पंजाब कांग्रेस: दो चरणों की कवायद भी खत्म नहीं कर सकी गुटबाजी, खुलकर सामने आई थी खेमेबाजी

पंजाब कांग्रेस: दो चरणों की कवायद भी खत्म नहीं कर सकी गुटबाजी, खुलकर सामने आई थी खेमेबाजी दूसरे चरण में उन्होंने ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ अभियान के तहत जिलों का दौरा कर कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में जुटाने की कोशिश की। बघेल की दोनों चरणों की कवायद पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं कर पाई हालांकि, इस पूरी कवायद के दौरान जिस तरह गुटबाजी बघेल की जनसभा में मंचों तक पहुंची, उससे साफ हो गया कि कांग्रेस के भीतर की खाई आसानी से भरने वाली नहीं है। पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म कराने के लिए हाईकमान ने भूपेश बघेल को प्रभारी बनाकर भेजा था। बघेल ने भी संगठन को साधने के लिए दो चरणों में कवायद की। पहले चरण में करीब एक सप्ताह पंजाब में रहकर उन्होंने अलग-अलग खेमों के नेताओं से मुलाकात कर उनके बीच की नाराजगी समझने और संवाद का रास्ता निकालने का प्रयास किया। करीब एक महीने से ज्यादा समय तक पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के बीच अंदरूनी कलह व मतभेद को दूर करने के लिए बघेल ने नेताओं से वन-टू-वन संवाद किया। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रताप सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, गुरप्रीत सिंह कंगर समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। चन्नी खेमे के नेताओं के साथ हुई बैठकों में प्रद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

'लोकप्रियता नहीं, जनस्वास्थ्य जरूरी': FDA की ताबड़तोड़ कार्रवाई पर तुकाराम मुंढे का दो टूक जवाब; क्या बोले?

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे इन दिनों राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर की जा रही सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में हैं। हालांकि, उनका कहना है कि लोकप्रियता कभी उनका लक्ष्य नहीं रही। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा जनस्वास्थ्य है। क्या तुकाराम मुंढे के लिए लोकप्रियता मायने नहीं रखती? बातचीत में मुंढे ने कहा कि उनकी बढ़ती लोकप्रियता उनके काम में बाधा नहीं है। उन्होंने कहा, “लोकप्रियता कभी मेरा लक्ष्य नहीं रही। मेरे लिए जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दे मायने रखते हैं। यह तुकाराम मुंढे के बारे में नहीं है, यह भारत और जनस्वास्थ्य सुधारने के लक्ष्य के बारे में है।” मुंढे ने कहा कि खाद्य और औषधि क्षेत्र सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। अगर उनके काम और भूमिका के कारण यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता है तो उन्हें खुशी होगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों को जनस्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल करना चाहिए। उनके मुताबिक, स्वस्थ मानव संसाधन के बिना भारत सुपरपावर नहीं बन सकता। एफडीए ने अब तक कितने प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की? मुंढे के मुताबिक, मई 2026 में एफडीए आयुक्त का पद संभालने के बाद अब तक 12,083 संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इनमें प्रतिष्ठान बंद करना, लाइसेंस निलंबित या रद्द करना और आपराधिक मामले दर्ज करना शामिल है। उन्होंने बताया कि 5,269 संस्थाओं को सुधार नोटिस दिए गए हैं, जबकि 603 संस्थाओं के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किए गए हैं। मुंढे ने बताया कि होटल, रेस्तरां और खाने-पीने के प्रतिष्ठानों के मामले में 1,803 निरीक्षण किए गए। इनमें 948 मामलों में सुधार नोटिस जारी हुए, जबकि 199 लाइसेंस निलंबित किए गए। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

निजी कंपनियां बनाएंगी रॉकेट?: बढ़ते निजीकरण से हजारों कर्मचारी परेशान, इसरो प्रमुख को लिखी चिट्ठी; मांगा जवाब

निजी कंपनियों को लेकर कर्मचारियों की चिंता क्यों बढ़ी? इसरो के किन कामों को निजी क्षेत्र में देने की बात उठी? कर्मचारियों ने प्रक्षेपण यानों के उत्पादन को निजी क्षेत्र को सौंपने से जुड़ी खबरों पर भी चिंता जताई है। इसके अलावा नियमित उपग्रह निर्माण का काम इसरो से बाहर ले जाने और कुलसेकरपट्टिनम में प्रस्तावित स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स जैसी नई प्रक्षेपण सुविधाओं को निजी संस्थाओं के लिए खोलने का मुद्दा उठाया गया है। पत्र में यह भी कहा गया कि इसरो की करीब 120 तकनीकों को पहले ही निजी क्षेत्र को हस्तांतरित किया जा चुका है। कर्मचारियों का कहना है कि इन बदलावों को लेकर विभाग की ओर से अब तक स्पष्ट आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। कर्मचारियों को किस तरह के नुकसान का डर है? कर्मचारी संगठनों ने कहा कि अगर इसरो प्रक्षेपण यान और उपग्रह बनाने से पीछे हटता है तो संस्थान में अंदरूनी काम कम हो सकता है। इससे स्वीकृत पदों में कमी या भर्ती पर रोक लग सकती है और तकनीकी, वैज्ञानिक, प्रशासनिक, खरीद, गुणवत्ता, सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में पदोन्नति और कौशल विकास के अवसर घट सकते हैं। संगठनों ने चेताया कि मौजूदा कर्मचारी अतिरिक्त माने जा सकते हैं, उनका दूसरी जगह तबादला हो सकता है या उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल सकता है। साथ ही ग्रुप ए, बी और सी की भर्तियां घटने से युवाओं के लिए इसरो में करियर के मौके भी कम हो सकते हैं। कर्मचारी निजी कंपनियों की भागीदारी के खिलाफ हैं क्या? इसरो से अब कर्मचारी क्या स्पष्ट जवाब चाहते हैं? क्या इसरो की भूमिका पर बड़ा बदलाव होने जा रहा है? कर्मचारी संगठनों ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

लखनऊ: यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा अंडमान निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल नियुक्त, पदभार जल्द

उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सदस्य डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से कल देर रात मिली सूचना के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उप-राज्यपाल नियुक्त किया है। यह नियुक्ति उनके पदभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहले कार्यकाल के दौरान वर्ष 2017 में डॉ. शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। शर्मा यूपी की राजनीति का परिचित चेहरा रहे हैं। 62 वर्षीय शर्मा का कार्यकाल नवंबर माह के अंत में खत्म होने वाला था और उससे पहले ही उन्हे नई जिम्मेदारी सौंप दी गई।वर्ष 2017 से 2022 तक उपमुख्यमंत्री के तौर पर माध्यमिक और उच्च शिक्षा के अलावा विज्ञान और प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी भी देख चुके हैं। दिनेश शर्मा 2022 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़े थे। इसके बाद राज्यसभा से सांसद बनाया गया।दिनेश शर्मा लगातार दो बार लखनऊ के मेयर रहे हैं। साल 2006 और 2018 तक लगातार दो बार लखनऊ के रहे। वे लखनऊ यूनिवर्सिटी के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर का दायित्व भी निभा चुके हैं। इसके अलावा वे यूपी मेयर काउंसिल के 2007 से मार्च 2018 तक अध्यक्ष भी रहे हैं।डॉ. शर्मा भाजपा संगठन में पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई पदों पर काम कर चुके हैं। गुजरात के प्रभारी के अलावा हरियाणा में मुख्यमंत्री और राजस्थान में प्रदेश अध्यक्ष के चयन के लिए पर्यवेक्षक भी रहे हैं। वे भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व भी संभाल चुके हैं।बेदाग छवि वाले डॉ. शर्मा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

खबरों के खिलाड़ी: कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह?

खबरों के खिलाड़ी: कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह? अनुराग वर्मा: राहुल गांधी के साथ परेशानी ये है कि वो क्षेत्रीय सहयोगी भी चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। पिछले चुनाव में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं कैंपेन पर चुनाव लड़ीं थीं, लेकिन उनका पूरा कैंपेन विफल रहा था। वहीं, अखिलेश यादव की परेशानी ये है कि उन्हें नए वोट अपने साथ जोड़ने हैं। अखिलेश यादव के पास खोने के लिए बहुत कुछ है। बातें बहुत सी होती हैं, लेकिन आखिरी तक चीजें साफ नहीं होती हैं। हर चुनाव से पहले गठबंधन की बात होती है, लेकिन अंत तक तस्वीर साफ नहीं होती है। जैसे पिछले कुछ वक्त से महिला एक अलग वोटर वर्ग बना है वैसे ही अब जेन-जी के रूप में एक नया वोटर वर्ग तैयार होता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हैं। सपा और कांग्रेस के गठबंधन से पहले दोनों ओर से अपने-अपने दावे शुरू हो गए हैं। दोनों दलों की ओर से अपने साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश भी हो रही है। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चुनाव से पहले बन रहे इन्हीं समीकरणों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। पूर्णिमा त्रिपाठी: हर दल पब्लिक पोश्चरिंग करता है। वही कांग्रेस अभी कर रही है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

तमिलनाडु: डीवीएसी ने पूर्व डीएमके मंत्री केएन नेहरू के ठिकानों पर मारे छापे, स्टालिन ने किस पर साधा निशाना?

डीवीएसी की ओर से जारी बयान में कहा गया, “तलाशी के दौरान निविदाओं में की गई अनियमितताओं से संबंधित 241 आपत्तिजनक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। मामले की जांच जारी है।” बयान के अनुसार, नगर प्रशासन और जल आपूर्ति विभाग में विभिन्न निविदाओं में कथित अनियमितताओं के संबंध में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।शाम को पत्रकारों से बातचीत में नेहरू ने कहा कि डीवीएसी अधिकारियों को कोई महत्वपूर्ण साक्ष्य नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके भाई के कार्यालय से एक सामान्य फाइल और व्यक्तिगत हिसाब-किताब से जुड़े एक कागज की प्रतियां ली गईं। पूर्व मंत्री ने कहा, “मैं और मेरी टीम ने सुबह आठ बजे से सात घंटे तक चली तलाशी के दौरान अधिकारियों को पूरा सहयोग दिया। यह तलाशी निविदाओं में अनियमितताओं के आरोपों को लेकर की गई।“उन्होंने स्वीकार किया कि उनके और उनके भाई समेत 12 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नेहरू ने एक सवाल के जवाब में दावा किया कि विधानसभा में सरकार से सवाल करने में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें डराने या दबाव में लाने के लिए छापेमारी “राजनीति से प्रेरित” थी।उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है और वह अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करेंगे। नेहरू फिलहाल तिरुचिरापल्ली पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और तमिलनाडु विधानसभा में डीएमके के उपनेता हैं। वह मध्य तमिलनाडु के प्रमुख डीएमके नेताओं में शामिल हैं।डीएमके के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए टीवीके के मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि नेहरू से जुड़े ठिकानों पर तलाशी साक्ष्यों और शिकायतों के आधार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 6, 2026 · 2 min · National Desk

पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव: ईरान के तीन तेल टैंकरों को अमेरिकी सेना ने किया तबाह, क्या है कार्रवाई की वजह?

ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से समुद्री यातायात को सीमित करने की कोशिश की है। इसके जवाब में अमेरिका ने नौवहन की सुरक्षा और ईरानी खतरों से निपटने के उद्देश्य से अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। दोनों देशों के बीच टकराव में समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति बड़े मुद्दे बनकर सामने आए हैं। ईरानी तेल और समुद्री संपत्तियों को निशाना बनाकर अमेरिका तेहरान पर दबाव बढ़ाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा यह कार्रवाई भी है। ईरान ने दो अमेरिकी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी युद्धपोत इन मिसाइलों से बचने में सफल रहे। इस हमले में किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी के घायल होने की जानकारी नहीं है। अमेरिकी बलों ने ईरान के तीन कच्चे तेल के टैंकरों पर हमला किया। यह कार्रवाई वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव में एक और बड़ी वृद्धि के तौर पर देखी जा रही है।क्षेत्र में पहले से ही वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ी है। तेल टैंकरों पर हमले से समुद्री परिवहन और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ सकती है।होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के तेल कारोबार का एक बड़ा हिस्सा आम तौर पर इसी रास्ते से होकर गुजरता है।ईरानी तेल और समुद्री संपत्तियों को निशाना बनाना तेहरान पर दबाव बढ़ाने की अमेरिकी कोशिश का हिस्सा है। हालांकि, तेल ले जाने वाले जहाजों पर हमले से क्षेत्र में समुद्री आवाजाही और जटिल हो सकती है।तेल टैंकरों पर हमले और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव से ऊर्जा की आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। यह स्थिति अ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 5, 2026 · 2 min · National Desk

कैसे बनाया इंडियन पासपोर्ट?: भारतीय बनकर गया हांगकांग, निर्वासित होकर दिल्ली पहुंचा यात्री निकला बांग्लादेशी

कैसे बनाया भारतीय पासपोर्ट? जांच में पता चला कि आरोपी यात्री ने अपनी बांग्लादेशी नागरिकता छिपाकर गलत जानकारी के आधार पर भारतीय दस्तावेज हासिल किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसने भारतीय पासपोर्ट बनवाया और विदेश यात्रा की। एयरपोर्ट पुलिस उपायुक्त विचित्र वीर ने बताया कि यात्री के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपी यात्री से पूछताछ कर पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी ने भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज कैसे हासिल किए। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि भारतीय पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति या गैंग ने उसकी मदद की थी या नहीं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 5, 2026 · 1 min · National Desk

खबरों के खिलाड़ी: कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह?

खबरों के खिलाड़ी: कैसे साधे जा रहे यूपी में चुनावी समीकरण, महिलाओं के बाद युवा वोटरों पर कैसे सबकी निगाह? अनुराग वर्मा: राहुल गांधी के साथ परेशानी ये है कि वो क्षेत्रीय सहयोगी भी चाहते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर। पिछले चुनाव में प्रियंका गांधी ने लड़की हूं लड़ सकती हूं कैंपेन पर चुनाव लड़ीं थीं, लेकिन उनका पूरा कैंपेन विफल रहा था। वहीं, अखिलेश यादव की परेशानी ये है कि उन्हें नए वोट अपने साथ जोड़ने हैं। अखिलेश यादव के पास खोने के लिए बहुत कुछ है। बातें बहुत सी होती हैं, लेकिन आखिरी तक चीजें साफ नहीं होती हैं। हर चुनाव से पहले गठबंधन की बात होती है, लेकिन अंत तक तस्वीर साफ नहीं होती है। जैसे पिछले कुछ वक्त से महिला एक अलग वोटर वर्ग बना है वैसे ही अब जेन-जी के रूप में एक नया वोटर वर्ग तैयार होता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हैं। सपा और कांग्रेस के गठबंधन से पहले दोनों ओर से अपने-अपने दावे शुरू हो गए हैं। दोनों दलों की ओर से अपने साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश भी हो रही है। इस हफ्ते ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चुनाव से पहले बन रहे इन्हीं समीकरणों पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे। पूर्णिमा त्रिपाठी: हर दल पब्लिक पोश्चरिंग करता है। वही कांग्रेस अभी कर रही है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 5, 2026 · 2 min · National Desk

कीव पर तीन दिन के लिए रोके रूसी हमले: रूस-यूक्रेन युद्ध में नई पहल की क्या वजह, पुतिन ने क्यों दिया ये आदेश?

दोनों अमेरिकी दूतों का मॉस्को के सरकारी हवाई अड्डे पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव ने स्वागत किया। एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, विटकॉफ, कुशनर और दिमित्रिएव को लेकर एक काफिला हवाई अड्डे से मॉस्को शहर की ओर रवाना हुआ। दिमित्रिएव इससे पहले भी पुतिन और अमेरिकी वार्ताकारों के बीच हुई बैठकों में शामिल रहे हैं। वह दोनों पक्षों के बीच रूस की यात्राओं में आए विराम के दौरान भी अमेरिकी वार्ताकारों के संपर्क में रहे। इस साल उन्होंने रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों में छूट दिलाने के लिए बातचीत में भी भूमिका निभाई थी। दोनों दूत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए कूटनीतिक प्रयास के तहत यूक्रेन की राजधानी का दौरा करेंगे। विटकॉफ और कुशनर शनिवार को मॉस्को पहुंचे हैं। वे पुतिन के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत करेंगे। बातचीत के बाद दोनों के 6 सितंबर को कीव जाने की उम्मीद है।पुतिन शनिवार को विटकॉफ और कुशनर के साथ बातचीत करने वाले हैं। क्रेमलिन ने कहा है कि रूसी नेता और अमेरिकी विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत के बाद मीडिया को जानकारी दी जाएगी। यह फैसला कीव पर रूसी हमलों में बढ़ोतरी के बीच आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूस ने रात में कीव और बोरिस्पिल के हवाई अड्डों को जानबूझकर निशाना बनाया।जेलेंस्की ने कहा कि इन हमलों का संबंध अमेरिकी दूतों के विमान से यूक्रेन पहुंचने की संभावना को लेकर चल रही चर्चाओं और तैयारियों से था। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “स्पष्ट रूप से, हवाई अड्डों पर रूस के ये हमले अमेरिकी पक्ष के विमान से यूक्रेन आने की संभावना को लेक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

September 5, 2026 · 2 min · National Desk