राष्ट्रीय स्तर पर बने कड़ा नियम: पूरे देश के सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले परिसरों के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए। तीन से चार महीने में हो विशेष ऑडिट: सभी राज्यों में स्कूल, कोचिंग, अस्पताल, होटल और मॉल का समय सीमा के भीतर सघन फायर ऑडिट हो। अवैध निर्माणों पर लगे तुरंत रोक: बिना मंजूरी के चल रहे बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और अवैध मंजिलों पर क्लासरूम, लाइब्रेरी या रेस्तरां चलाने पर पूरी तरह पाबंदी हो। दोषी अफसरों की तय हो जवाबदेही: बिना फायर एनओसी के खतरनाक इमारतों को चलने देने वाले सरकारी अधिकारियों पर सीधे क्रिमिनल केस दर्ज किया जाए। हादसों के सबूत रखे जाएं सुरक्षित: मालवीय नगर और अलीगंज जैसे हालिया हादसों के सीसीटीवी फुटेज, एनओसी और निरीक्षण रिकॉर्ड को तुरंत सील कर सुरक्षित किया जाए। यह याचिका वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने दायर की है। उन्होंने कहा कि स्कूल, कोचिंग, हॉस्टल, होटल, रेस्तरां, मॉल और अस्पतालों के लिए एक सख्त नियम होना चाहिए। भारी भीड़ वाली इन जगहों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं।याचिका में सभी राज्यों को एक बड़ा निर्देश देने की मांग की गई है। वकील ने कहा कि तीन से चार महीने के भीतर सभी राज्यों में फायर ऑडिट होना चाहिए। खासकर कोचिंग हब, स्कूल, अस्पताल और मॉल की जांच पहले हो।हाल ही में दिल्ली और लखनऊ में दो बड़े हादसे हुए। याचिका में इन हादसों का जिक्र है। वकील ने कहा कि देश में एक जैसा कड़ा कानून नहीं है। इसी वजह से बार-बार ऐसी लापरवाही और मौतें हो रही हैं। याचिका में लिखा है, ‘हादसे के बाद सिर्फ कमेटी बनाना काफी नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को जीने का अधिकार देता है। सरक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
अस्पतालों-कोचिंग में कब थमेंगे अग्निकांड?: सुप्रीम कोर्ट में कानून बनाने की मांग, याचिका की पांच बड़ी बातें
राष्ट्रीय स्तर पर बने कड़ा नियम: पूरे देश के सार्वजनिक और भीड़भाड़ वाले परिसरों के लिए एक समान और सख्त राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढांचा तैयार किया जाए। तीन से चार महीने में हो विशेष ऑडिट: सभी राज्यों में स्कूल, कोचिंग, अस्पताल, होटल और मॉल का समय सीमा के भीतर सघन फायर ऑडिट हो। अवैध निर्माणों पर लगे तुरंत रोक: बिना मंजूरी के चल रहे बेसमेंट, छतों, अस्थायी ढांचों और अवैध मंजिलों पर क्लासरूम, लाइब्रेरी या रेस्तरां चलाने पर पूरी तरह पाबंदी हो। दोषी अफसरों की तय हो जवाबदेही: बिना फायर एनओसी के खतरनाक इमा