पार्टी कह रही है कि यही समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की असली राजनीतिक काट है। ऐसा पहली बार हुआ है जब जिले और काशी क्षेत्र के तीनों बड़े संगठनात्मक पद ओबीसी को दिए गए हैं। अशोक चौरसिया से पहले दिलीप पटेल काशी क्षेत्र के अध्यक्ष थे। दिलीप से पहले महेश श्रीवास्तव अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। पार्टी कह रही है कि यही समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की असली राजनीतिक काट है। ऐसा पहली बार हुआ है जब जिले और काशी क्षेत्र के तीनों बड़े संगठनात्मक पद ओबीसी को दिए गए हैं। अशोक चौरसिया से पहले दिलीप पटेल काशी क्षेत्र के अध्यक्ष थे। दिलीप से पहले महेश श्रीवास्तव अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे थे। भाजपा के नए संगठनात्मक ढांचे में पहले प्रदीप अग्रहरी को महानगर अध्यक्ष और राम सकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाया गया। अब अशोक चौरसिया को काशी क्षेत्र का अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने तीनों बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारियां पिछड़े वर्ग के नेताओं को सौंप दी। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं और उनका संसदीय क्षेत्र भाजपा के लिए राजनीतिक प्रयोगशाला मानी जाती है। पार्टी ने इसी क्षेत्र से सामाजिक संतुलन का ऐसा मॉडल पेश किया है जिसके दूरगामी राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं। इससे पहले जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा भी ओबीसी समाज से थे जिन्हें बाद में राज्यमंत्री बनाया दिया। काशी क्षेत्र के अध्यक्ष दिलीप पटेल भी पिछड़े वर्ग से थे। अब उन्हें प्रदेश इकाई में जगह दी गई है। हालांकि महानगर अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग के विद्यासागर राय के पास था, लेकिन अब तीनों प्रमु …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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