एक्सप्लेनर: क्या इस्लामिक नाटो बनाएगा मक्का समझौता, बांग्लादेश इससे क्यों जुड़ना चाहता है, भारत पर कैसा असर? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह मक्का समझौता क्या है? बांग्लादेश ने इसमें शामिल होने को लेकर क्या कहा है? क्या मुस्लिम बहुल देशों के लगातार जुड़ने से मक्का समझौता इस्लामिक नाटो में बदल सकता है? क्यों अपने पूर्वी हिस्से में स्थित पड़ोसी देश के मक्का समझौते में दिलचस्पी दिखाने पर भारत की भी नजर है? आइये जानते हैं… सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए मक्का समझौते को लेकर पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति बरकरार है। दरअसल, तीनों ही देशों की तरफ से इसे एक समग्र रक्षा समझौते के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि तीनों देश कब इस समझौते के तहत एक-दूसरे की रक्षा करेंगे, उसकी शर्तें और नियम अब तक सामने नहीं आए हैं। इसके बावजूद इस त्रिपक्षीय समझौते में शामिल देश कुछ और मुस्लिम बहुल देशों को गठबंधन में लाने की कोशिश में जुटे हैं। इसमें सबसे ताजा नाम बांग्लादेश का है। भारत के इस पड़ोसी देश ने खुद ही मक्का समझौते में दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह इससे जुड़ेगा या नहीं। पहले जानें- क्या है मक्का समझौता, इसकी शर्तें क्या? मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के साथ तीन देशों पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की तरफ से इसे लेकर एक साझा बयान जारी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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