22 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति को अहमदाबाद से लौटते समय बस से पुलिस ने हिरासत में लिया। 22–25 नवंबर 2005 शेख और कौसर बी को अहमदाबाद के पास एक फार्महाउस में रखा गया, जबकि प्रजापति को उदयपुर जेल भेजा गया। 26 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। 29 नवंबर 2005 कौसर बी की हत्या और शव को जलाकर नष्ट करने का आरोप। 27 दिसंबर 2006 तुलसी प्रजापति की गुजरात-राजस्थान सीमा के पास कथित मुठभेड़ में मौत। 2005-2006 शेख का परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जांच की मांग की गई; गुजरात सीआईडी को जांच सौंपी गई। 30 अप्रैल 2007 गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट दी कि कौसर बी की भी मौत हो चुकी है और शव नष्ट किया गया। जनवरी 2010 सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी। 23 जुलाई 2010 सीबीआई ने आरोपपत्र दाखिल किया। 27 सितंबर 2012 सुप्रीम कोर्ट ने मामले का मुकदमा गुजरात से मुंबई स्थानांतरित किया। अक्तूबर 2017 मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने 22 आरोपियों पर आरोप तय किए। नवंबर 2017 मुकदमा शुरू हुआ, 210 गवाहों में से कई गवाह पलट गए। 21 दिसंबर 2018 सभी 22 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया। अप्रैल 2019 सोहराबुद्दीन के भाइयों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। 2025 सीबीआई ने कहा कि वह बरी करने के फैसले को स्वीकार करती है और अपील नहीं करेगी। 16 जनवरी 2026 बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Bombay HC: सोहराबुद्दीन के भाइयों को झटका, कथित फर्जी मुठभेड़ केस में 22 आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार
22 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और सहयोगी तुलसी प्रजापति को अहमदाबाद से लौटते समय बस से पुलिस ने हिरासत में लिया। 22–25 नवंबर 2005 शेख और कौसर बी को अहमदाबाद के पास एक फार्महाउस में रखा गया, जबकि प्रजापति को उदयपुर जेल भेजा गया। 26 नवंबर 2005 सोहराबुद्दीन शेख की कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या। 29 नवंबर 2005 कौसर बी की हत्या और शव को जलाकर नष्ट करने का आरोप। 27 दिसंबर 2006 तुलसी प्रजापति की गुजरात-राजस्थान सीमा के पास कथित मुठभेड़ में मौत। 2005-2006 शेख का परिवार सुप्रीम कोर्ट पह