मक्का समझौते की खुली पोल: पाकिस्तान-तुर्किये पीछे हटे, सऊदी अरब ने हूती हमलों से बचने को इस्राइल से मांगी मदद
सऊदी अरब के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती क्या है? सऊदी अरब के सामने यमन में हूती लड़ाकों के बढ़ते प्रभाव के कारण गंभीर सुरक्षा और ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। हूतियों ने पिछले सप्ताह लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। इसके साथ ही जलडमरूमध्य के महत्वपूर्ण द्वीपों पर भी उनका नियंत्रण हो गया है। हूती नेताओं ने कहा है कि जुलाई से लागू सऊदी जहाजों की नाकाबंदी जारी रहेगी, जबकि अमेरिका और दूसरे देशों के जहाजों को जलडमरूमध्य से स्वतंत्र रूप से गुजरने की अनुमति होगी। इससे सऊदी अरब के लिए समुद्री रास्ते से तेल के परिवहन पर दबाव बढ़ गया है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य सऊदी अरब के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर पड़ा है? सऊदी अरब ने इस्राइल से मदद क्यों मांगी? क्या सऊदी अरब ने सिर्फ इस्राइल से ही मदद मांगी है? पाकिस्तान-तुर्किये ने सऊदी अरब की मदद से इनकार क्यों किया? मक्का रक्षा समझौता क्या है? मक्का समझौते पर सवाल क्यों उठ रहे हैं? ईरान के साथ चल रहे संघर्ष का इस पूरे संकट से क्या संबंध है? क्या सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं? इस्राइल के लिए भी हूती खतरा क्यों अहम है? इस्राइल हूती लड़ाकों के खिलाफ सीधे कार्रवाई करेगा? मक्का समझौते का भविष्य अब क्या दिखाई देता है? यह घटनाक्रम सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हुए मक्का रक्षा समझौते पर गंभीर सवाल खड़े करता है। समझौते में एक साझेदार पर सैन्य हमला पूरे गठबंधन पर हमला माने जाने और उसके खिलाफ मिलकर जवाब देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद हूती हमलों और यमन में बदलते हालात के बीच पाकिस्तान और तुर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...