माकपा महासचिव एम ए बेबी ने गुरुवार को कहा कि जब किसी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तब संवैधानिक परंपरा यही कहती है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए राज्यपाल को विजय को शपथ लेने का मौका देना चाहिए। एम ए बेबी ने 1996 का उदाहरण भी दिया, जब अटल बिहारी वाजपेयी को सबसे बड़ी पार्टी का नेता होने के नाते सरकार बनाने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद किसी भी शक से ऊपर होना चाहिए और फैसले में देरी नहीं होनी चाहिए।एम ए बेबी ने यह भी माना कि डीएमके के साथ उनका गठबंधन चुनाव में हार गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण है। माकपा नेतृत्व जल्द चेन्नई में बैठक करेगा और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। तमिलनाडु की राजनीति में इस समय अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। सरकार गठन को लेकर जारी खींचतान आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने राज्यपाल से मुलाकात कर मांग की है कि तमिलगा वेत्री कड़गम के प्रमुख विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया जाए। थिरुमावलवन का तर्क है कि संविधान के अनुसार, त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी के नेता को मौका मिलना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अमित शाह और मोदी तमिलनाडु की राजनीति में हस्तक्षेप कर भ्रम पैदा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विजय को अपना बहुमत राजभवन में नहीं, बल्कि विधानसभा के फ्लोर पर साबित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।23 अप्रैल को हुए चुनावों में किसी को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला, लेकिन अभिने …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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