करीब साढ़े तीन घंटे चली इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक सेक्टर की स्थिति की समीक्षा की। सरकार का मुख्य फोकस यह रहा कि देश में किसी भी तरह की सप्लाई बाधित न हो। इसके लिए लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने, वितरण व्यवस्था सुधारने और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी दी।बैठक में मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह बनाने का फैसला लिया गया, जो इस संकट से निपटने के लिए लगातार काम करेगा। साथ ही केमिकल, फार्मा, पेट्रोकेमिकल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए जरूरी आयात के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पर जोर दिया गया। सरकार ने माना कि यह संकट सिर्फ तुरंत नहीं बल्कि मध्यम और लंबे समय तक असर डाल सकता है, इसलिए व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है।इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कई मंत्रालयों के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए। कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और सरकारी उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी।बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता जताई गई, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस सप्लाई गुजरती है। इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार ने साफ किया कि वह हालात पर लगातार नजर रख रही है और हर संभावित स्थिति के लिए तैयार है।सरकार ने कहा कि तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कदम उ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
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