एफआईपी ने 11 जनवरी को एएआईबी को भेजे कानूनी नोटिस में कहा कि कैप्टन वरुण आनंद उक्त दुर्घटना के संबंध में न तो कोई चश्मदीद गवाह हैं, न ही तकनीकी गवाह हैं और न ही विशेषज्ञ गवाह हैं। कैप्टन वरुण आनंद को बुलाने का एकमात्र आधार मृतक पायलट-इन-कमांड के साथ उनका पारिवारिक संबंध लगता है, जो कानून में गलत है और समन को मनमाना और गैर-कानूनी बनाता है। हादसे की जांच के सिलसिले में एएआईबी ने दिवंगत सभरवाल के भतीजे और एअर इंडिया के नैरो-बॉडी एयरक्राफ्ट पायलट कैप्टन वरुण आनंद को बुलाया है। आनंद एफआईपी के सदस्य भी हैं। सुमित सभरवाल दुर्घटनाग्रस्त बोइंग 787-8 विमान को उड़ाने वाले पायलटों में से एक थे। एआई171 हादसे में 260 लोग मारे गए थे। इनमें विमान सवार 241 लोग भी शामिल थे।नोटिस में एफआईपी ने कहा कि इस सूचना में उस कानूनी प्रावधान, मकसद या प्रासंगिकता का खुलासा नहीं किया गया है जिसके तहत आनंद को बुलाया जा रहा है और न ही यह बताया गया है कि उनकी मौजूदगी किस हैसियत से जरूरी है। वरुण आनंद पेशे से एक कमर्शियल पायलट हैं और उनका उस विमान, उस फ्लाइट, उसकी प्लानिंग, डिस्पैच, ऑपरेशन, मेंटेनेंस, सर्टिफिकेशन, एयरवर्थनेस क्लीयरेंस या क्रू कंपोजिशन से कोई लेना-देना नहीं है।वहीं एएआईबी ने कहा कि विमान (दुर्घटनाओं और घटनाओं की जांच) नियम 2025 के अनुसार, जांचकर्ता के पास जांच से संबंधित किसी भी गवाह को बुलाने और उससे पूछताछ करने का अधिकार है। एएआईबी ने यह भी कहा कि नियमों के तहत, जांचकर्ता ऐसे गवाह से जानकारी या सबूत देने या पेश करने या किसी भी पूछताछ का जवाब देने या वापस आने के लिए कह सकता है, जो उसे सही लगे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
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