'क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार है?': अरावली मामले पर सीजेआई सख्त, विशेषज्ञ समिति को नहीं दी 6 महीने की मोहलत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने साफ किया कि समिति को अब और समय नहीं दिया जाएगा। समिति की पिछली समयसीमा 31 अगस्त को खत्म हो चुकी थी। समिति ने 28 फरवरी 2027 तक समय मांगा था। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “समिति ने मूल रूप से मेरी सेवानिवृत्ति तक मामले को स्थगित करने की मांग की है।“सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर समिति तय समय में अपना काम पूरा नहीं कर पाती है तो वह समिति के पुनर्गठन पर विचार कर सकता है। पीठ ने समिति को 30 नवंबर तक काम पूरा करने का निर्देश देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर उसे “दिन-रात काम” करना चाहिए।अदालत ने यह भी कहा कि अंतिम निष्कर्ष तय करने से पहले समिति को प्रभावी सलाह-मशविरा करना होगा। उसे राजस्थान और गुजरात के आदिवासी समुदायों समेत सभी संबंधित पक्षों की बात सुनने का निर्देश दिया गया है।सुप्रीम कोर्ट ने समिति को जरूरत पड़ने पर मुद्दे से जुड़े अंतरिम रिपोर्ट भी उसके सामने रखने की अनुमति दी है। इससे अरावली से जुड़े जरूरी मामलों पर पूरी प्रक्रिया खत्म होने का इंतजार किए बिना अदालत विचार कर सकेगी।सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश की पीठ को बताया कि एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “समिति को केवल अंतरिम रिपोर्ट नहीं, बल्कि अंतिम रिपोर्ट के साथ आना चाहिए।“भाटी ने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को प्रभावी तरीके से सुनने और जरूरी सामग्री अदालत के सामने रखने के लिए समिति को अतिरिक्त समय की जरूरत है। केंद्र की सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि प्रभावित पक्षों को अपनी बात रखने का अभी सीमित अवसर मिला है। समिति की …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...