Mahua Moitra: दिल्ली फ्लाइट में महुआ मोइत्रा ने लगाया बदसलूकी का आरोप; एअरलाइन से की सख्त कार्रवाई की मांग

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली जा रही इंडिगो फ्लाइट में अपने साथ कथित बदसलूकी और उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर एअरलाइन और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। ALERT! i travelled to Delhi today on official work to attend meeting of Parliamentary Standing Committee on Defence. Was on seat 1F on 6E 719. 4-6 men boarded in a group & leered at me & went to back of plane. When flight landed & before doors opened this is what they did &… pic.twitter.com/QE0SwrUY8I — Mahua Moitra (@MahuaMoitra) May 7, 2026 महुआ मोइत्रा ने बताया कि वह आधिकारिक कार्य के लिए दिल्ली जा रही थीं, जहां उन्हें संसद की रक्षा मामलों से जुड़ी स्थायी समिति की बैठक में शामिल होना था। उन्होंने कहा कि वह इंडिगो की फ्लाइट 6E-719 में सीट 1F पर बैठी हुई थीं। सांसद के अनुसार, चार से छह लोग एक साथ विमान में सवार हुए और उन्हें घूरते हुए विमान के पिछले हिस्से में जाकर बैठ गए। उन्होंने दावा किया कि यह व्यवहार असहज करने वाला था।महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि फ्लाइट के दिल्ली में लैंड करने के बाद और विमान का दरवाजा खुलने से पहले उन लोगों ने उनके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया। इतना ही नहीं, उनका वीडियो भी बनाया गया, जिसे उन्होंने गंभीर सुरक्षा उल्लंघन बताया। उन्होंने साफ कहा कि यह किसी तरह का नागरिकों का गुस्सा नहीं था, बल्कि सीधे तौर पर उत्पीड़न और उनकी सुरक्षा का उल्लंघन है।महुआ मोइत्रा ने इंडिगो एअरलाइन से अपील की है कि वह क्रू रिपोर्ट की जांच करे, आरोपियों की पहचान करे और उन्हें तुरंत नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जाए ताकि वे भविष्य मे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

तमिलनाडु में सरकार गठन पर घमासान जारी: माकपा ने राज्यपाल से कहा- लोकतांत्रिक परंपरा निभाएं, टीवीके को दें मौका

माकपा महासचिव एम ए बेबी ने गुरुवार को कहा कि जब किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तब संवैधानिक परंपरा यही कहती है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए राज्यपाल को विजय को शपथ लेने का मौका देना चाहिए। एम ए बेबी ने 1996 का उदाहरण भी दिया, जब अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी का नेता होने के नाते सरकार बनाने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद किसी भी शक से ऊपर होना चाहिए और फैसले में देरी नहीं होनी चाहिए।एम ए बेबी ने यह भी माना कि डीएमके के साथ उनका गठबंधन चुनाव में हार गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण है। माकपा नेतृत्व जल्द चेन्नई में बैठक करेगा और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति में इस समय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने राज्यपाल से मुलाकात कर मांग की है कि तमिलगा वेत्री कड़गम के प्रमुख विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया जाए। थिरुमावलवन का तर्क है कि संविधान के अनुसार, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह और मोदी तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप कर भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विजय को अपना बहुमत राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।23 अप्रैल को हुए चुनावों में किसी को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला, लेकिन अभिने …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

‘विजय को मिले बहुमत साबित करने का मौका’, प्रकाश राज ने किया थलापति का समर्थन; राज्यपाल पर उठाए सवाल

राज्यपाल को विजय को बहुत साबित करने देना चाहिए तमिलनाडु के राज्यपाल की कड़ी आलोचना करते हुए प्रकाश राज ने कहा कि अगर विजय के पास बहुमत है, तो उन्हें दावा पेश करने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। विजय के 108 सीटों के समर्थन और कांग्रेस की पांच सीटों के दावे का जिक्र करते हुए अभिनेता ने कहा कि राज्यपाल का घर सच्चाई नहीं है। इसके अलावा यह सदन का पटल है। राज्यपाल को इस मामले का फैसला सदन में करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें दावा करने दीजिए, उन्हें सदन में साबित करने दीजिए। जनादेश के साथ उन्हें लोकतांत्रिक अधिकार भी क्यों नहीं दिया जा रहा है? यह लोकतंत्र नहीं है, यह वाकई अन्यायपूर्ण है। विजय के विरोधी भी उन्हें नेता के रूप में स्वीकार करें अभिनेता ने कहा कि जो लोग विजय को नेता के रूप में स्वीकार नहीं करते, उन्हें भी इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए। विजय के पास अब अपने आलोचकों को गलत साबित करने का मौका है। हालांकि, शासन केवल मुख्यमंत्री पर ही नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल और पूरे प्रशासन पर भी निर्भर करेगा। उन्होंने विजय की पार्टी के वित्त, कृषि, शिक्षा और नौकरशाही के मैनेजमेंट को लेकर रणनीति पर भी सवाल किया। सभी पार्टियां चुनावी वादे करती हैं और उनका मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि क्या वे उन वादों के प्रति जवाबदेह हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

Bihar Cabinet : जब नीतीश का हाथ खींचकर पीएम मोदी ने बुला लिया; मंत्रिमंडल विस्तार की तस्वीरें देखें

सम्राट चौधरी की सरकार में गठन के 22 दिन बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल का पहला विस्तार किया गया। इस दौरान 32 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित समारोह में मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण पांच-पांच मंत्रियों के समूह में कराया गया। और पढ़ें …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) मूल लेख स्रोत पर पढ़ें

May 7, 2026 · 1 min · National Desk

Niti Ayog Report: सरकारी स्कूलों में क्यों घट रहे छात्र और क्या है प्राइवेट स्कूलों की असलियत? जानिए कड़वा सच

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और उसका भविष्य शिक्षा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर निर्भर करता है। वर्तमान में भारत के स्कूली शिक्षा सिस्टम में एक बड़ा ढांचागत बदलाव देखा जा रहा है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो दशकों में भारतीय माता-पिता का झुकाव सरकारी के बजाय प्राइवेट स्कूलों की तरफ तेजी से बढ़ा है। हालांकि, शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की इस तेज वृद्धि ने गुणवत्ता, समानता और रेगुलेशन को लेकर भी कई गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। आइए, इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट और इसके आर्थिक व सामाजिक प्रभावों को सवाल-जवाब के माध्यम से आसान भाषा में समझते हैं। सवाल: सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में कितनी गिरावट दर्ज की गई है? जवाब: नीति आयोग की रिपोर्ट के डेटा के अनुसार, पिछले दो दशकों में सरकारी स्कूलों में दाखिले में भारी गिरावट आई है। साल 2005 में जहां 71 प्रतिशत छात्र सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे, वहीं वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा गिरकर मात्र 49.24 प्रतिशत रह गया है। इसके विपरीत, अब माध्यमिक शिक्षा के स्तर पर 44.01 प्रतिशत संस्थान प्राइवेट स्कूलों के रूप में संचालित हो रहे हैं। सवाल: अभिभावक सरकारी स्कूलों के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों को क्यों चुन रहे हैं? जवाब: यह शिफ्ट मुख्य रूप से एक धारणा से प्रेरित है। अभिभावकों का मानना है कि प्राइवेट स्कूलों में बच्चों को बेहतर अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा, कड़ा अनुशासन और भविष्य में रोजगार के अधिक बेहतर अवसर मिलते हैं। इसी कारण वे प्राइवेट संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सवाल: क्या प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा का स्तर वास्तव में बेहतर है? जवाब: रिपोर्ट आगाह करती है कि अभिभावकों की उम्मीदें हमेशा जम …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

Bombay HC: सोहराबुद्दीन के भाइयों को झटका, कथित फर्जी मुठभेड़ केस में 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार

22 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति को अहमदाबाद से लौटते समय बस से पुलिस ने हिरासत में लिया। 22–25 नवंबर 2005 शेख और कौसर बी को अहमदाबाद के पास एक फार्महाउस में रखा गया, जबकि प्रजापति को उदयपुर जेल भेजा गया। 26 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। 29 नवंबर 2005 कौसर बी की हत्या और शव को जलाकर नष्ट करने का आरोप। 27 दिसंबर 2006 तुलसी प्रजापति की गुजरात-राजस्थान सीमा के पास कथित मुठभेड़ में मौत। 2005-2006 शेख का परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जांच की मांग की गई; गुजरात सीआईडी को जांच सौंपी गई। 30 अप्रैल 2007 गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट दी कि कौसर बी की भी मौत हो चुकी है और शव नष्ट किया गया। जनवरी 2010 सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी। 23 जुलाई 2010 सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया। 27 सितंबर 2012 सुप्रीम कोर्ट ने मामले का मुकदमा गुजरात से मुंबई स्थानांतरित किया। अक्तूबर 2017 मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 आरोपियों पर आरोप तय किए। नवंबर 2017 मुकदमा शुरू हुआ, 210 गवाहों में से कई गवाह पलट गए। 21 दिसंबर 2018 सभी 22 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया। अप्रैल 2019 सोहराबुद्दीन के भाइयों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। 2025 सीबीआई ने कहा कि वह बरी करने के फैसले को स्वीकार करती है और अपील नहीं करेगी। 16 जनवरी 2026 बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

SC: संजय कपूर संपत्ति विवाद में सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ करेंगे सुलह की कोशिश

दिवंगत उद्योगपति और सोना ग्रुप के मालिक संजय कपूर की मौत के बाद शुरू हुआ करोड़ों की संपत्ति और फैमिली ट्रस्ट का विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय से अदालतों में चल रही इस कानूनी लड़ाई को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने देश के पूर्व सीजेआई डी. वाई. चंद्रचूड़ को इस मामले में मध्यस्थ नियुक्त किया है। इस मध्यस्थता प्रक्रिया के लिए परिवार के सभी पक्षों ने अपनी सहमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर यह मामला इसी तरह अदालतों में चलता रहा, तो इसे सुलझने में कई दशक लग सकते हैं, इसलिए अब अदालत चाहती है कि परिवार आपसी बातचीत और समझौते के जरिए इस विवाद को खत्म करने की कोशिश करे।सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को सख्त निर्देश भी दिए। अदालत ने कहा कि अब इस विवाद को लेकर कोई भी पक्ष मीडिया में बयान नहीं देगा और न ही सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़ी कोई बात पोस्ट करेगा। कोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त में करेगा। क्या है मामला? दरअसल, यह पूरा मामला संजय कपूर की मौत के बाद उनकी संपत्ति, फैमिली ट्रस्ट और विरासत को लेकर शुरू हुआ था। संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की। उनका आरोप है कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बनाया गया था। रानी कपूर का कहना है कि इस ट्रस्ट के जरिए परिवार की संपत्तियों और विरासत पर कब्जा करने की कोशिश की गई। उन्होंने अदालत से मांग की कि जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक संपत्तियों के ट्रांसफर और किसी भी तरह की बिक्री पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। यह भी पढ़ें- Congress: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कांग्रेस का सरकार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

Op Sindoor: 'हम आतंकवाद के पूरे तंत्र को खत्म करने के इरादे पर मजबूती से कायम', वर्षगांठ पर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीकता और दृढ़ संकल्प को सलाम किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एक साल पहले भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अद्वितीय बहादुरी का परिचय देते हुए पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया था। A year ago, our armed forces displayed unparalleled courage, precision and resolve during #OperationSindoor. They gave a fitting response to those who dared to attack innocent Indians at Pahalgam. The entire nation salutes our forces for their valour. Operation Sindoor reflected… — Narendra Modi (@narendramodi) May 7, 2026 भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा गृह मंत्री ने आतंकियों को दी चेतावनी #OperationSindoor stands as an epochal mission of India that will always remind our enemies of the infallible striking power of our armed forces. History will remember it as the day of the precise striking power of our armed forces, meticulous intelligence of our agencies, and… — Amit Shah (@AmitShah) May 7, 2026 ऑपरेशन सिंदूर के हुए आज एक साल प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने भारतीय सेनाओं की पेशेवर क्षमता, तैयारी और आपसी समन्वय को दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया। साथ ही यह भी दिखाया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों ने देश की सुरक्षा को और मजबूत किया है। मोदी ने कहा कि ए …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

कौन थे चंद्रनाथ रथ?: पूर्व वायुसेना कर्मी से शुभेंदु अधिकारी के भरोसेमंद सहयोगी बनने तक की पूरी कहानी

चंद्रनाथ रथ भारतीय वायुसेना में सेवा देने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में से एक बन गए थे। आइए जानते हैं कि कौन थे चंद्रनाथ रथ और कैसे उन्होंने वायुसेना के पूर्व कर्मी से शुभेंदु के करीबी बनने का सफर पूरा किया।41 वर्षीय रथ मूल रूप से पूर्वी मेदिनीपुर जिले के चांदपुर के रहने वाले थे। यह वह राजनीतिक क्षेत्र था, जिसने बंगाल की राजनीति में शुभेंदु अधिकारी के उदय को आकार दिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, शांत स्वभाव और चर्चाओं से दूर रहने वाले रथ, वर्षों से अधिकारी के करीबी समूह का हिस्सा होने के बावजूद बड़े पैमाने पर जमीन पर काम करते रहे।सक्रिय राजनीतिक संगठनात्मक ढांचे में आने से पहले रथ ने रहरा राम कृष्ण मिशन से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय वायुसेना में लगभग दो दशक बिताए थे। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्होंने एक बार आध्यात्मिक जीवन पर विचार किया था और छात्र जीवन के दौरान रामकृष्ण मिशन के सिद्धांतों से वे काफी प्रभावित थे।वायुसेना से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में थोड़े समय के लिए काम किया। इसके बाद वे धीरे-धीरे राजनीतिक समन्वय और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में आगे बढ़े। शुभेंदु अधिकारी के परिवार की तरह ही उनका परिवार भी पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा था। उनकी मां हसी रथ ने टीएमसी के कार्यकाल के दौरान पूर्वी मेदिनीपुर में एक स्थानीय पंचायत निकाय में पद संभाला था। बाद में वह 2020 में शुभेंदु अधिकारी के साथ भाजपा में शामिल हो गईं।पारिवारिक परिचितों का कहना है कि रथ परिवार और शुभेंदु के बीच संबंध दो दशक से अधिक पुराना था, जो पूर्वी मेदिनीपुर में टीएमसी के बढ़ने के शुरुआती वर्षों से …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk

West Bengal: कई दिनों से रची जा रही थी हत्या की साजिश, जानिए चंद्रनाथ मर्डर केस में अब तक क्या-क्या खुलासे हुए

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या को लेकर जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि हत्या की साजिश पिछले तीन-चार दिनों से रची जा रही थी और हमलावर लगातार रथ की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इस सनसनीखेज वारदात ने राज्य की राजनीति और कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कैसे हुआ हमला? पुलिस और भाजपा नेताओं के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ अपनी सफेद स्कॉर्पियो एसयूवी से कहीं जा रहे थे। तभी बाइक सवार बदमाशों ने उनकी गाड़ी का पीछा करना शुरू किया। मध्यमग्राम के दोहारिया इलाके में पहुंचते ही हमलावरों ने एसयूवी को घेर लिया और बेहद करीब से ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। पेशेवर शूटरों की तरह किया गया हमला हमले में रथ को सीने और पेट में कई गोलियां लगीं। गाड़ी चला रहा ड्राइवर भी घायल हो गया। दोनों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने चंद्रनाथ रथ को मृत घोषित कर दिया। बाद में डॉक्टरों ने पुलिस को बताया कि गोलियां उनके दिल को चीरते हुए निकल गई थीं, जिसके कारण उनकी मौत हुई। जांच से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमलावरों का निशाना सिर्फ चंद्रनाथ रथ थे। जिस सटीक तरीके से फायरिंग की गई, उससे साफ है कि हत्या को पेशेवर अपराधियों ने अंजाम दिया। प्रत्यक्षदर्शी ने क्या बताया? पुलिस अधिकारी के मुताबिक, रथ ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे थे और हमलावरों ने सीधे उन्हीं पर निशाना साधा। गोलियां इतनी सटीक थीं कि एसयूवी के फ्रंट ग्लास या बॉडी पर एक भी गोली नहीं लगी। ड्राइवर को सिर्फ इसलिए चोट लगी क्योंकि वह रथ के बेहद करीब था।पुलिस को शक है कि हमलावरों ने कई दिनों तक रथ की गतिविधियों की रेक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 7, 2026 · 2 min · National Desk