आगे गृहमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज वर्षों से चाहता था कि उनकी स्थिति संसद में सामने आए, लेकिन लंबे समय तक इस पर गंभीर चर्चा नहीं हुई। साथ ही उन्होंने वाम चरमपंथ की पूरी टाइमलाइन भी पेश की। आइए, अमित शाह के संबोधन से समझते हैं कि 1964 से 2026 तक, वाम कैसे बढ़ा? और नक्सलवाद कैसे खत्म हुआ?अमित शाह ने बताया कि वामपंथी आंदोलन की जड़ें 1964 में माकपा के गठन से जुड़ी हैं। उस समय सोवियत संघ और चीन के बीच वैचारिक मतभेद हुआ, जिसके चलते भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से अलग होकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी बनी। इसके बाद 1969 में भाकपा-माले का गठन हुआ, जिसने लोकतांत्रिक व्यवस्था का विरोध करते हुए सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया।1964 में माकपा के गठन के साथ वामपंथी राजनीति में दो धाराएं बनीं। 1969 में भाकपा-माले ने संसदीय राजनीति को नकारते हुए सशस्त्र क्रांति का रास्ता चुना। अमित शाह ने कहा कि यह फैसला लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ था और यहीं से नक्सलवाद की शुरुआत हुई।अमित शाह ने कहा कि 1975 के बाद माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर यानी एमसीसी सक्रिय हुआ, जो बिहार और झारखंड में फैला। 1998 में पीपुल्स वॉर ग्रुप बना और कई गुट एकजुट हुए। 2001 में गुरिल्ला फोर्स बनाई गई और 2004 में विभिन्न माओवादी संगठनों का विलय हुआ, जिससे आंदोलन और मजबूत हुआ।उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने उन इलाकों को चुना जहां सरकार की पहुंच कम थी। वहां के भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर उनके हाथ में हथियार थमा दिए गए। उन्होंने कहा कि इस विचारधारा का मकसद विकास नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था।अमित शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार ने विकास और सुरक्षा दोनों पर जोर दिया। धारा 370 और 35ए हटाने, जीएसटी लागू करने और अन्य …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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