Iran: क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद गंभीर है? इस्राइली मीडिया के दावे से मची हलचल

क्या इस्राइली मीडिया ने क्या दावा किया है? मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिखे? क्या ईरान ने इन दावों को स्वीकार किया है? क्या क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी हैं अटकलें? इस्राइल के चैनल-14 और कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई की तबीयत बेहद नाजुक बनी हुई है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के शीर्ष स्तर पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई ने फरवरी 2026 में अपने पिता की मौत के बाद सर्वोच्च नेता का पद संभाला था। तब से उन्होंने कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं किया है और केवल लिखित संदेशों के जरिए ही अपनी बात रखी है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि शुरुआती सैन्य हमलों में वह घायल हुए थे, जिसके बाद उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी एक साक्षात्कार में कहा था कि उनसे सीधे संपर्क करना फिलहाल आसान नहीं है।ईरानी अधिकारियों ने पहले भी मोजतबा खामेनेई की चोटों को गंभीर मानने से इनकार किया था। उनका कहना रहा है कि वह देश के रणनीतिक और प्रशासनिक फैसलों का नेतृत्व कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने भी पहले उनकी चोटों को सतही बताया था। मौजूदा अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर हालत संबंधी दावों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन रिपोर्टों की पुष्टि अभी नहीं हुई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 8, 2026 · 2 min · National Desk

Iran: क्या ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की हालत बेहद गंभीर है? इस्राइली मीडिया के दावे से मची हलचल

क्या इस्राइली मीडिया ने क्या दावा किया है? मोजतबा खामेनेई लंबे समय से सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिखे? क्या ईरान ने इन दावों को स्वीकार किया है? क्या क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी हैं अटकलें? इस्राइल के चैनल-14 और कुछ अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि मोजतबा खामेनेई की तबीयत बेहद नाजुक बनी हुई है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान के शीर्ष स्तर पर उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।रिपोर्टों के अनुसार, मोजतबा खामेनेई ने फरवरी 2026 में अपने पिता की मौत के बाद सर्वोच्च नेता का पद संभाला था। तब से उन्होंने कोई सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं किया है और केवल लिखित संदेशों के जरिए ही अपनी बात रखी है। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि शुरुआती सैन्य हमलों में वह घायल हुए थे, जिसके बाद उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी एक साक्षात्कार में कहा था कि उनसे सीधे संपर्क करना फिलहाल आसान नहीं है।ईरानी अधिकारियों ने पहले भी मोजतबा खामेनेई की चोटों को गंभीर मानने से इनकार किया था। उनका कहना रहा है कि वह देश के रणनीतिक और प्रशासनिक फैसलों का नेतृत्व कर रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों ने भी पहले उनकी चोटों को सतही बताया था। मौजूदा अस्पताल में भर्ती होने और गंभीर हालत संबंधी दावों पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इन रिपोर्टों की पुष्टि अभी नहीं हुई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

सीजेपी में भाई-भतीजावाद हावी?: कोर कमेटी के गठन पर फूटा गुस्सा, अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनशन पर बैठे युवा

भारतीय राजनीत में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद कब किस संगठन में हावी हो जाए पता ही नही चलता। अमूमन राज्य के सभी राजनीतिक दलों पर ये आरोप लगते रहते हैं। अब हाल ही में बने छात्रों के हित में सीजेपी संगठन पर भी यही आरोप लग रहे हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी को लेकर विवाद सामने आया है। अभिजीत दीपके के घर के बाहर पहुंचे कुछ युवाओं ने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। युवाओंं ने बताया कब तक जारी रहेगा अनशन? प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि वे जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रहे और आंदोलन में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई। आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दीपके के करीबी और पहचान वाले लोगों को बुलाया गया जबकि आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन था। उनका दावा है कि जंतर मंतर आंदोलन से करीब 450 लोग कोऑर्डिनेटर के रूप में जुड़े थे लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया। युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात तक पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से बैठक और आंदोलन को लेकर बातचीत होती रही लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनशन पर बैठेंगे और जब तक आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

'दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है': राहुल ने ई20 पेट्रोल पर सरकार को घेरा, वीडियो जारी कर कही ये बात

देश में ई20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर कहा जाता है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन यहां तो पूरी दाल ही काली है। राहुल गांधी ने ई20 पेट्रोल और क्या कहा? राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। जिसमें वह एक कार के पास खड़े होकर बात करते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा, यह ई20 का जो मुद्दा है, वह बहुत बड़ा मुद्दा है। सामान्यतः हम कहते हैं कि दाल में कुछ काला है, लेकिन यह दाल ही काली है। भाइयों और बहनों, इस समय देश में भ्रष्टाचार इतना ज्यादा है कि कई बड़े मुद्दे हमारी प्राथमिकता की सूची में हैं। उन्होंने कहा, आप चिंता मत कीजिए। कांग्रेस सांसद ने वीडियो में आगे कहा कि ई20 का मामला काफी बड़ा है। उन्होंने कहा कि वह इसके खिलाफ जल्द ही अभियान चलाएंगे। इस मुद्दे को भी हम बड़े स्तर पर उठाएंगे, क्योंकि यह लोगों की कार खराब कर रहा है, उनकी मोटरसाइकिलों को खराब कर रहा है, स्कूटरों को खराब कर रहा है। सच कहूं, तो सीधे तौर पर उनकी जेबों से पैसे खींच रहा है। कांग्रेस के आरोप क्या हैं? कांग्रेस का कहना है कि ई20 पेट्रोल लागू होने के बाद लोगों को सस्ता ईंधन मिलने का वादा पूरा नहीं हुआ। पांच अगस्त को पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि मार्च 2025 से देश के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लगभग केवल E20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि ई20 से वाहन कम माइलेज दे रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं का ईंधन खर्च बढ़ गया है। पार्टी का दावा है कि अप्रैल 2023 से म …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

'टीम बनाने में पारदर्शिता नहीं': कोर कमेटी को लेकर CJP में बवाल, दीपके के घर के बाहर क्यों धरने पर बैठें युवा?

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की कोर कमेटी को लेकर विवाद सामने आया है। अभिजीत दीपके के घर के बाहर पहुंचे कुछ युवाओं ने पार्टी नेतृत्व पर परिवारवाद और पक्षपात के आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही जंतर-मंतर छात्र आंदोलन से जुड़े सभी कोऑर्डिनेटर्स को प्रतिनिधित्व देने की मांग की है। युवाओंं ने बताया कब तक जारी रहेगा अनशन? प्रदर्शन कर रहे युवाओं का दावा है कि वे जंतर मंतर पर हुए छात्र आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय रहे और आंदोलन में कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई। आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल अभिजीत दीपके के करीबी और पहचान वाले लोगों को बुलाया गया जबकि आंदोलन से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का आंदोलन था। उनका दावा है कि जंतर मंतर आंदोलन से करीब 450 लोग कोऑर्डिनेटर के रूप में जुड़े थे लेकिन उन्हें बैठक में शामिल नहीं किया गया। युवाओं ने यह भी आरोप लगाया कि देर रात तक पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से बैठक और आंदोलन को लेकर बातचीत होती रही लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि वे अभिजीत दीपके के घर के बाहर अनशन पर बैठेंगे और जब तक आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा। सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ने क्या कुछ कहा? सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा,“एक ग्रुप बनाया गया है और सभी इस बात से सहमत हैं कि अगर चीजें लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें, तो इससे देश का भला होगा। हमें …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

Vijay-Sangeetha: क्या सीएम विजय और संगीता के बीच हुई सुलह? थलापति की पत्नी ने वापस ली तलाक की याचिका

विजय और संगीता की लव स्टोरी बता दें कि विजय और संगीता की लव मैरिज हुई थी। और इनकी लव स्टोरी काफी दिलचल्प है। संगीता सोरनलिंगम का परिवार श्रीलंकाई मूल का है। मगर वे यूनाइटेड किंगडम में बड़ी हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके पिता यूके में बेस्ड एक तमिल बिजनेसमैन हैं। इसके साथ ही श्रीलंका से उनका परिवारिक नाता है। ब्रिटेन की रहने वाली संगीता एक्टर विजय थलापति की जबरा फैन थीं। साल1990 में विजय की फिल्म ‘पूवे उन्नाकागा’ रिलीज हुई तो संगीता ने भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद वे सीधे विजय से मिलने की कोशिश करने लगीं। जब विजय ने उनके प्रयास देखे तो उन्होंने संगीता को अपने घर डिनर के लिए बुला लिया। वहीं उन्होंने संगीता को शादी के लिए प्रपोज कर दिया। इसके बाद संगीता की जिंदगी ही बदल गई। वे फैन की तरह जिस शख्स से एक बार मिलना चाहती थीं। उसी ने उन्हें सारी जिंदगी साथ रहने का प्रस्ताव दे दिया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 1 min · National Desk

बलूचिस्तान: लंबी जंग खिंची तो बिखर जाएगी पाकिस्तानी फौज, कुल तीन अंदरूनी मोर्चों पर फंसी PAK सेना

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल ध्रुव कटोच के मुताबिक पाकिस्तान की सेना इस समय तीन मोर्चों- बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके)- पर भारी सरदर्द झेल रही है। उन्होंने कहा कि दुश्मन देश से लड़ते वक्त जवानों में जज्बा होता है, वह अपनी जान देने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन यहां लड़ाई दुश्मन के साथ नहीं, अंदरूनी है। अपने ही देश में लड़ते हुए रोजाना सैनिकों की मौतें झेलना बेहद मुश्किल काम है। इससे सेना में बगावत की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना इस चौतरफा गृहयुद्ध से 1-2 साल तो लड़ सकती है, लेकिन लंबे समय तक स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पाएगी। सेना के लिए मनोबल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा। कटोच ने कहा कि अगर अमेरिका बलूचिस्तान का समर्थन करता है तो चीन वहां पूरी तरह ब्लॉक हो जाएगा, ग्वादर अमेरिका को मिल जाएगा और बलूचिस्तान को आजादी मिल जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के हित फिलहाल पाकिस्तान से भी जुड़े हैं।विदेश मामलों के जानकार कमर आगा का कहना है कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान को हमेशा एक उपनिवेश की तरह ट्रीट किया और जबरन कब्जा बनाए रखा। गैस और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद बलूच जनता गरीब बनी रही। वहां स्कूल, कॉलेज और बुनियादी ढांचा नहीं बनाया गया। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे ने बलूचियों की समस्याओं को और बढ़ा दिया, जिससे असंतोष चरम पर पहुंचा। यदि इस्लामाबाद ने इसे ताकत से दबाने की कोशिश की, तो उग्रवाद और अशांति और तेजी से फैलेगी। उन्होंने कहा कि भारत को बलूचिस्तान की मदद करनी चाहिए। हालांकि भारत फिलहाल बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन नहीं करेगा, वह वेट एंड वॉच की नीति अपनाएगा।सामरिक माम …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

सुप्रीम कोर्ट: चार साल की दुष्कर्म पीड़िता का इलाज करने से किया था इनकार, अब अस्पताल भरेंगे 12 लाख जुर्माना

सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि वह गंभीर अपराधों के पीड़ितों के उपचार और ऐसे मामलों की जांच के दौरान अस्पतालों तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारियों को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी करेगी।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट का संज्ञान लिया। रिपोर्ट में कहा गया कि बच्ची गंभीर रूप से घायल होने और लगातार खून बहने के बावजूद लगभग पांच घंटे तक जीवित थी, लेकिन संबंधित अस्पतालों ने उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।अदालत ने गाजियाबाद स्थित सुपर स्पेशियलिटी सेंट जोसेफ (मरियम) अस्पताल को 10 लाख रुपये तथा खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर को 2 लाख रुपये पीड़िता के पिता को चार सप्ताह के भीतर अदा करने का निर्देश दिया।16 मार्च को आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति चार वर्षीय बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। काफी देर तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर उसके पिता ने उसकी तलाश शुरू की। बाद में बच्ची बेहोशी की हालत में खून से लथपथ मिली। परिजन बच्ची को सबसे पहले दो निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे, लेकिन आरोप है कि दोनों अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में इस मामले की सुनवाई के दौरान गाजियाबाद पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने और जांच करने में दिखाई गई कथित अनिच्छा पर गंभीर नाराजगी जताई थी।ये भी पढ़ें:पीड़िता के पिता, जो दिहाड़ी मजदू …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk

नई दिल्ली में भारत-चीन की बड़ी बैठक: किन मुद्दों पर हुई बात? सीमा पर भरोसा बढ़ाने की कोशिश

भारत-चीन सीमा मामलों पर बातचीत और समन्वय के लिए गठित वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) की 36वीं बैठक 6 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े मौजूदा हालात की व्यापक समीक्षा की और इस बात पर सहमति जताई कि द्विपक्षीय संबंधों के संतुलित और सकारात्मक विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 1 min · National Desk

Gen Z पर सियासत?: 'युवाओं को आपसे प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं', मोहन भागवत के कार्यक्रम के बाद बोलीं प्रियंका

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा। उन्होंने भागवत की जेन जी और जेन अल्फा के साथ हुई बातचीत के बाद कहा कि देश के युवाओं को उनसे किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। प्रियंका गांधी ने क्या कहा? संसद परिसर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘उन्हें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जी से प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है।‘उनकी ये टिप्पणी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा मुंबई के नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र (एनएमएसीसी) में आयोजित एक सत्र के दौरान जेन जेड और जेन अल्फा के साथ बातचीत करने के एक दिन बाद आई है। कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने क्या कहा? इससे पहले दिन में, कर्नाटक के मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस) और भाजपा पर निशाना साधता। उन्होंने एक्स के एक पोस्ट में लिखा, ‘आरएसएस और भाजपा अपनी शब्दावली को तेजी से अपडेट कर रहे हैं, लेकिन दुर्भाग्य से, इससे उनकी विचारधारा नहीं बदलेगी। सच्चाई वही है - लोगों को बांटना, युवाओं को गुमराह करना और नफरत को नए रूप में पेश करना। संघ वही है, बस उसकी भाषा बदल गई है।’ इसके अलावा, समाजवादी पार्टी (एसपी) के सांसद राम गोपाल यादव ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेनरेशन जी और जेनरेशन अल्फा के साथ बातचीत को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी जब भी खुद को ‘पूरी तरह से घिरी हुई पाती है, तब आरएसएस की ओर रुख करती है। पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने कहा, ‘चूंकि भाजपा सरकार को जेनरेशन जेड से चुनौती मिल रही है, तो क्या उन्हें स्थिति संभालने के लिए मोहन भागवत को भेजना चाहिए? जब भी वे खुद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 7, 2026 · 2 min · National Desk