कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ा कदम: मैक्रों ने ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने का किया समर्थन, कार्नी से की मुलाकात

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कनाडा के यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट सदस्य बनने के प्रस्ताव का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में रणनीतिक संबंध और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए। रविवार को नेताओं की मुलाकात सेंट-पियरे-ए-मिकेलॉन में हुई। यह न्यूफाउंडलैंड के तट के पास स्थित फ्रांस का एक इलाका है, जहां फ्रांस और कनाडा के बीच की दूरी बस कुछ ही किलोमीटर है। अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच कनाडा का यूरोप की ओर तेजी से झुकाव हो रहा है। इसके साथ ही यह जगह इस बदलाव के लिए एक बहुत ही दिलचस्प पृष्ठभूमि है।कार्नी के साथ खड़े होकर मैक्रों ने फ्रेंच भाषा में कहा, ‘हम यूरोपियन यूनियन के साथ करीबी रिश्ते बनाने के उस एजेंडे के बहुत ज्यादा पक्ष में हैं। चाहे वह यूनियन के सहयोगी सदस्य के तौर पर हो,या फिर यूरोपियन समुदाय के पूर्ण सदस्य के तौर पर।’ वहीं, कार्नी ने फ्रेंच भाषा में कहा, ‘कनाडा और फ्रांस के बीच सबसे नजदीकी बिंदु पर सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी है। हमारे मूल्य और भी ज्यादा करीब हैं।‘कार्नी ने कहा कि देश अपनी स्पेस एजेंसियों और रक्षा मंत्रालयों को लॉन्च सिस्टम और जमीन पर आधारित रिसेप्शन सुविधाओं जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने और साझा करने का काम सौंपेंगे। वे ऊर्जा, टेलीकम्युनिकेशन, जलवायु के प्रति लचीलेपन और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए। मैक्रों का यह समर्थन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से कनाडा को ईयू का पहला एसोसिएट सदस्य बनाने का प्रस्ताव रखने के कुछ दिनों बाद आया है।कार्नी ने इस संभावना का स्वागत …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 21, 2026 · 2 min · National Desk

'अगर गलती की तो होंगे दर्दनाक नतीजे': ईरान की दो टूक, गालिबाफ बोले- शर्तें माने यूएस वरना होर्मुज नहीं खुलेगा

अल जजीरा के अनुसार, गालिबाफ ने दो टूक शब्दों में कहा कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक अपनी मांगें और शर्तें स्पष्ट रूप से पहुंचा दी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान की शर्तें पूरी नहीं होतीं, ईरानी लोगों के जरूरी अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत के पुराने ढांचे में लौटने या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की कोई संभावना नहीं है।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य तनाव का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां समुद्री यातायात पर लगाए गए प्रतिबंधों से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति में आगे और बाधा आने की चिंता बढ़ गई है।गालिबाफ के बयान के बाद ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने भी अमेरिका को चेतावनी दी है। ईरान के खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के हवाले से कहा कि अगर अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके हितों को निशाना बनाया जाएगा।सैन्य कमान ने कहा, “अगर अमेरिका इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ कोई गलती करता है, तो क्षेत्र में उसके सभी ठिकानों और हितों को बिना किसी सीमा या विचार के लगातार, प्रभावी और दर्दनाक हमलों का निशाना बनाया जाएगा।” ईरानी सैन्य कमान ने क्षेत्र के उन देशों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिका की किसी सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देंगे। ईरान ने कहा कि ऐसे देशों को कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा और ईरानी सेना की ओर से उनके खिलाफ किसी संयम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 21, 2026 · 2 min · National Desk

इटली में सख्ती की पहल: मेलोनी स्कूलों में बुर्का-नकाब पर प्रतिबंध लगाएंगी; विदेशी छात्रों की संख्या सीमित होगी

इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव प्रस्तावित किया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इस उपाय के तहत इतालवी स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी। यह घोषणा प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर उनकी सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है। मेलोनी ने अपनी राष्ट्रवादी रूढ़िवादी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपाय में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान होगा। इसके तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा के पाठ अनिवार्य किए जाएंगे। ये वे माता-पिता होंगे जिन्हें ‘स्कूल प्रणाली में एकीकृत होने में गंभीर कठिनाइयां’ आ रही हैं। मेलोनी ने रोम में जियोवेंटु नाज़ियोनेल राष्ट्रीय उत्सव में एक जोरदार तालियों के बीच कहा। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारे लिए, जो कोई भी इटली आता है और यहां अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उन्हें हमारी संस्कृति को समझना चाहिए और हमारे नियमों का सम्मान करना चाहिए।’ मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘यह उनका स्वागत करने का एकमात्र गंभीर तरीका है।‘मेलोनी ने विशेष रूप से बुर्का पर प्रतिबंध का उल्लेख किया है। बुर्का एक ऐसा पहनावा है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं और पूरे शरीर को ढकता है। उन्होंने नकाब पर भी प्रतिबंध की बात की। नकाब सबसे रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं, जिसमें केवल आंखें ही दिखती हैं। हालांकि, मेलोनी ने रविवार को (20 सितंबर) अपने संबोधन में हिजाब का कोई जिक्र नहीं किया। हिजाब एक सिर पर पहना जाने …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 21, 2026 · 2 min · National Desk

शशि थरूर का एक और नया कठिन शब्द चर्चा में: जानें क्वॉकरवॉडजर का हिंदी मतलब क्या है, सरकार पर कैसे कसा तंज?

थरूर ने क्वॉकरवॉडजर को अभी क्यों चर्चा में ला दिया? क्या थरूर पहले भी इस शब्द का इस्तेमाल कर चुके हैं? थरूर के ऐसे शब्दों से सोशल मीडिया पर क्या होता है? फैरागो और ट्रोग्लोडाइट का क्या मतलब है? क्वॉकरवॉडजर का मतलब क्या है? थरूर ने इस शब्द की परिभाषा साझा करते हुए बताया कि क्वॉकरवॉडजर ऐसे राजनीतिक व्यक्ति को कहा जाता है, जो किसी दूसरे व्यक्ति के नियंत्रण में हो और उसके निर्देश पर काम करता हो। इसी अर्थ को सामने रखते हुए थरूर ने इसे हमारे दौर का शब्द बताया और कहा कि उनका मानना है कि पिछले करीब 12 वर्षों में उनकी नजर में सत्तारूढ़ दल ने ऐसे कुछ लोगों को पैदा किया है। यह टिप्पणी उन्होंने सरकार और सत्तारूढ़ दल पर राजनीतिक तंज के तौर पर की।शशि थरूर अक्सर सोशल मीडिया पर ऐसे अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो आम बोलचाल में बहुत कम सुनाई देते हैं। इस बार भी उन्होंने पहले शब्द साझा किया और फिर उसका अर्थ बताया। इसके बाद उन्होंने इसे मौजूदा दौर से जोड़ते हुए राजनीतिक टिप्पणी की। उनके पोस्ट में शब्द की परिभाषा के साथ एक तस्वीर भी साझा की गई थी। थरूर की इस शैली के कारण उनके पोस्ट पर लोगों का ध्यान गया और क्वॉकरवॉडजर शब्द चर्चा में आ गया।हां। थरूर ने अप्रैल 2022 में भी क्वॉकरवॉडजर शब्द का अर्थ साझा किया था। उस समय उन्होंने इसे राजनीतिक शब्दावली में उपयोगी जोड़ बताया था। यानी यह शब्द उनके लिए नया नहीं है। इस बार उन्होंने इसे फिर से साझा करते हुए इसे हमारे दौर का शब्द बताया और इसके अर्थ को मौजूदा राजनीति से जोड़कर अपनी टिप्पणी की।थरूर लंबे समय से अपने जटिल और कम इस्तेमाल होने वाले अंग्रेजी शब्दों के लिए जाने जाते हैं। उनके ऐसे पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यू …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 21, 2026 · 2 min · National Desk

यूपी: प्रदेश में होगी 7600 होमगार्डों की भर्ती, 41424 होमगार्ड की भर्ती के बाद भी रिक्त पद शेष; जानिए डिटेल

प्रदेश में होमगार्ड स्वयंसेवकों की फिर भर्ती होगी। राज्य सरकार ने इस बाबत होमगार्ड संगठन को मंजूरी प्रदान कर दी है। ये भर्तियां वर्तमान में प्रचलित 41,424 होमगार्ड के पदों के अतिरिक्त होंगी। दरअसल जनवरी, 2026 में होमगार्ड संगठन में 7600 पद रिक्त होने की वजह से भर्ती की जानी है। बता दें कि प्रदेश में होमगार्ड स्वयंसेवकों के कुल 1,18,348 पद हैं, जबकि वर्तमान में महज 69,324 कार्यरत हैं। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा 41,424 पदों पर भर्ती के लिए एनरोलमेंट की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा का आयोजन 12 जिलों में हो रहा है। इसके बावजूद नियतन के अनुसार 7600 पद रिक्त हैं। अब इन पदों पर भर्ती कर नियतन को पूरा कर लिया जाएगा। इससे कानून-व्यवस्था समेत तमाम कार्यों में होमगार्ड की उपलब्धता हो सकेगी। बता दें कि तमाम विभाग भी होमगार्ड की सेवाएं लेते हैं जिसके बदले में भुगतान करते हैं। वहीं विधानसभा चुनाव समेत महत्वपूर्ण आयोजनों में भी होमगार्ड स्वयंसेवकों की खासी मांग होती है।होमगार्ड संगठन में जल्द ही लिपिक संवर्ग, ब्लॉक आर्गनाइजर, प्लाटून कमांडर समेत तमाम अन्य पदों पर भी भर्ती होनी है। इसका प्रस्ताव भी तैयार हो चुका है। जल्द ही शासन की मंजूरी मिलते ही इन पदों पर सीधी भर्ती की कवायद शुरू कर दी जाएगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk

'पद पर थे, तब नहीं आई मुसलमान की याद': हामिद अंसारी के किस बयान पर मचा बवाल? मुस्लिम धर्मगुरुओं ने किया किनारा

एएनआई से बातचीत में रशीदी ने अंसारी के पद पर रहते हुए मुसलमानों के पक्ष में दिए गए बयानों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति पद से हटने के बाद अंसारी की ओर से इस तरह के कई बयान सामने आए हैं। रशीदी ने कहा, ‘हामिद अंसारी जब उपराष्ट्रपति थे, तब उनकी ओर से मुसलमानों के पक्ष में ज्यादा बयान देखने को नहीं मिले। लेकिन पद से हटने के बाद उनके कई बयान सामने आए हैं और ऐसा लगता है कि अब वह खुद को मुसलमानों के नेता के तौर पर पेश कर रहे हैं।‘मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि सांविधानिक पदों पर रहने वाले लोगों को समाज के सभी वर्गों के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने ने यह भी सवाल उठाया कि पद से हटने के बाद ही ऐसे मुद्दे क्यों उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि चरमपंथ को इस आधार पर देखा जाना चाहिए कि क्या उससे दूसरों के प्रति नफरत पैदा होती है। उन्होंने कहा, ‘चरमपंथ तब गलत हो जाता है जब उसमें दूसरों के प्रति नफरत शामिल हो। अगर कोई अपने धर्म का पालन करता है और दूसरों को परेशान नहीं करता, तो यह अलग बात है।‘देश में मुसलमानों के साथ व्यवहार का जिक्र करते हुए रशीदी ने कहा कि विभाजन के समय मुसलमानों ने भारत में रहने का फैसला किया और देश के लिए योगदान दिया। उन्होंने कहा, ‘हम गर्व से कहते हैं कि हम मुसलमान हैं, लेकिन हमें इससे भी ज्यादा गर्व है कि हम भारत में रहते हैं।‘वहीं, आईएएनएस से बातचीत में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी ने भी ‘हिंदू चरमपंथ’ को लेकर अंसारी की टिप्पणी की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘‘हामिद अंसारी अब मुसलमानों के नाम पर राजनीति करना चाहते हैं, लेकिन जब वह बड़े पदों पर थे, तब उन्हें मुसलमानों की याद नहीं आई। आज उन्हें मुसलमान य …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk

यूपी: योगी बोले- प्रदेश में हर सप्ताह होगा बड़ा भर्ती इवेंट, छह महीने में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देंगे

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग के लिए केवल प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। पुलिसकर्मियों को उसी स्तर की सुविधाएं और संसाधन भी उपलब्ध कराने होंगे। सरकार ने पुलिस लाइन, बैरक और आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया है। प्रदेश के 56 जिलों में सबसे ऊंची इमारत पुलिस बैरक या पुलिस की आवासीय सुविधा की है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं मिलने से उनकी कार्यक्षमता भी बढ़ी है। बदलती दुनिया और नई तकनीक के साथ पुलिस को भी लगातार खुद को तैयार करना होगा। तकनीक को समस्या मानकर नजरअंदाज करने के बजाय समाधान के रूप में इस्तेमाल करना होगा। 912 नियुक्तियां, 912 परिवारों के लिए भी प्रेरणा मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि शासन नवचयनित पुलिसकर्मियों से आम आदमी की समस्याओं के समाधान में उसी संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है, जिस संवेदनशीलता के साथ सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। ये नियुक्ति पत्र केवल 912 व्यक्तियों को नहीं मिल रहे, बल्कि 912 परिवारों और उनसे जुड़े समाज के लोगों के लिए भी प्रेरणा बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन युवाओं को देखकर उनके गांव और मोहल्ले के दूसरे नौजवानों में भी विश्वास पैदा होगा कि वे बिना सिफारिश और लेनदेन अपनी योग्यता से सरकारी सेवा का हिस्सा बन सकते हैं। पुलिस सेवा में कर्तव्य पहले, अधिकार बाद में: सुरेश खन्ना वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने नवचयनित अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में होने वाली भर्तियां विवाद और संदेह के घेरे में रहती थीं। पुलिस की सेवा का मतलब केवल पद नहीं है, बल्कि इसमें कर्तव्य पहले और अधिकार बाद में आते हैं। उन्होंने कहा कि पुलि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk

डूसू चुनाव: आपसी कलह और बगावत ने खुलने ही नहीं दिया एनएसयूआई का खाता, निर्दलीय दीपांशु की जीत ने दिखाया आईना

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में चारों केंद्रीय सीटों पर वापसी की कोशिश कर रही एनएसयूआई का चुनावी गणित आपसी कलह और बगावत ने बिगाड़ दिया। टिकट बंटवारे से नाराज दावेदारों के मैदान में उतरने का सीधा असर संगठन के प्रत्याशियों पर पड़ा। नतीजा यह रहा कि एनएसयूआई एक भी केंद्रीय सीट अपने नाम नहीं कर सकी। सबसे बड़ा उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर हुआ, जहां एनएसयूआई से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज कर संगठन को बड़ा झटका दिया। शौकीन ने एबीवीपी के ईशू मौर्य को हराया। ईशू को 16,910 वोट मिले, जबकि एनएसयूआई के अधिकृत प्रत्याशी वीर चतरथ को महज 4,314 वोट मिले। वीर को मिले वोट इस सीट पर नोटा से भी कम रहे। यानी जिस दावेदार को संगठन ने टिकट नहीं दिया, उसी ने संगठन के अधिकृत प्रत्याशी से कई गुना अधिक वोट हासिल कर केंद्रीय पैनल की एक सीट अपने नाम कर ली।अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने राजस्थान के मीणा समुदाय से विजय शंकर मीणा को मैदान में उतारकर डूसू चुनाव में लंबे समय से चर्चा में रहने वाले जाट-गुर्जर समीकरण को चुनौती देने की कोशिश की। हालांकि नतीजों में जातीय समीकरण का असर फिर दिखाई दिया। जाट उम्मीदवार यश डबास ने 24,576 वोट हासिल किए, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट मिले। दसंयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के राजपूत समुदाय से आने वाले लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उन्होंने एनएसयूआई के बागी विशेष यादव को हराया।चुनाव परिणामों के बाद एनएसयूआई भी मान रही है कि संगठन की अंदरूनी खींचतान का फायदा एबीवीपी को मिला। चुनाव से पहले दीपांशु शौकीन, विशेष यादव और समर्थ बेनीवाल समेत कई दावेदारों की टिकट को लेकर नाराजगी सामने आई थी। एनएसयूआई के अनुसा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk

'कर्नाटक सरकार किसानों के साथ': सीएम शिवकुमार ने किन वादों-फैसलों का जिक्र किया, कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में क्या?

मसौदे में छह राज्यों के कुल 56,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने का प्रस्ताव है। कर्नाटक में 20,668 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसके दायरे में आएगा। इसमें 10 जिलों के 33 तालुक और 1,449 गांव शामिल हैं। किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों की चिंता है कि इसका असर खेती, आजीविका और भविष्य के विकास पर पड़ सकता है।कर्नाटक में प्रस्तावित पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र।मसौदे के दायरे में आने वाले तालुकों की संख्या।राज्य के इतने गांव प्रस्तावित क्षेत्र में शामिल हैं।छह राज्यों में प्रस्तावित कुल पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र।केंद्र ने सातवां मसौदा जारी किया।सोमवार से कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे पर विशेष विधानसभा सत्र।अब तक कर्नाटक में सूखाग्रस्त घोषित किए गए तालुक।सीएम शिवकुमार ने कहा कि पहले से जमीन पर खेती कर रहे किसानों को परेशान नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लंबित भूमि अधिकार से जुड़े आवेदनों के निपटारे के लिए कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार नए अतिक्रमण की अनुमति नहीं देगी। उन्होंने वन विभाग को पहले से खेती कर रहे किसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश देने की बात कही।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की चिंताओं को देखते हुए जरूरी कानूनी संशोधनों पर विचार करेगी। केरल की तर्ज पर प्रभावित इलाकों का भौतिक सर्वे कराने और उच्चस्तरीय समिति बनाने के सुझाव पर भी विचार होगा। सरकार इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा करेगी और जरूरत पड़ी तो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को केंद्र के पास ले जाएगी। सोमवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र में कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के साथ सूखे की स्थिति पर भी चर्चा होग …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk

'सिस्टम बनाम छात्र’ पर राहुल को धर्मेंद्र प्रधान का जवाब: गिनाईं योजनाएं और आंकड़े; क्या है पूरा मामला?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जब नेता प्रतिपक्ष अपना एजेंडा फैलाने में व्यस्त हैं, तब भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ी है। उन्होंने कहा कि देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर 2014-15 में 23.7 फीसदी था, जो 2023-24 में बढ़कर 30 फीसदी हो गया। प्रधान ने इस आंकड़े को उच्च शिक्षा तक पहुंच में हुई बढ़ोतरी के तौर पर सामने रखा।प्रधान ने केंद्र की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम-विद्यालक्ष्मी योग्य छात्रों को बिना गारंटी वाले शिक्षा ऋण और ब्याज पर मदद देती है। वहीं पीएम-उषा के जरिए राज्य के संस्थानों में बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है। यानी प्रधान ने राहुल गांधी के शिक्षा व्यवस्था पर सवालों के जवाब में छात्रों के लिए चल रही योजनाओं और उच्च शिक्षा के विस्तार को सामने रखा।धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में भारत की अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत की क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में काफी सुधार हुआ है और देश की संस्थागत क्षमता भी बढ़ी है। प्रधान ने इन उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल चुनौतियों और शिकायतों के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान के अंत में राहुल गांधी से सीधा सवाल किया कि क्या वह छात्रों की समस्याओं के समाधान के बारे में बात करेंगे या हर छात्र की चिंता को राजनीतिक हथियार बनाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के छात्रों को यह बताने के लिए किसी राजनेता की जरूरत नहीं है कि उन्हें गुस्सा होना चाहिए। उनके मुताबिक छात्रों को ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो काम करें, ऐसे मौकों की जरूरत है जो बढ़ें और ऐसी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 20, 2026 · 2 min · National Desk