खरी बात: अमेठी की हार के बाद स्मृति ईरानी बोलीं- पैतृक सीट छोड़ भाजपा के गढ़ से लड़कर दिखाएं; किसे दी चुनौती?
पार्टी ने जब भी जो भी करने को कहा मैंने किया। कोई मूर्ख ही होगा जो कांग्रेस के गढ़ अमेठी में जाकर चुनाव लड़ने की सोचेगा, पार्टी ने मुझे वहां भेजा और मैंने चुनाव लड़ा। जहां तक टीवी पर लौटने की बात है तो मैंने करीब बीस साल टीवी का शिखर देखा, अपनी मेहनत से कमाने में कोई हर्ज नहीं है। यशवंत राव केलकर जी कहते थे कि सफलता के शिखर को छोड़कर राजनीति में आकर देश को कुछ देना चाहिए, मैंने उनके इस कथन को आत्मसात किया।पार्टी ने मुझे छोड़ा कहां था जो मेरी उम्मीद टूटती, मैं लगातार पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होती रही। क्योंकि आप जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को चुनाव में हरा देते हैं, तो आपको लेकर विश्लेषण और टीका-टिप्पणी बहुत होती है।आपको अपने आपको इतना सीरियसली नहीं लेना चाहिए। आप संगठन का हिस्सा कुछ योगदान देने के लिए बनते हो। आप जब संगठन को योगदान देने के लायक नहीं बचते तो संगठन पर बोझ बन जाते हो और मैं अपने संगठन पर कभी बोझ नहीं बनना चाहती।मेरी पार्टी शुरू से ही महिलाओं को प्रमुखता देती रही है। नरेंद्र मोदी ने 2014 की जीत के बाद सबसे पहले शौचालय बनाने को प्राथमिकता दी और 33 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुलवाए। चार करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनाए गए, जिसमें घर का स्वामित्व महिला के नाम या संयुक्त रूप से दिया गया। मुद्रा लोन में 60 प्रतिशत महिलाएं आगे आईं और मोदी जी ने 33 फीसदी महिला आरक्षण संसद से पारित कराया।जिस अमेठी में आपने 2019 में राहुल गांधी को हराकर इतिहास बनाया वहां से 2024 में चुनाव कैसे हार गईं ?दरअसल गांधी परिवार तो अमेठी में चुनाव लड़ने आया ही नहीं, अगर भरोसा होता तो वायनाड की बजाय अमेठी से लड़ते। हार-जीत दोनों राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा ह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...