ममता से मिले कासिम: बोले- पता चली ऋतब्रत की सच्चाई, लौटना चाहते हैं कई विधायक; क्या बागी गुट में भी बगावत?

पूर्व सीएम ममता बनर्जी से मुलाकात से पहले कासिम ने कहा कि हम दीदी के पास आए हैं। बातचीत करेंगे। मैं हमेशा दीदी के पास आता रहता हूं। आज भी आया हूं। उन्होंने इसके बाद बागी गुट पर निशाना साधा। कासिम ने कहा कि वहां मौजूद कई विधायक वापस आना चाहते हैं। धीरे-धीरे सभी को ऋतब्रत बनर्जी की सच्चाई पता चल रही है। कासिम ने यह भी दावा किया कि जो विधायक अभी ऋतब्रत के साथ हैं, वे वहां ज्यादा दिन नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे वहां सिर्फ कुछ दिनों के लिए हैं। वे वापस आएंगे।कासिम का यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि वह खुद बागी गुट का हिस्सा रह चुके हैं। ऐसे में उनके लौटने और दूसरे विधायकों की वापसी का दावा करने से तृणमूल कांग्रेस के भीतर नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, कासिम ने उन विधायकों के नाम नहीं बताए, जिनके लौटने का दावा किया है।तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद बढ़ने के बाद पार्टी के विधायकों का एक गुट ऋतब्रत बनर्जी के साथ अलग हो गया था। इसके बाद पार्टी के भीतर साफ तौर पर दो खेमे बन गए। एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला खेमा था। दूसरी तरफ ऋतब्रत बनर्जी के साथ गए विधायक थे। दोनों पक्षों के बीच विधायी नेतृत्व और पार्टी के प्रतिनिधित्व को लेकर टकराव बढ़ गया।बागी गुट ने खुद को असली तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधि बताया और विधानसभा में अलग नेतृत्व का दावा किया। इसके बाद मामला राजनीतिक विवाद से आगे बढ़कर कानूनी लड़ाई तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, इसके बाद टीएमसी के 20 सांसदों ने भी पार्टी से नाता तोड़ लिया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

राजस्थान: जेन जी के बाद अब जेन अल्फा के आंदोलन; नौ जिलों में बच्चों ने खोला स्कूलों की बदहाली के खिलाफ मोर्चा

राजस्थान में पिछले एक महीने में सरकारी स्कूलों स्कूली छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के मामले तेजी से सामने आए हैं। कहीं छात्रों ने स्कूल के मुख्य द्वार पर ताला लगाया तो कहीं धरना दिया। कई जगहों पर कई किलोमीटर पैदल चलकर छात्र कलेक्ट्रेट तक पहुंचे हैं। ये छात्र स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों को शिक्षा विशेषज्ञ ‘जेन अल्फा’ के उभरते छात्र आंदोलन के तौर पर देख रहे हैं। बीकानेर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, अजमेर, जालोर, बाड़मेर और बांसवाड़ा समेत कई जिलों में विद्यार्थियों के विरोध के बाद प्रशासन को उनकी मांगों पर कार्रवाई करनी पड़ी है। खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की है। बीकानेर में 69 छात्राओं ने किया प्रदर्शन सबसे हालिया मामला बीकानेर के आवासीय सैनिक स्कूल का है। यहां 69 छात्राओं ने रविवार को सामूहिक अवकाश लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया। छात्राओं का आरोप था कि स्कूल शुरू हुए चार महीने बीतने के बावजूद उन्हें वर्दी नहीं मिली। इसके अलावा शारीरिक और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ी सुविधाओं की भी कमी है।स्कूल के प्रधानाचार्य अनिल शर्मा ने बताया कि सुविधाओं के विकास के लिए छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और काम किया जा रहा है। यह भी पढें- गूगलकोटा सरकारी स्कूल में खाना बनाते समय लगी आग: स्टाफ और ग्रामीणों ने जलता सिलिंडर तालाब में फेंका, हादसा टला जयपुर के पोद्दार स्कूल में पांच अगस्त को श्रवण एवं वाक् बाधित विद्यार्थियों ने छात्रावास की खराब व्यवस्था, सुविधाओं की कमी और कथित दुर्व्यवहार के विरोध में प्रदर्शन किया था। सरकार ने उसी दिन प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया था।इस …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

दिल्ली में इन्फ्लूएंजा के 3000 से अधिक केस: सीएम ने बुलाई बैठक, मंत्री बोले- स्थिति कंट्रोल, दवाओं की कमी नहीं

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इन्फ्लूएंजा के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि के बीच, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है। मंगलवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए जनता को आश्वस्त किया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है और स्थिति पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में है। डॉक्टरों और दवाओं की कोई कमी नहीं स्वास्थ्य विभाग, एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि अस्पतालों में डॉक्टरों, मेडिकल स्टाफ या दवाओं की कोई कमी नहीं है। मुख्यमंत्री ने एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि कोई समस्या नहीं है, सब कुछ नियंत्रण में है। इस साल अब तक 2,308 स्वाइन फ्लू के मामले आंकड़े साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि दिल्ली में इस साल अब तक इन्फ्लूएंजा के लगभग 3,000 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से सबसे बड़ा हिस्सा एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण का है, जिसके 2,308 मामले सामने आए हैं। शेष मामले इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन के हैं। बिस्तर न मिलने पर अस्पताल पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बैठक दिल्ली में एच1एन1, मौसमी इन्फ्लूएंजा और वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने की तैयारियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए आयोजित की गई थी। उन्होंने जनता से पैनिक न करने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। मरीज अस्पताल आ रहे हैं, इलाज करवा रहे हैं और ठीक होकर वापस घर जा रहे हैं। हर अस्पताल में विशेष ‘आइसोलेशन वार्ड’ बनाए गए हैं। अगर किसी भी मरीज की तर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

एक्सप्लेनर: क्या इस्लामिक नाटो बनाएगा मक्का समझौता, बांग्लादेश इससे क्यों जुड़ना चाहता है, भारत पर कैसा असर?

एक्सप्लेनर: क्या इस्लामिक नाटो बनाएगा मक्का समझौता, बांग्लादेश इससे क्यों जुड़ना चाहता है, भारत पर कैसा असर? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह मक्का समझौता क्या है? बांग्लादेश ने इसमें शामिल होने को लेकर क्या कहा है? क्या मुस्लिम बहुल देशों के लगातार जुड़ने से मक्का समझौता इस्लामिक नाटो में बदल सकता है? क्यों अपने पूर्वी हिस्से में स्थित पड़ोसी देश के मक्का समझौते में दिलचस्पी दिखाने पर भारत की भी नजर है? आइये जानते हैं… सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए मक्का समझौते को लेकर पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति बरकरार है। दरअसल, तीनों ही देशों की तरफ से इसे एक समग्र रक्षा समझौते के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि तीनों देश कब इस समझौते के तहत एक-दूसरे की रक्षा करेंगे, उसकी शर्तें और नियम अब तक सामने नहीं आए हैं। इसके बावजूद इस त्रिपक्षीय समझौते में शामिल देश कुछ और मुस्लिम बहुल देशों को गठबंधन में लाने की कोशिश में जुटे हैं। इसमें सबसे ताजा नाम बांग्लादेश का है। भारत के इस पड़ोसी देश ने खुद ही मक्का समझौते में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इससे जुड़ेगा या नहीं। पहले जानें- क्या है मक्का समझौता, इसकी शर्तें क्या? मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के साथ तीन देशों पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की तरफ से इसे लेकर एक साझा बयान जारी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

संभल मंदिर- जामा मस्जिद विवाद: सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते सुनवाई टली, अब 29 सितंबर को अगली तारीख

सर्वे के बाद बिगड़े थे हालात अदालत के आदेश पर 19 नवंबर 2025 को मस्जिद परिसर का सर्वे किया गया था। इसके बाद 24 नवंबर को दोबारा सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी। इसमें चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा के मामले में पुलिस ने संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली के खिलाफ भी कार्रवाई की थी। इसके अलावा 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे पर अंतरिम रोक लगाते हुए स्थानीय ट्रायल कोर्ट में विवाद से जुड़ी कार्यवाही पर भी रोक लगा दी थी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 1 min · National Desk

अयोध्या: दो सितंबर को ट्रस्ट की बैठक पर टिकीं निगाहें, भरेंगे रिक्त पद; राम मंदिर को मिलेंगे नए CEO व प्रवक्ता

अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर दो सितंबर को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए सीईओ और प्रवक्ता की नियुक्ति पर फैसला होने की संभावना है। इसके अलावा लंबे समय से रिक्त चल रहे अन्य महत्वपूर्ण पदों को भरने पर भी मंथन होगा।राम मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और लगातार विस्तार पा रही व्यवस्थाओं के बीच ट्रस्ट प्रशासनिक ढांचे को अधिक व्यवस्थित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीईओ की नियुक्ति से मंदिर से जुड़े विभिन्न विभागों, व्यवस्थाओं और कार्यों के बीच बेहतर समन्वय की उम्मीद है। वहीं, प्रवक्ता की नियुक्ति से ट्रस्ट की ओर से मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों और गतिविधियों की आधिकारिक जानकारी सामने रखने की व्यवस्था मजबूत होगी।सीईओ की नियुक्ति के लिए तीन नामों का पैनल चयन समिति की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा जा चुका है। इन तीन नामों में सेवानिवृत्त आईपीएस राजेश पांडेय, सेवानिवृत्त आईएएस दिनेश चंद्र व योगेश्वर राम मिश्रा का नाम बताया जा रहा है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 1 min · National Desk

उत्तराखंड कैबिनेट बैठक: 17 प्रस्तावों पर मुहर, सहकारिता नीति-2026 मंजूर, CNG वाहनों को ग्रीन सेस में छूट जारी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी। बैठक में कुल 17 प्रस्ताव आए, जिनमें सहकारिता, परिवहन, स्वास्थ्य और कार्मिक विभाग से जुड़े फैसले शामिल हैं। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक की अपर सचिव मुख्यमंत्री बंशीधर तिवारी ने ब्रीफिंग की। कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य सहकारिता नीति-2026 को मंजूरी देते हुए इसके तहत सात मिशन निर्धारित किए हैं। परिवहन क्षेत्र में उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम को मंजूरी दी गई है। उत्तराखंड में सीएनजी वाहनों को ग्रीन सेस में मिलने वाली छूट जारी रहेगी, जबकि हाइब्रिड वाहनों को दी जा रही राहत वापस ले ली गई है। कैबिनेट ने अलग-अलग राज्यों की ईवी पॉलिसी का अध्ययन करने के बाद उत्तराखंड की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति तैयार करने के निर्देश मुख्यमंत्री की ओर से दिए हैं। उत्तराखंड चिकित्सा एवं परिवार कल्याण सांख्यिक संवर्ग को भी मंजूरी दी गई है। औषधि और सर्जिकल सामग्री की खरीद के लिए उत्तराखंड मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के गठन को मंजूरी मिली है। यह कॉरपोरेशन मुख्य सचिव की अगुवाई में काम करेगा और औषधि, सर्जिकल सामग्री व रसायनों की खरीद करेगा। इसके अलावा राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के लिए हरिद्वार में एक एकड़ भूमि देने और कारापाल सेवा नियमावली को मंजूरी देने का निर्णय भी लिया गया। ये अहम फैसले भी -उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम 2014 के तहत सदस्यों के चयन के लिए उत्तराखंड लोकायुक्त खोजबीन समिति 2026 को मंजूरी। -उत्तराखंड आबादी सर्वेक्षण अभिलेख नियमावली को मंजूरी -उत्तराखंड सीड्स एवं डेवलमेंट कार्पोरेशन के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अन्य विभागों में समाय …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk

रक्षाबंधन विवाद पर कृति सेनन ने तोड़ी चुप्पी, ट्रोलर्स को दिया तगड़ा जवाब; बोलीं- परंपरा नेकलाइन में नहीं होती

कृति ने इस मामले पर क्या कहा? अब कृति ने इन ट्रोल्स को करारा जवाब देते हुए कहा कि किसी महिला के कपड़ों से उसकी संस्कृति के प्रति सम्मान को नहीं मापा जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर स्टोरी शेयर कर लिखा, ‘त्योहारों की असली भावना आपके कपड़ों में नहीं, बल्कि उन भावनाओं और परंपराओं में होती है जिन्हें आप दिल से मानते हैं। रक्षाबंधन सुरक्षा और प्यार का रिश्ता है। मेरी बहन और मैं एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। हम एक-दूसरे की रक्षा करने का वादा करते हैं और एक-दूसरे की अच्छी सेहत, खुशी और लंबी उम्र की प्रार्थना करते हैं। हमारे लिए यह प्यार और प्रार्थना हमारे कुत्तों तक भी जाती है, क्योंकि वे भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं।’ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 1 min · National Desk

सीटेट 2026 परीक्षा स्थगित: दोबारा खोली गई आवेदन विंडो, क्या रही वजह, क्या दोबारा फॉर्म भरना होगा? यहां जानें

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी सीटीईटी के 22वें संस्करण को स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने उन पात्र अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन का एक और मौका दिया है, जो पहले आवेदन प्रक्रिया के दौरान अपना फॉर्म नहीं भर सके थे। सीबीएसई की ओर से जारी ताजा सार्वजनिक सूचना के अनुसार, सीटीईटी 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया 25 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक दोबारा खुली रहेगी। जिन अभ्यर्थियों ने पहले ही सफलतापूर्वक आवेदन जमा कर दिया है, उन्हें दोबारा पंजीकरण करने की जरूरत नहीं है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 1 min · National Desk

एनएसजी में नारी शक्ति की नई छलांग: पहली बार शुरू हुआ महिला कमांडो प्रशिक्षण, क्या है पूरी तैयारी?

पहली बार महिला कर्मियों के लिए शुरू हुआ यह विशेष पाठ्यक्रम। राज्य पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिलाएं होंगी शामिल। प्रशिक्षण की अवधि 12 हफ्ते रखी गई है। हथियार, निशानेबाजी और सामरिक कार्रवाई की ट्रेनिंग मिलेगी। बंधक बचाव जैसे विशेष अभियानों के लिए भी तैयार किया जाएगा। यह प्रशिक्षण 12 हफ्तों तक चलेगा। इसका मकसद महिला कर्मियों को कठिन अभियानों के लिए तैयार करना है। उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया जाएगा। साथ ही जरूरी तकनीकी और ऑपरेशनल कौशल भी सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान हथियार चलाना और निशानेबाजी सिखाई जाएगी। सामरिक कार्रवाई की भी ट्रेनिंग होगी। महिला कर्मी बंधकों को बचाने और आतंकवाद-रोधी अभियानों से जुड़ी दूसरी विशेष जिम्मेदारियों की तैयारी भी करेंगी।एनएसजी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल महिला कर्मियों की व्यक्तिगत क्षमता बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए अलग-अलग सुरक्षा बलों तक एनएसजी की विशेष आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञता भी पहुंचाई जाएगी। प्रशिक्षण से अलग-अलग बलों में काम करने वाली प्रशिक्षित महिला कर्मियों का दायरा बढ़ेगा। इससे पेशेवर कामकाज के समान मानकों को बढ़ावा मिलेगा। सुरक्षा बलों के बीच आपसी तालमेल भी मजबूत होगा।पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद महिला कर्मी अपने-अपने बलों में लौटेंगी। वहां वे प्रशिक्षण के दौरान सीखे कौशल और ऑपरेशनल जानकारी का इस्तेमाल कर सकेंगी। एनएसजी को उम्मीद है कि इससे अलग-अलग संस्थानों की तैयारी मजबूत होगी। आतंकवाद से निपटने की क्षमता भी व्यापक स्तर पर बढ़ेगी। देश के अलग-अलग सुरक्षा बलों में विशेष प्रशिक्षण का लाभ पहुंच सकेगा।एनएसजी ने कहा कि यह पहल केवल सुरक्षा जिम्मेदारियों में महिलाओं की संख्या बढ़ाने त …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

August 25, 2026 · 2 min · National Desk