कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि अगर संसद से ’ ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल पास भी हो जाता है, तो भी 2029 में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं होगा। चिदंबरम ने क्या कहा? चिदंबरम ने एक्स पर लिखा ‘मैं ओएनओई जेपीसी के सामने अपने विचार रखने का मौका मिलने के लिए आभारी हूं। मैं जेपीसी के सामने पेश किए गए अपने सबूतों का खुलासा करने के लिए स्वतंत्र नहीं हूं, लेकिन मेरे बयान का मुख्य मकसद यह था कि यह बिल संविधान की बुनियादी विशेषताओं, खासकर संघीय देश में संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।’ जेपीसी चेयरमैन के उस बयान पर टिप्पणी करते हुए जिसमें कहा गया था कि 2029 में एक साथ चुनाव हो सकते हैं। चिदंबरम ने कहा, ‘मैंने जेपीसी चेयरमैन का वह बयान पढ़ा है जिसमें कहा गया है कि 2029 में एक साथ चुनाव संभव हैं। मुझे लगता है कि उनकी राय गलत है और यह बिल के प्रावधानों के खिलाफ है। अगर बिल पास भी हो जाता है (जिसकी संभावना बहुत कम है), तो बिल के तहत ‘तय तारीख’ केवल ‘आम चुनाव के बाद’ की ही तारीख हो सकती है।उन्होंने आगे कहा, ‘अगले आम चुनाव 2029 में होंगे। इसलिए 2029 में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं है। यह एक अच्छी बात है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बिल के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएंगे, क्योंकि संघीय ढांचे वाले देश की संसदीय लोकतंत्र व्यवस्था में यह बिल संवैधानिक रूप से बहुत गलत है।’ पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने क्या सुझाव दिए हैं? इस बीच, ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल की समीक्षा कर रही संसदीय समिति को सोमवार को विचार-विमर्श के दौरान कई सुझाव मिले। सूत्रों के अनुसार, दो पब्लिक पॉलिसी संस्थानों ने सुझाव दिया कि राज्य विधानसभा चुन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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