Indra Nooyi: इंद्रा नूयी का विवादित बयान, भारत को बताया 'अव्यवस्थित देश'; कहा- वहां मैं सीईओ नहीं बन पाती

पेप्सिको की पूर्व चेयरमैन और सीईओ इंद्रा नूयी के हालिया बयान ने भारत को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने भारत को ‘अव्यवस्थित देश’ बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि ‘भारत की खूबसूरती इसी अव्यवस्था में है’। यह बातचीत उन्होंने अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस के साथ की, जहां उन्होंने भारत और चीन की तुलना करते हुए अपने विचार रखे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 3, 2026 · 1 min · National Desk

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: चंपत राय और अनिल को ट्रस्ट देगा कारण बताओ नोटिस, जवाब के बाद ही होगी कार्रवाई

राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की छह जुलाई को प्रस्तावित बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को बैठक में कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया जाएगा। दोनों से प्रकरण पर लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण मांगा जाएगा तथा उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। इसके बाद ट्रस्ट अपने बायलॉज और निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आगे का फैसला करेगा। ट्रस्ट के सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के बायलॉज के तहत किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ बिना स्पष्टीकरण लिए कार्रवाई नहीं की जा सकती। पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, फिर संबंधित पदाधिकारी का जवाब सुना और रिकॉर्ड पर लिया जाता है। जवाब पर विचार करने के बाद ही ट्रस्ट अंतिम निर्णय लेता है। यदि बैठक में किसी पदाधिकारी के इस्तीफे को स्वीकार करने अथवा पद से हटाने का प्रस्ताव आता है तो उस पर भी ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार आवश्यक बहुमत से ही फैसला होगा। यानी अंतिम निर्णय प्रक्रिया पूरी होने और ट्रस्टियों की सहमति के बाद ही लिया जाएगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच फरवरी 2020 को संसद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। ट्रस्ट को मंदिर निर्माण, प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े सभी निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई थी। केंद्र सरकार की ओर से तय नियमों और ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार ही इसकी कार्यप्रणाली संचालित होती है।- किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए ट्रस्ट की निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।- संबंधित पदाधिकारी को पहले नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाता है।- ट्रस्ट मंदिर निर्माण, प्रबंधन और …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

Explainer: व्हाट्सएप पर बिना नंबर चैटिंग का नया दांव, निजता की आड़ में क्या बढ़ जाएगा साइबर ठगी का नया खेल?

क्या प्राइवेसी की आड़ में सुरक्षा से वाकई खिलवाड़ की आशंका है? यह नया फीचर भारत के मौजूदा सख्त सुरक्षा नियमों को सीधे तौर पर चुनौती देता नजर आ रहा है। भारत के वर्तमान टेलीकॉम नियमों के अनुसार, हर मैसेजिंग अकाउंट का एक वेरिफाइड मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य है। इसके अलावा, ‘टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के तहत सरकार धोखाधड़ी रोकने के लिए सिम-बाइंडिंग जैसे बेहद कड़े चक्रों का उपयोग करती है, जो केवल यूजरनेम आधारित बातचीत से कमजोर हो सकते हैं। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि जब अपराधी केवल नाम बदलकर (जैसे बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर एजेंट बनकर) लोगों से संपर्क करेंगे, तो पुलिस के लिए यह पता लगाना बेहद जटिल हो जाएगा कि उस स्क्रीन नाम के पीछे असली अपराधी कौन है, जिससे जांच का एक अतिरिक्त सिरदर्द पैदा हो जाएगा। मेटा ने क्या दी सफाई? मेटा ने साफ तौर पर कहा है कि आगामी यूजरनेम फीचर पूरी तरह से ऑप्शनल होगा। इसका मतलब यह है कि किसी भी यूजर के लिए यूजरनेम बनाना अनिवार्य ही नहीं होगा, जो लोग अपने मोबाइल नंबर के जरिए ही चैट करना चाहते हैं, वे पहले की तरह ही एप का इस्तेमाल जारी रख सकेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने इंटरनेट पर फैल रही उन अफवाहों को भी पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि कोई भी रैंडम यूजर किसी मशहूर हस्ती या ब्रांड का यूजरनेम पहले से रिजर्व कर सकता है। फर्जी पहचान रोकने के लिए होंगे क्या होंगे सुरक्षा उपाय? मेटा ने साफ किया है कि यूजर नेम फीचर लॉन्च करने से पहले इसमें कई सुरक्षा परतें जोड़ी गई हैं, जिससे पहचान छिपाकर की जाने वाली धोखाधड़ी को रोका जा सके। कंपनी के अनुसार इंस्टाग्राम और फेसबुक के मौजूदा यूजरनेम रिजर्व रहेंगे। सेलिब्रिटी, सरकारी संस …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

किसकी होगी टीएमसी?: चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी गुट को भेजा नोटिस; छह जुलाई तक मांगा जवाब

हम ही असली टीएमसी, हमारे पास दो तिहाई बहुमत: ऋतब्रत बनर्जी इससे पहले, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रितब्रत बनर्जी ने बताया था कि टीएमसी के 10 विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की। इसके बाद बनर्जी ने मीडिया से कहा कि हम लोग ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और हमारे पास दो तिहाई बहुमत है। मीडिया से बातचीत के दौरान बनर्जी ने कहा कि 22 जून को कोलकाता में हमारा एक अधिवेशन आयोजित हुआ, जिसके आधार पर टीएमसी को चुना गया और अरूप राय को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (बागी गुट) का अध्यक्ष चुना गया। जैसे ही हमारी ये विशेष बैठक हुई, हमने निर्वाचन आयोग से 23 जून को मिलने के लिए समय मांगा। उन्होंने कहा, हमने निर्वाचन आयोग से निवेदन किया था कि वे जितने भी सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देंगे, हम यहां आकर पूर्ण पीठ से मुलाकात करेंगे। हम निर्वाचन आयोग को धन्यवाद देना चाहते हैं कि उसकी पूर्ण पीठ ने हमसे मुलाकात की। हम उम्मीद करते हैं कि आयोग जल्द ही हमसे संपर्क करेगा। उन्होंने कहा, हम ही अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस हैं। दो तिहाई से भी ज्यादा विधायक, जिला परिषद के सदस्य, पार्षद आदि सभी हमारे साथ हैं। ऐसे में (टीएमसी के चुनाव चिह्न को लेकर) मांग की कोई बात ही नहीं है। जब भी पार्टी में इस तरह का सत्र होता है, तो निर्वाचन आयोग को इसके बारे में तुरंत सूचित किया जाना चाहिए। हम शुक्रगुजार हैं कि पूर्ण पीठ ने हमसे मुलाकात की। ये भी पढ़ें: उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की एक पार्टी पर एक नौकरशाह ने कब्जा कर लिया। यह कभी जमीनी स्तर की पार्टी हुआ करती थी। लेकिन धीरे-धीरे यह एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द सिमट गई। अगर कोई सिंडिक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

Petrol Diesel Price: 'पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी अभी नहीं', तेल कंपनियों को नुकसान का हवाला देकर बोले पुरी

उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी के लिए अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि मौजूदा हालात में खुदरा ईंधन कीमतों को कम करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने बताया कि वैश्विक कच्चे तेल बाजारों में बड़े उतार-चढ़ाव के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें काफी हद तक स्थिर रही हैं। पिछले चार वर्षों में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58 फीसदी और डीजल की कीमतों में 6.23 फीसदी की वृद्धि हुई है। क्या तेल कंपनियों को नुकसान हुआ है? मंत्री ने कहा कि सरकारी तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) अब भी लगभग 2.18 लाख करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा वसूल कर रही हैं। इन कंपनियों के पास अब भी उच्च अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर खरीदा गया ईंधन भंडार मौजूद है। इससे खुदरा कीमतों में तत्काल कमी करना अव्यावहारिक हो जाता है।पुरी ने कहा, “इसलिए, इस समय ईंधन कीमतों को कम करने का सवाल उचित नहीं है। अगर दो-तीन महीनों तक कच्चे तेल की कीमतें नरम रहती हैं तो हम इस बारे में सोचेंगे।” उन्होंने सरकार की ओर से वैश्विक ऊर्जा बाजार में व्यवधानों के प्रबंधन के बारे में भी बताया। भारत ने उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों से उत्पन्न अधिकांश अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालिया तनाव के दौरान भी देश ने ईंधन की उपलब्धता में कोई व्यवधान नहीं आने दिया। मंत्री ने बताया कि भारत के लगभग 1.07 लाख ईंधन खुदरा बिक्री केंद्रों का नेटवर्क संकट के दौरान सामान्य रूप से संचालित होता रहा। हां, तेल विपणन कंपनियों को 30 जून तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी को लागत से कम बेचने के कारण 74,781 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

Explainer: भारत-जापान में रक्षा सह-उत्पादन समझौते पर मुहर, पहला प्रोजेक्ट क्या; आगे किन हथियारों तक जाएगा सफर?

Explainer: भारत-जापान में रक्षा सह-उत्पादन समझौते पर मुहर, पहला प्रोजेक्ट क्या; आगे किन हथियारों तक जाएगा सफर? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत-जापान के बीच जिस रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर की बात सामने आई है, वह क्या है? इसके तहत दोनों देश किस पहले प्रोजेक्ट पर काम करने जा रहे हैं? भारत को इससे क्या मिल सकता है? थलसेना से लेकर वायुसेना और नौसेना तक जापान भविष्य में भारत को किन हथियारों को बनाने में मदद कर सकता है? इसके अलावा भारत किस तरह जापान के लिए मददगार साबित हो सकता है? आइये जानते हैं… जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची भारत के दौरे पर हैं। गुरुवार को ताकाइची और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बैठक हुई। इसके बाद दोनों नेताओं ने साझा तौर पर मीडिया को संबोधित किया। इसमें दोनों ही नेताओं ने कई बड़े एलान किए। हालांकि, जो एक समझौता इस वक्त चर्चा में है, वह है दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में सह-उत्पादन से जुड़ा। दरअसल, पीएम मोदी ने खुद इस समझौते के तहत पहले प्रोजेक्ट की जानकरी दी। पीएम ने कहा कि हम क्षेत्र की शांति, नौपरिवहन की सुरक्षा और नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए साझा तौर पर रक्षा तकनीक विकसित करेंगे। क्या है रक्षा सह-उत्पादन समझौता, भारत-जापान के लिए क्यों जरूरी? रक्षा सह-उत्पादन समझौता एक ऐसी रणनीतिक साझेदारी है जिसके तहत दो या दो से ज्य …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

Unmute Bharat: जयराम रमेश बोले- चुनाव आयोग NDA का नया घटक, पूछा- राम मंदिर में चंदा चोरी पर पीएम खामोश क्यों?

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने अमर उजाला के विशेष पॉडकास्ट अनम्यूट भारत में केंद्र सरकार पर तीखे राजनीतिक हमले के साथ ही राहुल गांधी की सियासत के पन्ने भी खोले। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े विवाद पर जयराम रमेश ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए बना ट्रस्ट पूरी तरह सरकार की निगरानी में बना। आरएसएस को इसकी पूरी जानकारी थी। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की आंखों के सामने यह घोटाला हुआ। उन्होंने पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग की और सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री हर विषय पर मन की बात करते हैं, तो इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए जयराम ने कहा, भाजपा 400 पार तो दूर, अपने दम पर बहुमत भी हासिल नहीं कर सकी। उनके मुताबिक 2024 में भाजपा को सिर्फ 240 सीटें मिलीं और सरकार सहयोगी दलों के सहारे चल रही है। इसलिए मोदी आज माइनॉरिटी पीएम हैं। प्रधानमंत्री खुद की तुलना पंडित जवाहरलाल नेहरू से करते हैं, जबकि नेहरू हर बार स्पष्ट बहुमत से जीते थे। इसके विपरीत मोदी चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार के समर्थन पर निर्भर हैं। रमेश का आरोप है कि 17 अप्रैल को सरकार दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सकी। अब विपक्षी दलों को तोड़कर उस कमी को पूरा करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना में टूट का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से अभी भी दूर है।चुनावी प्रक्रिया पर कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा हमला करते हुए जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की पूरी रणनीति बदल ग …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

कब आएगा पीएम-सीएम को पद से हटाने वाला बिल?: संसदीय समिति की मुहर जल्द संभव, जानें क्या है मामला

इन विधेयकों में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अगर प्रधानमंत्री, कोई केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री गिरफ्तार होते हैं और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें अपना पद छोड़ना होगा। यह नियम उन अपराधों पर लागू होगा जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के 31वें दिन संबंधित व्यक्ति की कुर्सी अपने आप चली जाएगी।भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी इस संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रही हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों, रिटायर्ड जजों, वकीलों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं से लंबी चर्चा की है। अपराजिता सारंगी ने पहले कहा था कि राजनीति को अपराध मुक्त करने की जरूरत पर समिति में सभी की राय एक जैसी थी।विपक्ष के कई दलों ने इस समिति से दूरी बना ली है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये विधेयक कानून के उस बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक उसका दोष साबित न हो जाए। विपक्ष का आरोप है कि इन विधेयकों का मकसद उन राज्यों को अस्थिर करना है जहां एनडीए की सरकार नहीं है।एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संविधान में यह बदलाव सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इससे राजनीतिक दुरुपयोग के दरवाजे खुल जाएंगे और संवैधानिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी। वहीं, आरएसपी सांसद एन के प्रेमचंद्रन ने इन विधेयकों को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाए।सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक भी पेश किए हैं। मौजूदा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

इस महीने कब आएगा पीएम-सीएम को पद से हटाने वाला बिल?: संसदीय समिति की मुहर जल्द संभव, जानें क्या है मामला

इन विधेयकों में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अगर प्रधानमंत्री, कोई केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री गिरफ्तार होते हैं और लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें अपना पद छोड़ना होगा। यह नियम उन अपराधों पर लागू होगा जिनमें कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के 31वें दिन संबंधित व्यक्ति की कुर्सी अपने आप चली जाएगी।भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी इस संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रही हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों, रिटायर्ड जजों, वकीलों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं से लंबी चर्चा की है। अपराजिता सारंगी ने पहले कहा था कि राजनीति को अपराध मुक्त करने की जरूरत पर समिति में सभी की राय एक जैसी थी।विपक्ष के कई दलों ने इस समिति से दूरी बना ली है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ये विधेयक कानून के उस बुनियादी सिद्धांत के खिलाफ हैं, जिसमें किसी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक उसका दोष साबित न हो जाए। विपक्ष का आरोप है कि इन विधेयकों का मकसद उन राज्यों को अस्थिर करना है जहां एनडीए की सरकार नहीं है।एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि संविधान में यह बदलाव सरकारों को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी इसे आपराधिक न्याय प्रणाली के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि इससे राजनीतिक दुरुपयोग के दरवाजे खुल जाएंगे और संवैधानिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी। वहीं, आरएसपी सांसद एन के प्रेमचंद्रन ने इन विधेयकों को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाए।सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक भी पेश किए हैं। मौजूदा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk

व्हाट्सएप यूजरनेम: 'नए फीचर से नहीं हो सकेगी पहचान की चोरी', सरकार की रोक के बाद मेटा की सफाई; जानें सबकुछ

A WhatsApp spokesperson says, “We’ve announced the option for people to reserve their preferred username on WhatsApp. The ability to use a username is not yet live and will roll out slowly later this year. To protect against impersonation, we’ve held the highest-profile names —… pic.twitter.com/fG0xmtEthl — ANI (@ANI) July 1, 2026 आईटी मंत्रालय का मानना है कि यूजरनेम फीचर की मदद से जालसाज सरकारी एजेंसियों, बैंकों या मशहूर हस्तियों के नाम से मिलते-जुलते अकाउंट बना सकते हैं। इससे लोगों की पहचान चोरी करना और उन्हें ठगना आसान हो जाएगा। सरकार ने साफ किया है कि जब तक वह सुरक्षा उपायों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक भारत में यह फीचर रोलआउट नहीं होगा। सरकार ने मेटा से पूछा है कि उन पर आईटी अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।विवाद के बीच व्हाट्सएप के प्रवक्ता ने कहा कि यह फीचर प्राइवेसी को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने बताया कि धोखाधड़ी रोकने के लिए कई सुरक्षा चक्र तैयार किए गए हैं। व्हाट्सएप ने सरकारी संस्थाओं, मशहूर हस्तियों और बड़े ब्रांड्स के नाम पहले ही सुरक्षित (रिजर्व) कर लिए हैं, ताकि कोई उनका गलत इस्तेमाल न कर सके।सुरक्षा के लिए कंपनी ने नियम बनाया है कि किसी को मैसेज भेजने के लिए उसका सटीक यूजरनेम पता होना जरूरी होगा। साथ ही, अगर कोई अनजान व्यक्ति यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजता है, तो व्हाट्सएप यूजर को बताएगा कि वह अकाउंट नया है, किसी दूसरे देश का है या आपके बीच कोई कॉमन ग्रुप है।इस फीचर के आने के बाद लोगों को एक-दूसरे से जुड़ने के लिए मोबाइल नंबर देने की जरूरत नहीं होगी। यूजरनेम अधिकतम 35 अक्षरों का हो सकता है। यह पूरी तरह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

July 2, 2026 · 2 min · National Desk