अमेरिका में चुनावी कानून को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद फैसला सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को लुइसियाना बनाम कैलाइस मामले में 6-3 के बहुमत से ऐसा निर्णय दिया, जिसने वोटिंग राइट्स एक्ट (VRA) की धारा 2 के प्रभाव को काफी हद तक सीमित कर दिया है। इस फैसले के बाद अब किसी भी चुनावी नक्शे को नस्लीय आधार पर चुनौती देना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो जाएगा। कोर्ट के इस निर्णय ने अमेरिका की राजनीति और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।इस फैसले को जस्टिस सैमुअल अलिटो ने लिखा। उन्होंने कहा कि अदालत को यह मानकर चलना चाहिए कि राज्य सरकारें सद्भावना में काम कर रही हैं। कोर्ट ने नस्लीय गेरिमैंडरिंग और राजनीतिक गेरिमैंडरिंग के बीच फर्क को और स्पष्ट किया। 2019 के एक फैसले के अनुसार, राजनीतिक आधार पर बनाए गए नक्शों को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। अब नए फैसले के बाद, अगर कोई यह साबित करना चाहता है कि नक्शा नस्लीय भेदभाव के लिए बनाया गया है, तो उसे और अधिक ठोस सबूत पेश करने होंगे।पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले की कड़ी आलोचना की है, जो मतदान अधिकारों से जुड़ा है। ओबामा ने कहा कि यह फैसला वोटिंग राइट्स एक्ट के एक अहम हिस्से को कमजोर करता है। उनके अनुसार इससे राज्यों को यह मौका मिल सकता है कि वे चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं ऐसे तरीके से बदलें, जिससे काले और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों का वोटिंग असर कम हो जाए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य इसे राजनीतिक वजह बताकर करें, तो इसे रोकना मुश्किल होगा। ओबामा ने इसे लोकतंत्र के लिए एक झटका बताया, लेकिन लोगों से अपील की कि वे हर चुनाव में ज्यादा से ज् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
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