उन्होंने बताया कि यह रोक तुरंत लागू कर दी गई है। इस तरह कुल 72 घंटे तक निजी प्रैक्टिस पर रोक रहेगी। इसका मकसद यह है कि डॉक्टर सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहें।अधिकारी ने कहा, यह रोक मरीज के भर्ती होने वाले दिन से लागू होगी। इसके बाद अगले 48 घंटे तक भी जारी रहेगी। इसका मकसद यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज लगातार होता रहे। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर जरूरत पड़ने पर अस्पताल में मौजूद रहें। इस आदेश का सीधा असर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पड़ेगा।सरकारी डॉक्टरों के लिए आमतौर पर हर हफ्ते मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने का एक तय दिन होता है। नई व्यवस्था के तहत डॉक्टर उस दिन निजी मरीज नहीं देख सकेंगे। इसके बाद अगले दो दिन भी निजी मरीज नहीं देख पाएंगे। इससे हफ्ते में निजी मरीज देखने के लिए उनके पास कम दिन बचेंगे। कुछ डॉक्टरों की हफ्ते में दो दिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की ड्यूटी होती है। ऐसे डॉक्टरों के लिए यह रोक हफ्ते के ज्यादातर कामकाजी दिनों तक लागू हो सकती है।कुछ डॉक्टरों ने अचानक लगी इस रोक को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे उन मरीजों पर असर पड़ सकता है, जिनका सरकारी डॉक्टरों की देखरेख में निजी अस्पतालों में पहले से इलाज चल रहा है।हालांकि, कुछ मरीजों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने के बाद डॉक्टर अस्पताल में मौजूद रहेंगे। इससे मरीज का लगातार उपचार होता रहेगा। इलाज की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें