बैठक में प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ कच्चे तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति की समीक्षा हुई। साथ ही बिजली और उर्वरक सेक्टर की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। बैठक का मुख्य फोकस निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने, स्थिर लॉजिस्टिक्स सुनिश्चित करने और पूरे देश में वितरण प्रणालियों को सुव्यवस्थित करने पर था, ताकि आवश्यक सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को रोका जा सके। इस दौरान अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को ईंधन की उपलब्धता की वर्तमान स्थिति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी।इस अहम बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत कई बड़े नेता शामिल हुए। इसके अलावा सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों की स्थिति पर जानकारी दी।सूत्रों के अनुसार, सरकार वैश्विक घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं और उद्योगों को प्रभावित न होने देने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है। बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच पर्याप्त भंडार बनाए रखने और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह क्षेत्र तेल और गैस आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।मुख्य समुद्री मार्गों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को लेकर भी चिंता जताई गई है, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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