पूर्व महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष ने एक्स पर लिखा, ‘नीट पेपर लीक होने के बाद अब ठाणे में फिर से शिक्षक बनाने वाली टीईटी (TET) परीक्षा का पेपर लीक हो गया। वाह रे भाजपा सरकार! पार्टी चुराते हो, सांसद चुराते हो, विधायक चुराते हो… अरे कम से कम बच्चों के पेपर तो छोड़ दो, वो तो मत चुराओ!’ वहीं, भिवंडी विधायक रईस शेख ने लिखा, ‘कल NEET, आज TET। अब अगला कौन सा एग्जाम है? पेपर लीक होना अब कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक नाकामी का सबूत है। सरकार की अक्षमता का खामियाजा लाखों छात्र भुगत रहे हैं। शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।’ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 1 min · National Desk

UP: गुटबाजी पर अखिलेश यादव सख्त, इन बड़े नेताओं को लखनऊ बुलाकर दी ये हिदायत; साथ ही ये बात भी कही

UP: गुटबाजी पर अखिलेश यादव सख्त, इन बड़े नेताओं को लखनऊ बुलाकर दी ये हिदायत; साथ ही ये बात भी कही बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई अहम बैठक में उन्होंने मुरादाबाद के पांच प्रमुख नेताओं को बुलाकर पूरे मामले की जानकारी ली और साफ संदेश दिया कि गुटबाजी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सांसद रुचि वीरा, राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व मंत्री एवं विधायक कमाल अख्तर, जिलाध्यक्ष जयवीर यादव और पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी मौजूद रहे। समाजवादी पार्टी में मुरादाबाद की सियासत इन दिनों अंदरूनी खींचतान के कारण गरमाई हुई है। पीडीए बैठक में सांसद रुचि वीरा को न बुलाने और कार्यक्रम के पोस्टर-बैनरों से उनका फोटो गायब रहने के विवाद ने ऐसा तूल पकड़ा कि आखिरकार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, सबसे पहले रुचि वीरा ने अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि मुरादाबाद में उनके खिलाफ लगातार माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीडीए बैठक में उन्हें जानबूझकर नहीं बुलाया गया और पोस्टरों से उनका फोटो भी हटाया गया। इसके पीछे उन्होंने कमाल अख्तर की भूमिका होने की बात कही। स्थानीय स्तर पर गुटबाजी करने वाले नेताओं से नाराज हैं सांसद रुचि वीरा ने अखिलेश यादव से साफ कहा कि उनकी नाराजगी पार्टी या राष्ट्रीय नेतृत्व से नहीं, बल्कि स्थानी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

Gujarat: ओला-उबर की टक्कर में अब नया खिलाड़ी? अमित शाह ने गुजरात में लॉन्च की भारत टैक्सी सर्विस

क्या आप भी निजी कैब कंपनियों की मनमानी और कैंसिलेशन की समस्याओं से परेशान हैं? अब इस समस्या का एक नया और ठोस समाधान ‘को-ऑपरेटिव मॉडल’ (सहकारी ढांचे) के जरिए सामने आया है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात में भारत टैक्सी सर्विस को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह भारत का पहला ऐसा राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका मालिकाना हक सीधे तौर पर इसे चलाने वाले ड्राइवर्स के पास होगा। भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में इस पहल को ट्रांसपोर्टेशन एक्सेसिबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। ‘भारत टैक्सी’ की शुरुआत कहां हुई और इसके विस्तार की क्या योजना है? लॉन्चिंग के पहले चरण में इस सेवा को गुजरात राज्य के 14 प्रमुख शहरों में शुरू किया गया है। सरकार और सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य बेहद आक्रामक है; उन्होंने अगले एक महीने के भीतर इस सर्विस के ऑपरेशंस का विस्तार पूरे गुजरात राज्य में करने की योजना बनाई है। इस नए को-ऑपरेटिव मॉडल की जरूरत क्यों पड़ी? लॉन्चिंग कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ टैक्सी सेवाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है और आज यह जरूरत हर घर तक पहुंच गई है। उन्होंने साफ किया कि प्राइवेट सेक्टर की टैक्सी सेवाओं में कई तरह की दिक्कतें उभर कर सामने आ रही थीं, जिससे परेशान होकर आम जनता और ड्राइवर्स दोनों ने ही उनसे मुलाकात कर समाधान की उम्मीद जताई थी। इसी वजह से एक नए सहकारी ढांचे को विकसित करने का निर्णय लिया गया। क्या प्राइवेट कंपनियों पर लगाम कसने के लिए केवल नया कानून बनाना काफी नहीं था? अमित शाह के अनुसार, जब यह मुद्दा सामने आया, तो शुरुआत में यह विचार भी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

UP: भाजपा का 'ओबीसी ब्लूप्रिंट', अब पिछड़े वर्ग के हाथों में तीनों बड़ी कमान, पीडीए की काट है ये नया दांव

पार्टी कह रही है कि यही समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की असली राजनीतिक काट है। ऐसा पहली बार हुआ है जब जिले और काशी क्षेत्र के तीनों बड़े संगठनात्मक पद ओबीसी को दिए गए हैं। अशोक चौरसिया से पहले दिलीप पटेल काशी क्षेत्र के अध्यक्ष थे। दिलीप से पहले महेश श्रीवास्तव अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। पार्टी कह रही है कि यही समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की असली राजनीतिक काट है। ऐसा पहली बार हुआ है जब जिले और काशी क्षेत्र के तीनों बड़े संगठनात्मक पद ओबीसी को दिए गए हैं। अशोक चौरसिया से पहले दिलीप पटेल काशी क्षेत्र के अध्यक्ष थे। दिलीप से पहले महेश श्रीवास्तव अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे में पहले प्रदीप अग्रहरी को महानगर अध्यक्ष और राम सकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाया गया। अब अशोक चौरसिया को काशी क्षेत्र का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने तीनों बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियां पिछड़े वर्ग के नेताओं को सौंप दी। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं और उनका संसदीय क्षेत्र भाजपा के लिए राजनीतिक प्रयोगशाला मानी जाती है। पार्टी ने इसी क्षेत्र से सामाजिक संतुलन का ऐसा मॉडल पेश किया है जिसके दूरगामी राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं। इससे पहले जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा भी ओबीसी समाज से थे जिन्हें बाद में राज्यमंत्री बनाया दिया। काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल भी पिछड़े वर्ग से थे। अब उन्हें प्रदेश इकाई में जगह दी गई है। हालांकि महानगर अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के विद्यासागर राय के पास था, लेकिन अब तीनों प्रमु …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk

'गाजा पर चुप्पी समझ से परे': सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा, बोलीं- भारत अपने पुराने सहयोगियों से भी हुआ दूर

कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि गाजा में इस्राइल की कार्रवाई पर केंद्र सरकार की पत्थर जैसी चुप्पी न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि राष्ट्रीय हितों के नजरिये से भी समझ से परे है। उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरान और पश्चिम एशिया के अपने पारंपरिक सहयोगियों से दूरी बना ली है और इस कारण देश की कूटनीतिक स्थिति प्रभावित हुई है। सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर क्या आरोप लगाए? केंद्र सरकार ने गाजा मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। सरकार की चुप्पी को नैतिक या रणनीतिक आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। भारत वैश्विक जनमत से दूर होता जा रहा है। भारत को मानवीय आधार पर फलस्तीनी लोगों के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए। गाजा में आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाने पर जोर दिया। लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि गाजा में बच्चों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों को देखते हुए भारत को अपनी आवाज उठानी चाहिए थी। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के कई देशों ने गाजा में इस्राइल की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है, लेकिन भारत इस मुद्दे पर चुप है। सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति उपनिवेशवाद विरोध, राष्ट्रीय संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय शांति के सिद्धांतों पर आधारित रही है, लेकिन मौजूदा समय में देश उस रास्ते से दूर होता दिख रहा है। विदेश नीति को लेकर सोनिया गांधी ने क्या कहा? सोनिया गांधी ने दावा किया कि भारत धीरे-धीरे इस्राइल के रणनीतिक दायरे में जाता दिख रहा है, जबकि दुनिया के कई देश गाजा मुद्दे पर अलग रुख अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने फलस्तीन, ईरा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

June 27, 2026 · 2 min · National Desk