श्रीनगर: ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने कहा- फिल्मों में हिंसा नहीं, कश्मीर की शांति का जश्न मनाएं

कश्मीर की वादियों में अब बंदूक और बारूद की कहानी नहीं, बल्कि सुर, सिनेमा और सुकून की नई तस्वीर उभरनी चाहिए। ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने शनिवार को कश्मीर को बेहद सुंदर, शांत और प्रेरणादायक जगह बताते हुए फिल्मकारों से घाटी को देखने का नजरिया बदलने की अपील की। रहमान ने कहा कि फिल्मों में कश्मीर के पुराने संघर्ष और हिंसा को दोहराने के बजाय अब यहां की प्राकृतिक सुंदरता, शांति और सद्भाव का जश्न मनाया जाना चाहिए। उनकी यह बात उस बदलते कश्मीर की तस्वीर से जुड़ती है, जिसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी फिल्म जगत के सामने रखने की पहल कर चुके हैं। की शूटिंग के सिलसिले में शनिवार को श्रीनगर पहुंचे रहमान ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सिनेमा केवल कहानी कहने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी जगह के प्रति लोगों की सोच बदलने की ताकत भी रखता है। कश्मीर की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराओं और खूबसूरत वादियों को दुनिया तक पहुंचाने में बॉलीवुड की बड़ी भूमिका हो सकती है।रहमान ने घाटी में आयोजित हो रहे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की भी सराहना की और इसे एक बेहतरीन शुरुआत बताया। उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह महोत्सव दुनिया के बड़े फिल्म फेस्टिवलों में अपनी पहचान बनाएगा और देश-दुनिया से लोग कश्मीर की मेहमाननवाजी, संस्कृति और सिनेमा का अनुभव लेने यहां आएंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोग एम्स्टर्डम, लंदन या सनडांस फिल्म फेस्टिवल के लिए जाते हैं, उसी तरह वे चाहते हैं कि कश्मीर भी देश के बेहतरीन फिल्म फेस्टिवलों में शामिल हो।कश्मीर को केवल संघर्ष की पुरानी छवियों के जरिए नहीं, बल्कि उसकी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और बदलती सामाजिक तस्वीर के साथ देखना होगा। इसका बेह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स बदलेगा दुनिया की आर्थिक व्यवस्था?: पेजेश्कियान बोले- अमेरिका का दबदबा खत्म करने के लिए बना ये संगठन

क्या ब्रिक्स अमेरिका के एकतरफा फैसलों को चुनौती देना चाहता है? पश्चिम एशिया के संघर्ष पर ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाया? नई दिल्ली में ब्रिक्स नेताओं की बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का मुद्दा भी सामने आया। शनिवार को अपनाए गए नई दिल्ली घोषणा पत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई गई और अधिकतम संयम बरतने तथा विवादों के समाधान के लिए बहुपक्षीय रास्ता अपनाने की बात कही गई। इसी बीच पेजेश्कियान ने ईरान पर युद्ध शुरू करने के आरोप को खारिज किया। उन्होंने कहा कि युद्ध ईरान ने शुरू नहीं किया, बल्कि अमेरिका ने हमला शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेताओं, वैज्ञानिकों, छात्रों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। पेजेश्कियान ने ईरान की बाद की सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया। भारत और ईरान के बीच चाबहार को लेकर क्या बातचीत हुई? क्या चाबहार के जरिए भारत और ईरान का आर्थिक सहयोग बढ़ेगा? पेजेश्कियान ने कहा कि ब्रिक्स देशों को एक-दूसरे की मदद और समर्थन करना चाहिए, ताकि एकतरफावाद का मुकाबला किया जा सके। उनका कहना है कि सदस्य देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को इस तरह बढ़ाया जाना चाहिए कि किसी एक देश के प्रतिबंधों से पूरी व्यवस्था प्रभावित न हो। उन्होंने अमेरिका के एकतरफा रवैये को रोकने की जरूरत बताई और कहा कि ब्रिक्स का मकसद ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें देशों को व्यापार और आर्थिक सहयोग के लिए ज्यादा स्वतंत्रता मिले।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेजेश्कियान की ब्रिक्स सम्मेलन से इतर मुलाकात में पश्चिम एशिया की स्थिति के साथ व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि पश्च …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी-जिनपिंग की मुलाकात से नई दिल्ली घोषणा तक, पहले दिन क्या-क्या हुआ?

ब्रिक्स सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। सात साल बाद भारत आए जिनपिंग के साथ मोदी की इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी। दोनों नेताओं ने भारत-चीन रिश्तों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें विवाद में नहीं बदलना चाहिए। सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया गया। दोनों पक्षों के बीच व्यापार, व्यापार असंतुलन, आपूर्ति शृंखला, लोगों के बीच संपर्क और सीमा विवाद के समाधान जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकत से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स के भीतर दोनों देशों के सहयोग को भी मजबूत करने की बात कही। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन पिछले कुछ समय से सीमा पर तनाव कम करने और रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया के संकट और समुद्री मार्गों पर पड़ रहे असर को लेकर बातचीत हुई। भारत ने संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को रास्ता बताया। भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी बातचीत में अहम रहा। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच काला सागर क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को और आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 13, 2026 · 2 min · National Desk

खबरों के खिलाड़ी: आकाश के कभी बसपा में कभी बाहर होने से किसे फायदा? विश्लेषकों ने बताया 2027 में क्या होगा असर

रामकृपाल सिंह: मैंने उत्तर प्रदेश में जो जमीनी स्तर पर देखा है। वहां बसपा का मतलब मायावती है। जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं वो नेताओं और पत्रकारों में चर्चा के विषय जरूर हैं, लेकिन उनके वोटर के लिए मायावती ही बसपा हैं। पूरी राष्ट्रीय राजनीति में मतदाता नेपोटिजम की राजनीति के खिलाफ है। मायावती ये संदेश देना चाहती हैं कि परिवार बाद में है, पार्टी ऊपर है। इस वजह से हो सकता है मायावती को इसका फायदा हो जाए। मायावती को इस कदम से फायदा हो न हो नुकसान नहीं हो सकता है। पूर्णिमा त्रिपाठी: मुझे लगता है कि मायावती इस वक्त एक बहुत की अनिश्चित दौर से गुजर रही हैं। वो खुद तय नहीं कर पा रही हैं कि आखिर करना क्या है? आकाश आनंद को वो बार-बार लेकर आ रही हैं और निकाल रही हैं। आकाश आनंद को अगर आप देखेंगे तो युवा दलित वोटर उनकी ओर आकार्षित हो रहा है। युवा आज हर पार्टी के लिए जरूरी बना हुआ है। अगर मायावती उन्हें बाहर करके किसी फायदे की उम्मीद कर रही हैं तो मुझे नहीं लगता इससे फायदा होगा। मुझे लगता है कि ये परिवार की खींचतान ज्यादा है। राकेश शुक्ल: आखिर ये घटनाक्रम क्यों हुआ, मेरी समझ में ये नहीं आ रहा है। अगर अशोक सिद्धार्थ इतने ईमानदार थे तो उन्हें सफाई क्यों देनी पड़ी कि मैंने पार्टी तोड़ने की कोशिश नहीं की। क्या इससे ये नहीं लगता कि चोर की दाढ़ी में तिनका। यानी मायावती को जो आशंका है वो सही है। ये सभी सवाल अशोक सिद्धार्थ के पोस्ट बाद खड़े हो गए हैं। ये भी सच्चाई है कि जब-जब बसपा कमजोर हुई है इसका फायदा भाजपा को मिला है। मायावती खुद को ममता बनर्जी नहीं बनने देना चाहती हैं। विनोद अग्निहोत्री: मायावती जिस पार्टी को लीड कर रही हैं वो एक मिशन से बनी है। कांशीराम ने अप …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

खबरों के खिलाड़ी: 2029 में चुनाव, तमिलनाडु में अभी से पीएम चेहरे पर घमासान, विश्लेषकों ने समझाया असली गणित

पूर्णिमा त्रिपाठी: ये अभी से सोचना थोड़ा ज्यादा महत्वाकांक्षी है। फैन फॉलोविंग की वजह से राष्ट्रीय राजनीति में किसी नेता को स्थापित होते हमने नहीं देखा। चाहे एमजीआर हों, जयललिता हों या एनटीआर हों। विजय उस परंपरा को कैसे तोड़ देंगे ये मुझे नहीं पता। कहने को उनके विधायक कुछ भी कह दें। चर्चा करने के लिए भले ये विषय बढ़िया हैं, लेकिन ऐसा होने जा रहा है इसकी मुझे उम्मीद नहीं दिखती है। रामकृपाल सिंह: बंगाल का चुनाव होने से पहले राहुल की सबसे बड़ी विरोधी ममता बनर्जी थीं। हर आदमी पहली बार ही बनता है। नरसिम्हा राव दक्षिण से होकर भी प्रधानमंत्री बन जाएंगे ये किसी को नहीं पता था। तो फिर विजय नहीं बन पाएंगे ये कौन कह सकता है। मूल बात ये है कि राहुल गांधी की विपक्षी गठबंधन में कितनी स्वीकार्यता है ये भी देखना होगा। राकेश शुक्ल: सबसे पहले हमें यह समझना चाहिए कि ये मांग कहां से उठी। जब कांग्रेस डीएमके का गठबंधन छोड़कर टीवीके के साथ जाती है तो बहुत तीखी प्रतिक्रिया होती है। विपक्षी गठबंधन में स्थिति एक अनार, सौ बीमार वाली है। आज की तारीख में मैं ये मानकर चलता हूं कि अगर गैर भाजपा सरकार बनेगी तो बिना कांग्रेस के गठबंधन के नहीं बनेगी। दूसरा इस स्थिति में कांग्रेस को कम से कम 150 सीटें जीतनी पड़ेगी। और अगर कांग्रेस 150 सीटें जीतेगी तो वो विजय थलपति को क्यों प्रधानमंत्री बनने देगी। विनोद अग्निहोत्री: चुनौती नेता की नहीं होती है, चुनौती परिस्थितियां होती हैं। 2029 के लोकसभा चुनाव में क्या परिस्थिति बनेगी ये हम अभी से नहीं बता सकते हैं। अभी की परिस्थिति की बात करें तो आज की तारीख में मौजूदा केंद्र सरकार कहीं नहीं जा रही है। मुझे लगता है कि डीएमके को जिस तरह से छोड़ा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

बिहार एमएलसी चुनाव: राजद उम्मीदवारों की घोषणा पर भड़कीं रोहिणी, तेजस्वी यादव पर आरोप लगाकर क्या मैसेज दिया?

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की अपने भाई तेजस्वी यादव से नाराजगी दूर नहीं हुई है। वह एक फिर से अपने भाई तेजस्वी यादव पर भड़क गईं हैं। शिक्षक-स्नातक विधान परिषद् चुनाव में राजद की ओर से उम्मीदवारों की घोषणा के बाद रोहिणी का गुस्सा सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर बता दिया कि उम्मीदवारों के चयन से वह खुश नहीं हैं। शनिवार को रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर ऐन चुनाव (विधान परिषद चुनाव ) से पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं-कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का घोर अनादर है। दशकों तक लाठियां खाकर पार्टी और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार करना राजद के आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह निर्णय न केवल निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है, बल्कि लालू जी की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती पर भी गहरा आघात है।राजद ने कुल छह उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं। इनमें चार स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी हैं। प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने बताया कि पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉ. संजीव कुमार सिंह को टिकट दिया है। वहीं सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रो. जयराम यादव को उम्मीदवार बनाया गया है। पटना स्नातक से दिलीप कुमार, कोशी स्नातक से नितेश कुमार, दरभंगा स्नातक से अनिल कुमार झा और तिरहुत स्नातक से डॉ. रश्मि विनायक गौतम को प्रत्याशी घोषित किया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने बताया कि दो अन्य सीटों पर अभी विचार किया जा रहा है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

केंद्र-लद्दाख वार्ता: बेनतीजा रहा संवाद, 19 से 24 सितंबर तक कारगिल से लेह पदयात्रा; आंदोलन की चेतावनी

केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ वार्ता में प्रमुख मांगों पर ठोस पहल नहीं होने के बाद लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस ने 19 से 24 सितंबर तक कारगिल से लेह तक पदयात्रा निकालने की घोषणा करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।दोनों संगठनों ने कहा कि सरकार की ओर से लद्दाख की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप शासन व्यवस्था और अधिक अधिकारों वाली निर्वाचित विधानसभा की स्थापना की मांग पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं मिली। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने, प्रभावित लोगों को मुआवजा देने और 24 सितंबर की हिंसा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई। लेकिन किसी में भी उचित जवाब नहीं मिला। लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के बीच समन्वय की कमी दिख रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत जारी रहने के बावजूद कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे हैं।कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के नेताओं ने परिसीमन, वित्तीय अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। सरकार की ओर से संकेत दिया गया है कि उसके प्रस्तावित मसौदे पर अक्तूबर के पहले सप्ताह में चर्चा की जा सकती है। लेह एपेक्स बॉडी के सदस्य सोनम वांगचुक ने कहा कि 19 से 24 सितंबर तक प्रस्तावित पदयात्रा पिछले वर्ष 24 सितंबर की हिंसा में मारे गए लोगों की स्मृति में आयोजित की जाएगी। उन्होंने लद्दाख की मांगों के समर्थन में आम जनता से पदयात्रा में सहयोग और भागीदारी की अपील की। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स समिट LIVE: आज दोपहर दिल्ली आएंगे जिनपिंग; इंडोनेशिया, फिलीपींस और अफ्रीका से भारत पहुंचे कई और मेहमान

01:11 AM, 12-Sep-2026 ब्रिक्स समिट LIVE: आज दोपहर दिल्ली आएंगे जिनपिंग; इंडोनेशिया, फिलीपींस और अफ्रीका से भारत पहुंचे कई और मेहमान ब्रिक्स शिखर बैठक 2026 के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज भारत पहुंचेंगे। ब्रिक्स से इतर चीन के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। पीएम मोदी के साथ मुलाकात के संबंध में चीनी राजदूत जू फेइहोंग ने कहा, चीन और भारत राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय बैठक का आयोजन कर रहे हैं। कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातों के बाद, यह लगातार तीसरा वर्ष होगा जब दोनों नेता एक-दूसरे से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि चीन, भारत के साथ मिलकर दोनों नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन के मुताबिक काम करेगा। जिनपिंग के भारत आगमन से पहले चीन का रुख सकारात्मक पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात से पहले राजदूत फेइहोंग ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक स्तर पर और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से संभालने, संचार को बढ़ावा देने, सहयोग मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई। उन्होंने कहा कि चीन मतभेदों को उचित ढंग से सुलझाएगा। अच्छे पड़ोसी की तरह संबंधों का आनंद लेने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक-दूसरे की सफलता में सहयोग करने वाले साझेदार बने रहेंगे। भारत मंडपम में ब्रिक्स सम्मेलन 2026 से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे। कुछ देशों को मेहमान की तरह भी आमंत्रित किया …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 12, 2026 · 2 min · National Desk

स्थानीय मुद्राएं, वैश्विक व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंध: पीएम मोदी, पुतिन और पेजेश्कियान का ट्रंप को क्या संदेश?

क्या है स्थानीय मुद्राओं और वैश्विक व्यापार पर बना नया मोर्चा? सुरक्षित समुद्री मार्गों और नाविकों की हिफाजत पर पीएम मोदी ने क्या कहा? क्या वैश्विक अर्थव्यवस्था में पुराने नेताओं की जगह नए इंजन ले रहे हैं? पुतिन ने पुराने आर्थिक नेताओं की ताकत और बदलते दौर पर क्या दलील दी? ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान ने डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए क्या रास्ता सुझाया? क्या न्यू डेवलपमेंट बैंक को स्थानीय मुद्रा फंडिंग का मुख्य इंजन बनना होगा? क्या ट्रंप की 10% टैरिफ की धमकी के सामने झुकने को तैयार है ब्रिक्स? ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच पर तीनों नेताओं का संबोधन वैश्विक व्यापार और वित्तीय ढांचे को नई दिशा देने वाला साबित हुआ है। फोरम में साफ किया गया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक व्यवस्था अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकती। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और उनकी ओर से डॉलर की बादशाहत को बचाने के लिए दी जा रही चेतावनियों के बीच ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे आपसी कारोबार में अपनी स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्राओं को प्राथमिकता देने के लिए तैयार हैं। यह मंच केवल व्यापारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दुनिया को यह दिखा दिया कि आर्थिक प्रतिबंधों और मुद्रा दबावों के खिलाफ उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब एक साथ खड़ी हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार को निर्बाध बनाए रखने के लिए सुरक्षित समुद्री लेन और खुली आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत जहाजरानी की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का कट्टर समर्थक है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा, “वैश्विक व्यापार की प्रगति तभी संभव है जब समुद्री ल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 11, 2026 · 2 min · National Desk

ब्रिक्स: पीएम मोदी ने थामा ईरानी राष्ट्रपति का हाथ, पुतिन-रामाफोसा दिखे साथ; तस्वीर में नजर आई गर्मजोशी

Delhi | PM Narendra Modi with Iran’s President Masoud Pezeshkian and Russia’s President Vladimir Putin, among other BRICS leaders, at the BRICS Business Forum in Delhi pic.twitter.com/CcCPVgdNGl — ANI (@ANI) September 11, 2026 यह तस्वीर ऐसे समय सामने आई है, जब दुनिया बड़े भू-राजनीतिक उलटफेरों के दौर से गुजर रही है। ईरान उस संघर्ष के केंद्र में है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है। वहीं, यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर पश्चिमी देशों ने व्यापक प्रतिबंध लगाए हैं।भारत ने दोनों देशों के साथ अपने संपर्क बनाए रखे हैं। साथ ही अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी भी जारी रखी है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय बैठक में भी भारत का यही रुख दिखाई दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत और कूटनीति के जरिए संघर्ष खत्म करने की अपील की।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता बाधित नहीं होनी चाहिए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग बैठक में भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसी तरह का रुख अपनाया। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की भारत की अपील दोहराई।नई दिल्ली लगातार यह रुख रखता रहा है कि वह निष्क्रिय रूप से तटस्थ नहीं है, बल्कि शांति के पक्ष में है। साथ ही भारत ने खुद को प्रतिद्वंद्वी भू-राजनीतिक खेमों में शामिल होने से बचाया है और अलग-अलग पक्षों वाले देशों के साथ संवाद जारी रखा है।ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की भूमिका प …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 11, 2026 · 2 min · National Desk