'संविधान बदलने की कोशिश': एक देश, एक चुनाव पर चिदंबरम ने उठाए सवाल, कहा- सरकार की मंशा नहीं पूरी होने देंगे

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि अगर संसद से ’ ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल पास भी हो जाता है, तो भी 2029 में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं होगा। चिदंबरम ने क्या कहा? चिदंबरम ने एक्स पर लिखा ‘मैं ओएनओई जेपीसी के सामने अपने विचार रखने का मौका मिलने के लिए आभारी हूं। मैं जेपीसी के सामने पेश किए गए अपने सबूतों का खुलासा करने के लिए स्वतंत्र नहीं हूं, लेकिन मेरे बयान का मुख्य मकसद यह था कि यह बिल संविधान की बुनियादी विशेषताओं, खासकर संघीय देश में संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।’ जेपीसी चेयरमैन के उस बयान पर टिप्पणी करते हुए जिसमें कहा गया था कि 2029 में एक साथ चुनाव हो सकते हैं। चिदंबरम ने कहा, ‘मैंने जेपीसी चेयरमैन का वह बयान पढ़ा है जिसमें कहा गया है कि 2029 में एक साथ चुनाव संभव हैं। मुझे लगता है कि उनकी राय गलत है और यह बिल के प्रावधानों के खिलाफ है। अगर बिल पास भी हो जाता है (जिसकी संभावना बहुत कम है), तो बिल के तहत ‘तय तारीख’ केवल ‘आम चुनाव के बाद’ की ही तारीख हो सकती है।उन्होंने आगे कहा, ‘अगले आम चुनाव 2029 में होंगे। इसलिए 2029 में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं है। यह एक अच्छी बात है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएंगे, क्योंकि संघीय ढांचे वाले देश की संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था में यह बिल संवैधानिक रूप से बहुत गलत है।’ पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने क्या सुझाव दिए हैं? इस बीच, ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल की समीक्षा कर रही संसदीय समिति को सोमवार को विचार-विमर्श के दौरान कई सुझाव मिले। सूत्रों के अनुसार, दो पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभा चुन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

Supreme Court: टीएमसी के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, अभिषेक की याचिका पर स्पीकर से मांगा जवाब

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा है। यह मामला पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें इन सांसदों की अयोग्यता से संबंधित याचिकाओं पर फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती दी गई है। 20 सांसदों के खिलाफ क्या है मामला? अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके समक्ष लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। लोकसभा अध्यक्ष और सदन के महासचिव की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष से निर्देश प्राप्त करने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा किया था। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की थी। टीएमसी का कहना है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। पार्टी का तर्क है कि किसी दूसरे राजनीतिक गठन में शामिल होने पर उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून लागू होता है। अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के सामने भी उठाया था मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं में जल्द कार्रवाई करने की मांग की गई थी। अब उन्होंने अयोग्यता की कार्यवाही में कथित देरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

रोहतक सुनारिया जेल: राम रहीम ने साल की आखिरी फरलो भी ली, 21 दिन के लिए आया जेल से बाहर

रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा राम रहीम मंगलवार सुबह 17वीं बार मंगलवार सुबह 21 दिन की फरलो पर बाहर आ गया। यह उसकी साल की आखिरी फरला है। सुबह छह बजे टोयोटा लैंड क्रूजर में हनीप्रीत व अन्य के साथ सिरसा के लिए रवाना हुआ। इससे पहले 27 मई को रामरहीम को एक माह की पैरोल मिली थी। यह अवधि सिरसा डेरे में बिताई थी। #WATCH | Sirsa, Haryana: Rape convict Dera Sacha Sauda chief Gurmeet Ram Rahim Singh arrived at the Dera headquarters in Sirsa from Sunaria Jail after being granted 21-day parole pic.twitter.com/Q7WKr98dvG — ANI (@ANI) August 25, 2026 पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2017 में साध्वी यौन उत्पीड़न केस में राम रहीम को दोषी माना था। तभी से वह सुनारिया जेल में बंद है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने उसकी 21 दिन की फरलो मंजूर की। देर रात मुख्यालय से जेल अधीक्षक राय सिंह के पास कागजात पहुंच गए। कड़ी सुरक्षा में रामरहीम का काफिला सिरसा के लिए रवाना हुआ। हिसार आउटर बाईपास पर जेल रोड मोड़ पर पुलिस की टीम तैनात रही। पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 2017 में साध्वी यौन उत्पीड़न केस में राम रहीम को दोषी माना था। तभी से वह सुनारिया जेल में बंद है। सोमवार को प्रदेश सरकार ने उसकी 21 दिन की फरलो मंजूर की। देर रात मुख्यालय से जेल अधीक्षक राय सिंह के पास कागजात पहुंच गए। कड़ी सुरक्षा में रामरहीम का काफिला सिरसा के लिए रवाना हुआ। हिसार आउटर बाईपास पर जेल रोड मोड़ पर पुलिस की टीम तैनात रही। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

एसआईआर के घेरे में एक और पूर्व राजदूत: अब 75 साल के रमेश चंदर से मांगा सबूत, बेलारूस में रह चुके हैं राजदूत

देओल नगर निवासी चंदर को 27 अगस्त को लाडोवाली रोड स्थित निर्वाचन कार्यालय में अतिरिक्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। उनका कहना है कि वह अपना आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज पहले ही बूथ स्तरीय अधिकारी को दे चुके हैं। इसके बावजूद उनसे नागरिकता साबित करने के लिए और प्रमाण मांगे गए हैं। चंदर ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने जालंधर में लगातार चुनावों में मतदान किया है। उन्होंने 2007, 2012, 2014, 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में मतदान किया। इसके बावजूद अब उनसे मतदाता सूची में बने रहने के लिए नागरिकता और निवास से जुड़े अतिरिक्त प्रमाण मांगे जा रहे हैं।चंदर के लिए यह स्थिति इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उनका जन्म और पालन-पोषण जालंधर में हुआ। उच्च शिक्षा भी उन्होंने जालंधर से हासिल की और दिसंबर 2010 में सेवानिवृत्ति के बाद पिछले करीब 15 वर्षों से जालंधर में ही रह रहे हैं।बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के अभिलेखों के अनुसार चंदर ने 16 फरवरी 2009 से 31 दिसंबर 2010 तक वहां भारत के राजदूत के रूप में सेवाएं दीं। लेकिन अब वही पूर्व राजदूत अपनी मतदाता पहचान बनाए रखने के लिए नागरिकता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में हैं।चंदर के मुताबिक पंजाब में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण में वर्ष 2003 की मतदाता सूची को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। लेकिन वर्ष 2003 में वह जापान में भारत की राजनयिक जिम्मेदारी निभा रहे थे। ऐसे में उनका नाम और विवरण उस समय की स्थानीय मतदाता सूची में नहीं होना स्वाभाविक है।उनका कहना है कि इसी वजह से उनके वर्तमान दस्तावेजों और पुराने अभिलेखों के बीच मेल नहीं बैठ रहा है। चंदर ने कहा कि उन्होंने …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

Supreme Court: तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर सुनवाई आज, किसकी याचिका पर आ सकता है फैसला?

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। पार्टी के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। अभिषेक बनर्जी की रिट याचिका पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर सकती है। याचिका में अयोग्यता की कार्यवाही में हो रही देरी को चुनौती दी गई है। 20 सांसदों के खिलाफ क्या है मामला? तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का दावा किया था। इन सांसदों ने लोकसभा में अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग भी की थी। टीएमसी का कहना है कि ये सभी सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। पार्टी का तर्क है कि किसी दूसरे राजनीतिक गठन में शामिल होने पर उनके खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी कानून लागू होता है। अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के सामने भी उठाया था मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने इससे पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष 20 बागी सांसदों के खिलाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दाखिल की थीं। इन याचिकाओं में जल्द कार्रवाई करने की मांग की गई थी। अब उन्होंने अयोग्यता की कार्यवाही में कथित देरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। इसी याचिका पर मंगलवार की सुनवाई को अहम माना जा रहा है। मानसून सत्र के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने इन 20 बागी सांसदों के लिए सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की थी। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि अयोग्यता की याचिकाओं पर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

India-China Relations: डोभाल-वांग यी वार्ता से तैयार होगी मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात की जमीन, बीजिंग पहुंचे NSA

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मंगलवार को होने वाली 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता का दायरा सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। यह 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से पहले दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर की कूटनीतिक जमीन तैयार करना है। सूत्रों के मुताबिक बीजिंग वार्ता में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और मोदी-शी द्विपक्षीय मुलाकात के लिए जमीन तैयार करने पर चर्चा होगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 1 min · National Desk

योगी सरकार का मेगा प्लान: यूपी में 120 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य, बनेंगे नए औद्योगिक हब

जमीन की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण जरूरत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा फोकस इंडस्ट्री से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ये लक्ष्य बड़ा है क्योंकि अभी तक चार भूमि पूजन समारोह में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा चुकी हैं। यानी दस खरब डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए अगले चार साल में न्यूनतम 93 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना होगा। इस हिसाब से हर साल करीब 23 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की जरूरत है।इस कठिन व बड़े लक्ष्य के लिए बड़े निवेशकों को केंद्र में रखकर आधारभूत परियोजनाएं विकसित की जाएंगी, जिससे एमओयू उत्पादन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बदल सकें। कृषि, अवस्थापना, उद्योग, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, नगर विकास, वित्तीय सेवाएं और ऊर्जा समेत प्रमुख क्षेत्रों के लिए क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। औद्योगिक निवेश के लिए जमीन की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है।राज्य सरकार ने 2026-27 तक करीब दो लाख एकड़ का भूमि बैंक तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण के साथ भूमि पूलिंग, ग्राम समाज की भूमि और विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि के इस्तेमाल जैसे विकल्प अपनाए जा रहे हैं। जुलाई 2026 में हुई समीक्षा के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15,610 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई और 10,678 एकड़ भूमि विकसित की गई।दस खरब डॉलर के लक्ष्य में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर सर्वाधिक फोकस है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक अकेले इस सेक्टर में 26 से 30 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य है। इसके लिए औद्योगिक गलियारों, एक्सप्रेसवे के आसपास और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर को बढ़ावा द …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

Srinagar: तीन दशक बाद खुलीं कश्मीरी पंडितों के हत्याकांड की फाइलें, वंधामा समेत पुराने मामलों की जांच शुरू

कश्मीर घाटी में 1989-90 के दौर में भड़की आतंकी हिंसा और कश्मीरी पंडितों के पलायन के तीन दशक से अधिक समय बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और जांच एजेंसियों ने अनसुलझे आतंकी हत्याकांडों की फाइलें खोलने के क्रम में वंधामा नरसंहार की जांच 28 साल बाद आधिकारिक तौर पर दोबारा शुरू कर दी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने हालिया उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठकों में जांच एजेंसियों को आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन के पुराने मामलों को दोबारा खोलकर पीड़ितों को न्याय दिलाने के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने 1990 के दौर के पूरे टेरर इकोसिस्टम की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। इसमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो उस समय आतंकियों के मददगार थे और आज भी किसी न किसी रूप में तंत्र में मौजूद हो सकते हैं। जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) को नई एफआईआर दर्ज करने, साक्ष्य जुटाने तथा आतंकी हिंसा का शिकार बने परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी सहायता और स्वरोजगार उपलब्ध कराने के साथ उनकी कब्जाई गई जमीनों और संपत्तियों को वापस दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है।बंधामा की खौफनाक वारदात 25 जनवरी 1998 की रात मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के वंधामा गांव में हुई थी। 26 जनवरी की पूर्व संध्या और रमजान के पवित्र महीने में शब-ए-कद्र की रात सेना की वर्दी में आए हथियारों से लैस आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों के घरों में धावा बोल दिया था। आतंकियों ने चार परिवारों के सदस्यों को एक जगह इकट्ठा कर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इसमें नौ महिलाओं और चार बच्चों समेत कुल 23 कश्मीरी पंडितों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मारे गए लोगों में जम्मू से अपने रिश्तेदारों से मिलने आए पांच मेहमान भी शामिल थे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

बंगाल में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक: 72 घंटे का नियम, किन दिनों नहीं देख सकेंगे निजी मरीज?

उन्होंने बताया कि यह रोक तुरंत लागू कर दी गई है। इस तरह कुल 72 घंटे तक निजी प्रैक्टिस पर रोक रहेगी। इसका मकसद यह है कि डॉक्टर सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहें।अधिकारी ने कहा, यह रोक मरीज के भर्ती होने वाले दिन से लागू होगी। इसके बाद अगले 48 घंटे तक भी जारी रहेगी। इसका मकसद यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज लगातार होता रहे। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर जरूरत पड़ने पर अस्पताल में मौजूद रहें। इस आदेश का सीधा असर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पड़ेगा।सरकारी डॉक्टरों के लिए आमतौर पर हर हफ्ते मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने का एक तय दिन होता है। नई व्यवस्था के तहत डॉक्टर उस दिन निजी मरीज नहीं देख सकेंगे। इसके बाद अगले दो दिन भी निजी मरीज नहीं देख पाएंगे। इससे हफ्ते में निजी मरीज देखने के लिए उनके पास कम दिन बचेंगे। कुछ डॉक्टरों की हफ्ते में दो दिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की ड्यूटी होती है। ऐसे डॉक्टरों के लिए यह रोक हफ्ते के ज्यादातर कामकाजी दिनों तक लागू हो सकती है।कुछ डॉक्टरों ने अचानक लगी इस रोक को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे उन मरीजों पर असर पड़ सकता है, जिनका सरकारी डॉक्टरों की देखरेख में निजी अस्पतालों में पहले से इलाज चल रहा है।हालांकि, कुछ मरीजों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने के बाद डॉक्टर अस्पताल में मौजूद रहेंगे। इससे मरीज का लगातार उपचार होता रहेगा। इलाज की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

सूरत में पीएम मोदी के नाम पर मछली बाजार: बिना मंजूरी लगा बोर्ड, कारोबारियों ने जताई आपत्ति; क्यों हुआ विवाद?

क्यों लगा पीएम मोदी के नाम का बोर्ड? सूरत शहर के नानपुरा इलाके में लक्कड़कोट में एक नया मछली बाजार बनाया गया है। इसे सूरत नगर निगम (एसएमसी) ने बनाया है। बाजार के प्रवेश द्वार पर एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है- श्री नरेंद्र मोदी थोक मछली बाजार। बोर्ड के एक कोने में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी है। इस बोर्ड के लगने के बाद कुछ मछली कारोबारियों ने इसका विरोध किया। पीएम के नाम पर क्यों जताई आपत्ति? मछली कारोबारी सुरेंद्र लश्करी ने बाजार के नाम पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाकाहारी हैं। इसलिए उनका नाम मछली बाजार से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। लश्करी ने कहा, नरेंद्र मोदी ने अपनी जिंदगी में कभी समुद्री भोजन (सी फूड) नहीं खाया है। वह पूरी तरह शाकाहारी हैं। इसलिए यह बोर्ड नहीं लगाया जाना चाहिए। ये भी पढ़ें: एसएफएमए ने नाम का समर्थन क्यों किया? हालांकि, सूरत फिश मर्चेंट एसोसिएशन (एसएफएमए) के अध्यक्ष कल्पेश नवसारीवाला ने इस कदम का बचाव किया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने अपने स्तर पर एक प्रस्ताव पारित किया था। इसमें बाजार का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की बात कही गई थी। बोर्ड पर मछली कारोबारियों की एसोसिएशन का नाम भी लिखा है। बाजार के लिए केंद्र ने कितने रुपये दिए? नवसारीवाला ने कहा कि केंद्र सरकार ने बाजार बनाने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3 करोड़ रुपये दिए हैं। उन्होंने मछुआरों के कल्याण के लिए सरकार की ओर से शुरू की गई कई योजनाओं और कामों का भी जिक्र किया। नवसारीवाला ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने यह योजना शुरू की थी। इसके तहत एसएमसी को इस बाजार को बनाने के लिए 3 करोड़ रु …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk