पाकिस्तान की किरकिरी: इस्राइली दूत बोलीं- पश्चिम एशिया संकट में भारत बन सकता है बेहतर मध्यस्थ, PAK को लताड़ा

यह वीडियो/ हटाएं पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब दूसरे महीने में पहुंच चुका है और इसी बीच इस्राइल के विदेश मंत्रालय की विशेष दूत फ्लेर हसन-नहूम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष शुरू से ही एक ‘मल्टी-फ्रंट यानी कई मोर्चों वाला क्षेत्रीय युद्ध’ बन गया था और इस्राइल ने इसमें सैन्य रूप से काफी बढ़त हासिल की है। यरुशलम से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि 7 अक्तूबर को दक्षिण से हमास ने हमला किया, जिसे उन्होंने ईरान का समर्थन प्राप्त संगठन बताया। इसके अगले ही दिन उत्तर दिशा से भी हमला हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि इस्राइल को एक साथ कई मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 31, 2026 · 1 min · National Desk

West Asia Crisis: 'किसी और की जंग में मत कूदो', खाड़ी देशों को रूस की सख्त चेतावनी; US-इस्राइल पर साधा निशाना

यह वीडियो/ हटाएं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि खाड़ी देशों को किसी और के युद्ध में घसीटना बेहद खतरनाक होगा और इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। मॉस्को से जारी बयान के अनुसार, लावरोव ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) देशों के विदेश मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस में बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि रूस खाड़ी के देशों की संप्रभुता और उनकी क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह समर्थन करता है और उनके खिलाफ किसी भी तरह के हमले को गलत मानता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 31, 2026 · 1 min · National Desk

अमेरिकी विशेषज्ञ का दावा: खतरे में पड़ सकती है ट्रंप की सत्ता, बताया- कैसे ताकतवर हुआ ईरान; भारत पर कही ये बात

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने कहा है कि ईरान अब दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शामिल हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल और युद्ध के कारण ईरान की ताकत तेजी से बढ़ रही है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर भारत जैसे देशों पर। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष तीन चरणों में आगे बढ़ रहा है। पहला चरण अमेरिका की कार्रवाई, दूसरा ईरान की प्रतिक्रिया और तीसरा जमीन पर युद्ध की ओर बढ़ना है। फिलहाल दुनिया पहले और दूसरे चरण के बीच खड़ी है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल का बड़ा नियंत्रण है, जिससे उसकी ताकत और बढ़ गई है।रॉबर्ट पेप ने कहा कि ईरान अब दुनिया के तेल बाजार में बड़ा खिलाड़ी बन गया है। उनके मुताबिक, ईरान के पास दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल पर असर डालने की ताकत है। उन्होंने कहा कि चार दशक की कूटनीति से जो नहीं हुआ, वह कुछ हफ्तों के युद्ध में हो गया। अब ईरान तेल और परमाणु क्षमता के कारण और मजबूत हो रहा है।उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जैसे-जैसे तेल महंगा होगा, वैसे-वैसे खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि ईंधन की कमी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमीर देश तो महंगा तेल खरीद लेंगे, लेकिन गरीब और विकासशील देशों को सप्लाई की कमी का सामना करना पड़ेगा।पेप ने दावा किया कि भारत धीरे-धीरे ईरान के करीब जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने के लिए तेहरान से संपर्क बढ़ा रहा है। हालांकि भारत खुलकर यह नहीं कह रहा, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक तरह की रणनीति है। उन्होंन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 31, 2026 · 2 min · National Desk

US-Iran War: 'पर्दे के पीछे अमेरिका-ईरान की बातचीत जारी', व्हाइट हाउस का बड़ा दावा; फिर भी तेहरान को चेताया

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी इस्राइल और खाड़ी देशों में मैजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है। मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब अपने 31वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में तनाव अब भी चरम पर है। इसी उग्र हालात के बीच अब अमेरिका और ईरान की बातचीत को लेकर व्हाइट हाउस का बड़ा दावा सामने आया है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर सोमवार को सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही ईरान की ओर से सार्वजनिक रूप से सख्त बयान दिए जा रहे हों, लेकिन पर्दे के पीछे दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सही दिशा में आगे बढ़ रही है।अपने बयान में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने आगे बताया कि ईरान की सरकार के कुछ हिस्से अब हालात से परेशान होकर बातचीत के लिए तैयार दिख रहे हैं। उनके अनुसार, ईरान समझता है कि अगर अभी बातचीत नहीं हुई तो उसे और ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में जो खबरें या बयान सामने आ रहे हैं, वे पूरी सच्चाई नहीं दिखाते। असल में निजी तौर पर जो बातचीत हो रही है, वह सार्वजनिक बयानों से काफी अलग है।करोलिन लेविट ने आगे चेतावनी भी दी कि अगर ईरान समझौता करने से इनकार करता है, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान को किसी न किसी रूप में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़े।हालांकि दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका के दावो …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 31, 2026 · 2 min · National Desk

Amit Shah: 'नक्सलवाद खत्म, आदिवासियों को मिला असली न्याय'; लोकसभा में नक्सलवाद पर बोले अमित शाह

उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने नक्सलियों से बातचीत नहीं, बल्कि उन्हें खत्म कर विकास को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना। उन्होंने कहा कि जो हथियार उठाएगा, उसे कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों का पूरा केंद्रीय नेतृत्व, पोलित ब्यूरो और कमेटी अब खत्म हो चुकी है। कई मारे गए, कई ने सरेंडर किया और कुछ फरार हैं।शाह ने कहा कि देश अब नक्सलमुक्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने बताया कि कई बड़े ऑपरेशन जैसे बुढ़ा, थंडरस्टॉर्म और ब्लैक फॉरेस्ट चलाए गए, जिनमें भारी मात्रा में हथियार, आईईडी फैक्ट्री और अनाज बरामद हुआ। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा के बड़े इलाके अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुके हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की भूमिका को उन्होंने अहम बताया।आजादी के समय देश संसाधनों की कमी और विकास की चुनौतियों से जूझ रहा था। कई दूर-दराज के इलाकों तक सरकार की पहुंच नहीं थी, सड़कों और सुविधाओं का अभाव था। ऐसे हालात में कुछ संगठनों ने इन कमजोरियों का फायदा उठाया। जहां राज्य की पकड़ कम थी, उन्हीं इलाकों को रेड कॉरिडोर बनाया गया। भोले-भाले आदिवासियों को भेदभाव और शोषण के नाम पर भड़काया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। हकीकत यह है कि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध भेदभाव नहीं, बल्कि विकास की कमी थी, जिसका इस्तेमाल कर हिंसा को बढ़ावा दिया गया।गृह मंत्री ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय नक्सलवाद को बढ़ावा मिला। उन्होंने एनएसी, कुछ नेताओं और कथित नक्सल समर्थकों के संबंधों का जिक्र किया। शाह ने कहा कि यह मुद्दा यहीं नहीं रुकेगा और चुनाव तक जाएगा। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाए और कहा कि देश को …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk

अमेरिकी विशेषज्ञ का दावा: खतरे में पड़ सकती है ट्रंप की सत्ता, बताया- कैसे ताकतवर हुआ ईरान; भारत पर कही ये बात

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिकी विशेषज्ञ रॉबर्ट पेप ने कहा है कि ईरान अब दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शामिल हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि तेल और युद्ध के कारण ईरान की ताकत तेजी से बढ़ रही है और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा, खासकर भारत जैसे देशों पर। उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष तीन चरणों में आगे बढ़ रहा है। पहला चरण अमेरिका की कार्रवाई, दूसरा ईरान की प्रतिक्रिया और तीसरा जमीन पर युद्ध की ओर बढ़ना है। फिलहाल दुनिया पहले और दूसरे चरण के बीच खड़ी है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल का बड़ा नियंत्रण है, जिससे उसकी ताकत और बढ़ गई है।रॉबर्ट पेप ने कहा कि ईरान अब दुनिया के तेल बाजार में बड़ा खिलाड़ी बन गया है। उनके मुताबिक, ईरान के पास दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल पर असर डालने की ताकत है। उन्होंने कहा कि चार दशक की कूटनीति से जो नहीं हुआ, वह कुछ हफ्तों के युद्ध में हो गया। अब ईरान तेल और परमाणु क्षमता के कारण और मजबूत हो रहा है।उन्होंने कहा कि भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। जैसे-जैसे तेल महंगा होगा, वैसे-वैसे खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि सिर्फ महंगाई ही नहीं, बल्कि ईंधन की कमी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमीर देश तो महंगा तेल खरीद लेंगे, लेकिन गरीब और विकासशील देशों को सप्लाई की कमी का सामना करना पड़ेगा।पेप ने दावा किया कि भारत धीरे-धीरे ईरान के करीब जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा हितों को सुरक्षित रखने के लिए तेहरान से संपर्क बढ़ा रहा है। हालांकि भारत खुलकर यह नहीं कह रहा, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक तरह की रणनीति है। उन्होंन …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk

Rahul Gandhi: 'ईरान-रूस से तेल खरीदने के लिए ट्रंप से लेनी पड़ रही इजाजत', राहुल गांधी का PM मोदी पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने जनसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के साथ समझौता करके हमारे किसानों के अधिकार छीन लिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी आधुनिक भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। राहुल ने कहा कि आज भारत अपनी मर्जी से पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकता है। उन्होंने आगे कहा कि मध्य पूर्व के हालातों की वजह से आर्थिक संकट आने वाला है, लेकिन 140 करोड़ लोगों का देश अपनी मर्जी से तेल नहीं खरीद पा रहा है।केरल के रबर किसानों का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने एलडीएफ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एलडीएफ ने 2016 के घोषणापत्र में रबर की कीमत 250 रुपये करने का वादा किया था, जिसे पिछले 10 साल में पूरा नहीं किया गया। उन्होंने घोषणा की कि राज्य में यूडीएफ की सरकार बनते ही पहली कैबिनेट बैठक में रबर की कीमत 250 रुपये तय की जाएगी और बाद में इसे 300 रुपये तक ले जाया जाएगा।राहुल गांधी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “केरल के मुख्यमंत्री से कितने घंटे पूछताछ हुई? क्या वह जमानत पर बाहर हैं? क्या उनके बच्चों और उनके परिवार से पूछताछ की गई है? जब एलडीएफ नेतृत्व ने सबरीमाला मंदिर से सोना चुराकर उसकी जगह पीतल लगा दिया, तो प्रधानमंत्री इस पर कुछ क्यों नहीं कहते?” उन्होंने कहा कि पीएम खुद को हिंदुत्व का रक्षक बताते हैं, लेकिन इस चोरी पर कुछ नहीं बोलते।हालांकि, राहुल गांधी के इन दावों पर पलटवार भी हो रहा है। जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पिछले भाषणों में सबरीमाला मंदिर में सोने की चोरी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। पीएम मोदी ने इसी साल जनवरी में राज …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk

'2014 में मोदी आए, 2026 में सब समाप्त...': अमित शाह ने बताई वाम चरमपंथ की कहानी, जानें कैसे साधा निशाना

आगे गृहमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से चाहता था कि उनकी स्थिति संसद में सामने आए, लेकिन लंबे समय तक इस पर गंभीर चर्चा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने वाम चरमपंथ की पूरी टाइमलाइन भी पेश की। आइए, अमित शाह के संबोधन से समझते हैं कि 1964 से 2026 तक, वाम कैसे बढ़ा? और नक्सलवाद कैसे खत्म हुआ?अमित शाह ने बताया कि वामपंथी आंदोलन की जड़ें 1964 में माकपा के गठन से जुड़ी हैं। उस समय सोवियत संघ और चीन के बीच वैचारिक मतभेद हुआ, जिसके चलते भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी बनी। इसके बाद 1969 में भाकपा-माले का गठन हुआ, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध करते हुए सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।1964 में माकपा के गठन के साथ वामपंथी राजनीति में दो धाराएं बनीं। 1969 में भाकपा-माले ने संसदीय राजनीति को नकारते हुए सशस्त्र क्रांति का रास्ता चुना। अमित शाह ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ था और यहीं से नक्सलवाद की शुरुआत हुई।अमित शाह ने कहा कि 1975 के बाद माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर यानी एमसीसी सक्रिय हुआ, जो बिहार और झारखंड में फैला। 1998 में पीपुल्स वॉर ग्रुप बना और कई गुट एकजुट हुए। 2001 में गुरिल्ला फोर्स बनाई गई और 2004 में विभिन्न माओवादी संगठनों का विलय हुआ, जिससे आंदोलन और मजबूत हुआ।उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने उन इलाकों को चुना जहां सरकार की पहुंच कम थी। वहां के भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर उनके हाथ में हथियार थमा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा का मकसद विकास नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था।अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने विकास और सुरक्षा दोनों पर जोर दिया। धारा 370 और 35ए हटाने, जीएसटी लागू करने और अन्य …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk

यूपी: प्रदेश में शुरू हुई गेहूं की खरीद, सवा लाख किसानों ने किया पंजीकरण; इस बार 48 घंटे में हो जाएगा भुगतान

प्रदेश में गेहूं खरीद सोमवार से शुरू हो गई है। 2.24 लाख से अधिक किसानों ने बिक्री के लिए पंजीकरण करा लिया है। प्रदेश में अब तक 3574 क्रय केंद्र भी स्थापित कर लिए गए हैं। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। खरीद 15 जून तक चलेगी। खाद्य विभाग की विपणन शाखा सहित कुल 8 एजेंसियों के 6500 क्रय केंद्र स्थापित होंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने मौसम को देखते हुए किसानों के लिए छाया, पानी व बैठने समेत हर जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर लेने के निर्देश दिए हैं। उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को अलग से 20 रुपये प्रति क्विंटल दिए जाएंगे। खाद्य व रसद विभाग ने 30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री ने इसे बढ़ाकर 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया। सीएम ने 48 घंटे में डीबीटी के माध्यम से किसानों को भुगतान के भी निर्देश दिए हैं।बिचौलियों का हस्तक्षेप न रहे, इसलिए सारा सिस्टम ऑनलाइन कर दिया गया है। जिन किसानों ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है, वे fcs.up.gov.in या यूपी किसान मित्र एप के माध्यम से पंजीकरण या नवीनीकरण कर सकते हैं। समस्या होने पर टोल-फ्री नंबर 18001800150 पर संपर्क किया जा सकता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk

LPG Crisis: पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पुख्ता, जानिए सरकार मौजूदा हालात पर क्या बोली

पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव के बीच भारत सरकार ने देशवासियों और उद्योग जगत को ईंधन की निर्बाध आपूर्ति का भरोसा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक हालात के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। कुछ स्थानों पर ग्राहकों द्वारा घबराहट में की जा रही खरीदारी (पैनिक बाइंग) की खबरों के बीच, सरकार ने देश के ऊर्जा बाजार को स्थिर रखने के लिए कई स्तरों पर त्वरित उपाय किए हैं। कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति बनाए रखने के रणनीतिक उपाय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने देश में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी दी। उन्होंने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात के बावजूद आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। सरकार ने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एलपीजी आपूर्ति की स्थिति शर्मा ने बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। रिफाइनरियां सामान्य रूप से कार्य कर रही हैं और कच्चे तेल का भंडार भी पर्याप्त है। कुछ स्थानों पर घबराहट में खरीदारी देखी गई है, लेकिन नागरिकों को आश्वस्त किया गया है। घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सरकार ने उत्पाद शुल्क में कमी की है।पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क दस रुपये घटाया गया है। सरकार ने डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात शुल्क भी लगाया है। उन्होंने अफवाहों पर विश्वास न करने और जरूरत के हिसाब से ईंधन इस्तेमाल करने का अनुरोध किया। प्राकृतिक गैस की घरेलू उपयोग के लिए शत प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। एलपीजी वितरकों के पास आपूर्ति की कोई …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

March 30, 2026 · 2 min · National Desk