क्या आप भी निजी कैब कंपनियों की मनमानी और कैंसिलेशन की समस्याओं से परेशान हैं? अब इस समस्या का एक नया और ठोस समाधान ‘को-ऑपरेटिव मॉडल’ (सहकारी ढांचे) के जरिए सामने आया है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार को गुजरात में भारत टैक्सी सर्विस को आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। यह भारत का पहला ऐसा राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसका मालिकाना हक सीधे तौर पर इसे चलाने वाले ड्राइवर्स के पास होगा। भारतीय मोबिलिटी सेक्टर में इस पहल को ट्रांसपोर्टेशन एक्सेसिबिलिटी के एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है। ‘भारत टैक्सी’ की शुरुआत कहां हुई और इसके विस्तार की क्या योजना है? लॉन्चिंग के पहले चरण में इस सेवा को गुजरात राज्य के 14 प्रमुख शहरों में शुरू किया गया है। सरकार और सहकारिता मंत्रालय का लक्ष्य बेहद आक्रामक है; उन्होंने अगले एक महीने के भीतर इस सर्विस के ऑपरेशंस का विस्तार पूरे गुजरात राज्य में करने की योजना बनाई है। इस नए को-ऑपरेटिव मॉडल की जरूरत क्यों पड़ी? लॉन्चिंग कार्यक्रम में जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ टैक्सी सेवाओं की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है और आज यह जरूरत हर घर तक पहुंच गई है। उन्होंने साफ किया कि प्राइवेट सेक्टर की टैक्सी सेवाओं में कई तरह की दिक्कतें उभर कर सामने आ रही थीं, जिससे परेशान होकर आम जनता और ड्राइवर्स दोनों ने ही उनसे मुलाकात कर समाधान की उम्मीद जताई थी। इसी वजह से एक नए सहकारी ढांचे को विकसित करने का निर्णय लिया गया। क्या प्राइवेट कंपनियों पर लगाम कसने के लिए केवल नया कानून बनाना काफी नहीं था? अमित शाह के अनुसार, जब यह मुद्दा सामने आया, तो शुरुआत में यह विचार भी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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