Assam Special Revision: मतदाता सूची में विशेष संशोधन के बाद असम में 10.56 लाख नाम कटे; ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी

चुनाव आयोग की ओर से जारी एकीकृत ड्राफ्ट सूची के अनुसार, असम में अब कुल 2 करोड़ 51 लाख 9 हजार 754 पंजीकृत मतदाता हैं। इस आंकड़े में 93 हजार 21 डी-वोटर शामिल नहीं हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन नामों को हटाया गया है, वे मृत्यु, स्थानांतरण या डुप्लीकेट प्रविष्टियों के कारण सूची में बने हुए थे। इन्हें हटाकर मतदाता सूची को साफ किया गया है।विशेष पुनरीक्षण के दौरान कुल 10,56,291 नाम हटाए गए। इनमें से 4,78,992 नाम ऐसे थे, जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी। वहीं, 5,23,680 मतदाता अपने पंजीकृत पते से दूसरी जगह स्थानांतरित पाए गए। इसके अलावा 53,619 ऐसे नाम सामने आए, जिनमें जनसांख्यिकीय समानता पाई गई और उन्हें सुधार के लिए चिन्हित किया गया। आयोग के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया घर-घर जाकर सत्यापन के जरिए की गई।असम में डी-वोटर एक विशेष श्रेणी के मतदाता होते हैं, जिन्हें नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में कथित कमी के आधार पर वोट देने के अधिकार से वंचित किया गया है। ऐसे मतदाताओं की पहचान विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत गठित विशेष न्यायाधिकरण करते हैं। डी-वोटर को मतदाता पहचान पत्र जारी नहीं किया जाता। हालांकि, ड्राफ्ट सूची में डी-वोटर से जुड़ी सभी जानकारियां नाम, उम्र और फोटो पहले की तरह ही दर्ज रखी गई हैं।यह विशेष पुनरीक्षण अभियान 22 नवंबर से 20 दिसंबर के बीच चलाया गया। इस दौरान पूरे असम में 61 लाख 3 हजार 103 घरों का सत्यापन किया गया। प्रक्रिया में 35 जिला निर्वाचन अधिकारी, 126 निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, 1,260 सहायक अधिकारी, 29,656 बूथ लेवल अधिकारी और 2,578 पर्यवेक्षक शामिल रहे। इसके अलावा राजनीतिक दलों ने भी 61,533 बूथ लेवल एजेंट तैनात किए, ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Khabaron Ke Khiladi: बांग्लादेश में जारी हिंसा कितनी बड़ी साजिश? विश्लेषकों ने बताया इसके पीछे किनका हाथ

बांग्लादेश में हिंसा बदस्तूर जारी है। ढाका से लेकर चटगांव तक भीड़ के प्रदर्शन और उससे जुड़ी हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं। 12 दिसंबर को इंकलाब मंच के छात्र नेता उस्मान हादी को गोली मार दी गई थी। इसके बाद 18 दिसंबर को हादी का सिंगापुर में निधन हो गया और तब से लेकर अब तक बांग्लादेश में लगातार माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। हिंसा के इस दौर में वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। हर्षवर्धन त्रिपाठी: चिंता इस बात की है कि संघ और भाजपा से जुड़े लोगों के अलावा किसी भी संगठन ने एक भी प्रदर्शन नहीं किया है। बांग्लादेश में 22 दिन में 11 हिंदू मार दिए गए उन्हें लेकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है। मोहम्मद यूनुस सिर्फ कठपुतली हैं। तारिक रहमान लौट कर आएं हैं उनसे एक उम्मीद की किरण दिख रही है। अनुराग वर्मा: भारत ऐसे मामले में शांत नहीं बैठेगा। इससे पहले भी हो चुका है। आज की जो स्थिति है, जिस तरह से बांग्लादेश में हिंसा हो रही है ये एक भारत सरकार के लिए बहुत ही सोचने वाला विषय है वहां के अल्पसंख्यकों के लिए हम क्या कर सकते हैं। आप अपने पड़ोसी को नहीं बदल सकते हैं। जिस तरह से कठपुतली सरकारें हमारे पड़ोस में हैं, वो कट्टरपंथियों की हाथ की कठपुतली बनी हुई हैं। पूर्णिमा त्रिपाठी: यूनुस की सरकार चीन और पाकिस्तान की कठपुतली बन चुकी है। ये हमारे लिए बहुत की चिंता का विषय है। जिस तरह से हत्याएं हो रही हैं ये अपने आप में बहुत चिंता का विषय है। जो हो रहा है उस पर अगर समय रहते हमने अंकुश नहीं लगाया तो ये …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Bengal: SIR कैंप में वोटर चिंतित; तृणमूल सांसद बोले- चुनाव आयोग अब व्हाट्सएप आयोग, CEC से मिलेंगे पार्टी नेता

चुनाव आयोग अब व्हाट्सएप आयोग- अभिषेक बनर्जी इधर, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला करते हुए उसे ‘व्हाट्सएप आयोग’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान राज्य को परेशान करने के लिए किया जा रहा है और चुनाव आयोग को इसके लिए बंगाल के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 45 लोगों की मौत हुई है, छह लोग अस्पताल में भर्ती हैं और 29 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने आत्महत्या का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि टीएमसी ने चुनाव आयोग से पांच बुनियादी सवाल पूछे थे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं मिला। वहीं, आयोग मीडिया से कह रहा है कि जवाब दे दिए गए हैं। ‘बंगाल में क्यों भेजे गए माइक्रो-ऑब्जर्वर?’ उन्होंने सवाल उठाया कि पश्चिम बंगाल में माइक्रो-ऑब्जर्वर क्यों भेजा गया, जबकि गुजरात जैसे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं किया गया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर को चुनिंदा तरीके से केवल बंगाल में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब ड्राफ्ट लिस्ट में 80 फीसदी डेटा मैपिंग पूरी दिखाई जा रही है, तो पहले यह कैसे कहा गया कि 40-50 फीसदी मैपिंग का पता ही नहीं लगाया जा सकता। अभिषेक बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सही सूची छिपा रहा है और केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘आप भारत का चुनाव आयोग हैं, भाजपा का नहीं। अगर आपके पास बांग्लादेशियों की सूची है तो उसे सार्वजनिक करें, नहीं तो बंगाल के लोगों से माफी मांगें।’ यह भी पढ़ें - Karnataka: करावली उत्सव में बड़ा हादसा, मंगलूरू के मेले में अचानक खराब हुआ झूला; …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Amar Ujala Batras: भारत में कितना मुश्किल भरा ट्रांसजेंडर्स का सफर, कानून का क्या असर? देखें पॉडकास्ट

अमर उजाला बतरस एक और हफ्ते आम लोगों की जिंदगी से जुड़े अहम मुद्दे के साथ हाजिर है। इस हफ्ते पॉडकास्ट में चर्चा हुई ट्रांसजेंडर्स और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर। दरअसल, भारत में ट्रांसजेंडर्स के लिए कई अधिकारों का प्रावधान शुरुआत से रहा है। इसके लिए बड़े-बडे़ कानून बने हैं और सुप्रीम कोर्ट तक ने ट्रांसजेंडर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार को समय-समय पर आदेश दिए हैं। हालांकि, इन बातों का क्या असर हुआ है, इसका लेखा-जोखा शायद ही कहीं मिलता है। एंकर नंदिता कुदेशिया ने इस हफ्ते बतरस में इन्हीं मुद्दों पर दो विशेषज्ञों से बात की और जाना की आखिर ट्रांसजेंडर्स के हक की लड़ाई भारत में कहां तक पहुंची है और इसका क्या प्रभाव हुआ है। नंदिता कुदेशिया ने अमर उजाला के स्टूडियो में जिन दो विशेषज्ञों से चर्चा की, उनमें दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता हरप्रीत पुरी और TWEET फाउंडेशन की अभीना अहेर शामिल रहीं। दोनों ही विशेषज्ञों ने कई अहम सवालों के जवाब दिए। मसलन- एक ट्रांसजेंडर का सफर कितना मुश्किलों से भरा होता है? ट्रांसजेंडर के लिए बने कानून समय के साथ कैसे बदले? कानून अधिकार के बाद कितना बदला ट्रांस के लिए माहौल? 2019 के एक्ट की क्या -क्या कमियां हैं और कैसे सुधार कर सकते हैं? बतरस में विशेषज्ञों ने न सिर्फ इन सवालों के जवाब दिए, बल्कि यह भी बताया कि सामाजिक माहौल से ट्रांस कितना परेशान होते हैं। ट्रांस के साथ होने वाले अपराध में सजा के प्रावधान क्या और कितने सही हैं। कानून बनने के बाद भी ट्रांसजेंडर्स के साथ अपराध क्यों नहीं रुक रहे हैं और परिवार और समाज में ट्रांसजेंडर्स के लिए क्या बदलाव होना चाहिए। उनके साथ किस तह के अपराध होते हैं और समाज-सरकार उनके लिए किस तरह से सुधार को बढ़ाव …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Year Ender 2025: 8वां वेतन आयोग; 12 लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री और GST सुधार, 2025 बना आर्थिक बदलावों का गवाह

साल 2025 भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के लिहाज से काफी अहम रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं और सुस्त पड़ती दुनिया की रफ्तार के बीच भारत ने अपनी घरेलू खपत को बढ़ाने के लिए जो आर्थिक फैसले लिए, उनका असर अब साफ दिखने लगा है। 2025 में सरकार ने न केवल छह दशक पुराने इनकम टैक्स कानून को बदलकर एक नई इबारत लिखी, बल्कि जीएसटी की दरों में कटौती और 8वें वेतन आयोग की सुगबुगाहट ने देश के मध्यम वर्ग को भी बड़ी राहत दी। 1. टैक्स रिजीम में ऐतिहासिक बदलाव 12 लाख तक की आय टैक्स फ्री आइए विस्तार से समझते हैं 2025 के उन 5 बड़े आर्थिक फैसलों को, जिन्होंने आपकी जेब और देश की जीडीपी की दिशा तय की। 2025 की सबसे बड़ी हेडलाइन ‘नया इनकम टैक्स कानून, 2025’ (New Income Tax Act, 2025) रही। सरकार ने 1961 के पुराने और जटिल आयकर अधिनियम को खत्म कर दिया है। यह नया और सरलीकृत कानून 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा, लेकिन इसकी रूपरेखा 2025 के बजट में ही तय कर दी गई थी। आम आदमी को क्या मिला? बजट 2025 में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए ‘नई कर व्यवस्था’ के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को टैक्स फ्री कर दिया गया। इसका सीधा मकसद लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा छोड़ना था। नए स्लैब (New Tax Slabs 2025): 0 - 4 लाख: शून्य 4 - 8 लाख: 5% 8 - 12 लाख: 10% 12 - 16 लाख: 15% 16 - 20 लाख: 20% 20 - 24 लाख: 25% 24 लाख से ऊपर: 30% हालांकि, इन कटौतियों का असर सरकारी खजाने पर भी दिखा। आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल से 17 दिसंबर 2025 के बीच नॉन-कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन (जिसमें व्यक्तिगत टैक्स शामिल है) की वृद्धि दर धीमी होकर 6.37% रह गई, जबकि कॉरपोरेट टैक्स में 10.54% की वृद्धि दर्ज की गई। 2. जीएसट …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

BNP Tarique Rahman Voting Constituency: तारिक रहमान बांग्लादेशी मतदाता बने, चुनाव में इस सीट से ठोकेंगे ताल

और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान ने 17 साल से अधिक समय के आत्मनिर्वासन के बाद शनिवार को बांग्लादेश की वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराया और राष्ट्रीय पहचान पत्र (एनआईडी) बनवाने की औपचारिकताएं पूरी कीं। वह हाल ही में लंदन से बांग्लादेश लौटे हैं, जहां वे सितंबर 2008 से रह रहे थे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) मूल लेख स्रोत पर पढ़ें ...

December 27, 2025 · 1 min · National Desk

Congress: दिग्विजय सिंह ने शेयर की मोदी-आडवाणी की तस्वीर, की तारीफ; अब सफाई में कहा- मैं BJP-RSS का घोर विरोधी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक शुरू होने से ठीक पहले अचनाक चर्चा में आ गए। कारण है उनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया गया पोस्ट, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की एक पुरानी तस्वीर साझा की। इस तस्वीर में पीएम मोदी लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर साझा करते हुए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने लिखा कि आरएसएस का एक जमीनी स्वयंसेवक और भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता किस प्रकार नीचे बैठकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बना। उन्होंने इस तस्वीर को प्रभावशाली बताते हुए इसे संगठन की ताकत बताया। हालांकि दूसरी ओर कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के बाद पार्टी सांसद दिग्विजय सिंह से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने संगठन को फिर से सक्रिय करने की बात की, तो उन्होंने इसपर अपनी सफाई। उन्होंने कहा कि दरअसल, मैंने पार्टी संगठन की तारीफ की थी। लोगों ने मेरी बात को गलत समझा। मैं भाजपा और आरएसएस का कट्टर विरोधी हूं। पोस्ट से कैसे शुरू हुई सियासत? बता दें कि दिग्विजय सिंह के इस पोस्ट को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे मौजूदा राजनीतिक हालात से जोड़कर समझ रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या दिग्विजय सिंह अपने इस पोस्ट के जरिए कांग्रेस नेतृत्व को कोई संदेश या नसीहत देना चाह रहे हैं। दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या उनका इशारा कांग्रेस संगठन में जमीनी स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

BJP: 'राहुल गांधी भारत विरोध के स्थायी प्रतिनिधि', भाजपा ने साधा निशाना; पुतिन का जिक्र कर लगाए गंभीर आरोप

और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं जॉर्ज सोरोस के मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस को घेरा भाजपा ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सैम पित्रोदा से सवाल किया गया कि आप जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों के साथ उठते बैठते हैं, जिस पर पित्रोदा ने कहा- हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस पर भाजपा ने कांग्रेस पार्टी से सवाल किया कि आपको किसकी परवाह है? किसके दबाव में राहुल गांधी विदेश जाते हैं? भाजपा ने सवाल किया कि क्या आप भारत विरोधी वैश्विक गठबंधन के सदस्य बन गए हैं? सैम पित्रोदा ने ये बात स्वीकार की है। पुतिन का जिक्र कर भाजपा ने राहुल गांधी पर लगाए आरोप भाजपा ने कहा, ‘हाल ही में राहुल गांधी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से उनकी मुलाकात न होने पर आपत्ति जताई थी। लेकिन मुलाकात सिर्फ मेजबान देश ही तय नहीं करता, बल्कि मेहमान देश भी तय करता है। राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं अभी आप जर्मनी गए थे, तो उन्होंने एक संस्थान में भारत विरोधी बयान दिया, लेकिन वह संस्थान रूस में प्रतिबंधित है।’ जॉर्ज सोरोस का जिक्र कर भाजपा ने कहा, ‘23 जनवरी 2020 को दावोस में जॉर्ज सोरोस ने कहा था कि दुनिया में सिविल सोसाइटी को फिर से स्थापित करने के लिए और राष्ट्रवादी ताकतों को हराने के लिए 10 लाख डॉलर का फंड खर्च करने का एलान किया था और प्रधानमंत्री मोदी का नाम साफ तौर पर लिया था। इससे ये साफ है कि राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी के द्वारा सत्ता पाने की संभावनाएं खत्म होती नजर आ रही हैं, इसलिए वे भारत विरोधी ताकतों की मदद से सत्ता पाने का दिवा-स्वप्न देख रहे हैं।’ ये भी पढ़ें- भाजपा का आरोप- कांग्रेस मैच प्रैक्टिस नहीं करती भाजपा ने कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी पर सवाल उ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Pakistan: 5000 डॉक्टर-11000 इंजीनियर ने छोड़ा पाकिस्तान! PAK के पूर्व सांसद के दावे से मुनीर की हो रही थू-थू

दुनियाभर में कटोरा लेकर घूम रहा पाकिस्तन इन दिनों अपने इतिहास के सबसे बड़े प्रतिभा पलायन (ब्रेन ड्रेन) के दौर से गुजर रहा है। देश की खराब आर्थिक हालत, राजनीतिक अस्थिरता और रोजगार की कमी के चलते बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे और कुशल लोग देश छोड़ रहे हैं। पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में 5,000 डॉक्टर, 11,000 इंजीनियर और 13,000 अकाउंटेंट देश छोड़ चुके हैं। ये आंकड़े सामने आने के बाद सरकार और सेना नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की दुनियाभर में तो थू-थू हो ही रही है। अब खुद पाकिस्तान के लोग ही शहबाज सरकार और उनकी नीतियों पर खूब सवाल खड़े कर रहे हैं।एक तरफ जहां इन आकड़ों को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पूर्व पाकिस्तानी सांसद मुस्तफा नवाज खोखर ने शहबाज सरकार पर निशाना बनाया। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के ‘सो कॉल्ड’ सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसीम मुनीर का एक पुराना बयान ‘ब्रेन ड्रेन’ नहीं ‘ब्रेन ग्रेन’ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खूब चर्चा में है। इतना ही नहीं यूजर्स मुनीर के इस बयान को आधार बनाकर मुनीर की खूब खिल्लियां भी उड़ा रहे है।बता दें कि पाकिस्तान के ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन एंड ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट की रिपोर्ट के बाद सामने आए आंकड़े ने पाकिस्तान में एक नया भूचाल ला दिया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर सेना प्रमुख मुनीर की खूब थू-थू हो रही है। इसका कारण है कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर ने कुछ महीने पहले कहा था कि यह पलायन ‘ब्रेन ड्रेन नहीं, बल्कि ब्रेन गेन’ है। अब जब सरकारी आंकड़े सामने आए हैं, तो सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है।व …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 2 min · National Desk

Congress: दिग्विजय सिंह ने शेयर की मोदी-आडवाणी की पुरानी तस्वीर, तारीफ में कही ऐसी बात; बढ़ा सियासी पारा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक शुरू होने से ठीक पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिससे राजनीति में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्वीर पोस्ट की है। इस तस्वीर में मोदी, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के पैरों के पास बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। तस्वीर के साथ दिग्विजय सिंह ने लिखा कि आरएसएस का एक जमीनी स्वयंसेवक और भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता नीचे बैठकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बना। उन्होंने इसे संगठन की ताकत बताते हुए यह टिप्पणी की। और पढ़ें यह वीडियो/ हटाएं …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

December 27, 2025 · 1 min · National Desk