Delhi Red Fort Blast: एनआईए ने कोर्ट में दाखिल की चार्जशीट, 10 आरोपियों के खिलाफ 7500 पन्नों में आरोपपत्र

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बुधवार को नई दिल्ली की एक विशेष अदालत में लाल किले के पास हुए कार धमाके के मामले में 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। एजेंसी ने 10 नवंबर, 2025 को हुए इस हमले में कथित संलिप्तता के लिए 10 लोगों को नामजद किया है। इस हमले में 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे। एनआईए के अनुसार, सहित सभी 10 आरोपी संगठन ‘अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH)’ से जुड़े थे, जिसे अल-कायदा से प्रेरित संगठन बताया गया है। मुख्य आरोपी उमर उन नबी की इस धमाके में मौत हो गई थी। उसके अलावा नौ अन्य आरोपियों के नाम भी चार्जशीट में शामिल किए गए हैं।डॉ. नबी के अलावा, चार्जशीट में नामित अन्य व्यक्तियों में आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयाब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल हैं।एनआई की जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित मेडिकल प्रोफेशनल थे। 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक में उन्होंने “AGuH Interim” नाम से संगठन को फिर सक्रिय किया और “Operation Heavenly Hind” शुरू किया था। एनआईए की जांच से पता चला कि “Operation Heavenly Hind” के तहत, आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, AGuH की हिंसक जिहादी विचारधारा का सक्रिय रूप से प्रचार किया, हथियार और गोला-बारूद जमा किया, और बाजार में आसानी से मिलने वाले रसायनों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर विस्फोटक बनाए। एजेंसी ने बताया कि धमाके में इस्तेमाल TATP विस्फोटक आरोपियों ने खुद तैयार किया था।एनआईए की जांच से यह भी पता चला कि आरोपी प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद में भी शामिल थे, जिनमें एक AK-47 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

Dewas: पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट, दो मजदूरों की हुई मौत और कई घायल, धमाके से दहल उठा इलाका

और पढ़ें फैक्टरी में काम कर रहे थे कई मजदूर जानकारी के मुताबिक विस्फोट के समय फैक्टरी में कई मजदूर काम कर रहे थे। अचानक आग लगने के बाद जोरदार धमाका हुआ, जिससे फैक्टरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। धमाके के बाद फैक्टरी से ऊंची लपटें और धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया। ये भी पढ़ें- मौके पर पहुंची दमकल और प्रशासन की टीम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। करीब 8 से 10 फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आग बुझाने में जुटीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी है। हादसे की सूचना मिलते ही उज्जैन आईजी राकेश गुप्ता, डीआईजी नवनीत भसीन और उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और राहत कार्यों की जानकारी ली। जानकारी के मुताबिक विस्फोट के समय फैक्टरी में कई मजदूर काम कर रहे थे। अचानक आग लगने के बाद जोरदार धमाका हुआ, जिससे फैक्टरी परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं।घटना के बाद सभी घायलों को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल मजदूरों को इंदौर के एमवाय अस्पताल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

एक्शन में शुभेंदु सरकार: तिलजला अग्निकांड के बाद कोलकाता में चला बुलडोजर, अवैध फैक्ट्री जमींदोज

जीजे खान रोड स्थित एक बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर मंगलवार दोपहर आग लगी थी। अवैध रूप से चल रही इस चमड़ा फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का अभाव था। हादसे में दो मजदूरों की मौत और पांच के घायल होने की रिपोर्ट मिलते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जांच कमेटी गठित की। बुधवार दोपहर रिपोर्ट सामने आते ही मुख्यमंत्री ने अवैध ढांचे को तुरंत ध्वस्त करने का आदेश दिया। मौके पर तनाव को देखते हुए पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बलों की भारी तैनाती की गई है।इस बीच दमकल एवं आपातकालीन सेवा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। इस घटना में पर्यवेक्षण, निरीक्षण और सुरक्षा नियमों को लागू करने में गंभीर लापरवाही पाए जाने के कारण प्रगति मैदान फायर स्टेशन के स्टेशन ऑफिसर और ऑफिसर-इन-चार्ज गौतम दास को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है जिसे एक महीने के भीतर पूरा करना होगा, और निलंबन अवधि के दौरान वे फायर मुख्यालय से संबद्ध रहेंगे।कार्रवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पिछली सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ‘यह सब नीयत का खेल है। पिछली तृणमूल सरकार की मंशा कभी जनता की सुरक्षा की नहीं थी। उन्होंने अवैध ऊंची इमारतें बनाने वाले उपद्रवियों को संरक्षण दिया।’ पॉल ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि इन अवैध निर्माणों के पीछे टेबल के नीचे भारी लेन-देन हुआ है, जिससे तृणमूल के नेताओं ने फायदा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि इन गरीब मजदूरों की मौत का जवाब कौन देगा?भाजपा सांसद राहुल सिन्हा ने भी सरकार के कदम का समर्थन करते हुए कहा कि तृणमूल ने कट-मनी संस्कृति से पूरे सिस्टम को तबाह कर दिया था। अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिका …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

BJP में पीढ़ी परिवर्तन की तैयारी: नितिन नवीन की टीम में युवाओं को कमान, कैबिनेट में भी बड़ी सर्जरी के संकेत

सूत्रों के मुताबिक नितिन के 20 जनवरी को अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद नई टीम पर प्रारंभिक स्तर पर बातचीत शुरू तो हुई, लकिन इसके बाद पार्टी विधानसभा चुनावों में व्यस्त हो गई। जीत वाले राज्यों में सरकारों के गठन के बाद अब नई टीम पर फिर से बातचीत शुरू हुई है। उक्त सूत्र के मुताबिक चूंकि नई टीम में केंद्रीय मंत्रिमंडल के भी कुछ चेहरों को जगह मिलेगी, ऐसे में नई टीम के गठन के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल का भी विस्तार होगा।पार्टी नेतृत्व और संघ दोनों चाहते हैं कि इसमें राज्यों के ऐसे ऊर्जावान युवाओं को मौका मिले, जिससे पार्टी आगामी डेढ़ से दो दशक तक नए नेतृत्व का सूखा न झेले। वैसे भी नितिन के रूप में अब तक के सबसे युवा को संगठन की कमान देकर पार्टी में पीढ़ी परिवर्तन का संकेत दिया जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि नई टीम का गठन 26 मई (मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने) से पहले किया जा सकता है।पूरी संभावना है कि 9 जून को तीसरे कार्यकाल का दो साल पूरा होने के आसपास मंत्रिमंडल विस्तार की रूपरेखा भी तय हो जाए। चूंकि अगले साल यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, गोवा, गुजरात और हिमाचल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नेतृत्व चुनावी राज्यों को संदेश देने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में देरी नहीं करेगी। विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच जिस प्रकार कई अहम मंत्रालयों की नौकरशाही में अचानक और भारी बदलाव हुए हैं, उससे मंत्रिमंडल में भी बड़ी सर्जरी के संदेश छिपे हैं। वैसे भी मोदी सरकार का हर विस्तार बड़े चेहरे का विकेट गिरने के कारण चर्चा में रहा है। नौकरशाही में बदलाव से संदेश गया है कि पीएम कई अहम मंत्रालयों के कामकाज से खुश नहीं हैं। इसके अलावा आप के सात राज्यसभा सांसदों के पाला बदल के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

The Bonus Market Update: शेयर बाजार में बढ़त, जानिए सेंसेक्स-निफ्टी का हाल

हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में राहत की किरण नजर आ रही है। बीते कुछ दिनों से बिकवाली का दबाव झेल रहे बाजार के प्रमुख सूचकांक गुरुवार को हरे निशान पर कारोबर करते दिख रहे हैं। सुबह 9 बजकर 22 मिनट पर सेंसेक्स 448.92 (0.60%) अंकों की बढ़त के साथ 75,057.90 के स्तर पर जबकि निफ्टी 139.11 (0.59%) अंक चढ़कर 23,551.70 के स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में 25 से अधिक शेयर हरे निशान पर कारोबर करते दिखे। अदाणी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और ट्रेंट जैसे शेयरों में 1.5% से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। और पढ़ें …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 1 min · National Desk

India Sugar Export Ban: भारत ने चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई, फैसला सितंबर तक रहेगा प्रभावी

भारत सरकार ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। निर्यात पर यह रोक 30 सितंबर या अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। सरकार ने यह कदम देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और इसकी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार, यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और परिष्कृत चीनी पर लागू होता है। सरकार ने नीति में बदलाव करते हुए चीनी को निषिद्ध श्रेणी में रख दिया है। सरकार ने कहा कि यह प्रतिबंध मौजूदा टैरिफ-दर कोटा और व्यवस्थाओं के तहत यूरोपीय संघ और अमेरिका को चीनी निर्यात पर लागू नहीं होगा।रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने स्थानीय कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। सरकार का यह कदम वैश्विक सफेद और कच्ची चीनी की कीमतों को सहारा दे सकता है। इससे ब्राजील और थाईलैंड जैसे प्रतिद्वंद्वी उत्पादकों को एशियाई और अफ्रीकी खरीदारों को अधिक शिपमेंट भेजने का अवसर मिलेगा। भारत, ब्राजील के बाद दुनिया का सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है।गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले मिलों को 1.59 मिलियन टन चीनी निर्यात की अनुमति दी थी। लेकिन अब उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष खपत से कम रहने की उम्मीद है। प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने की पैदावार कमजोर हुई है। अल नीनो मौसम की स्थिति इस वर्ष के मानसून को बाधित कर सकती है। इससे अगले सीजन का उत्पादन शुरुआती अनुमानों से कम रहने का जोखिम बढ़ गया है।निर्यात के लिए स्वीकृत 1.59 मिलियन टन में से व्यापारियों ने लगभग 800,000 टन के अनुबंध किए थे। इसमें से 600,000 टन से अधिक चीनी पहले ही …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

US से जंग के 75 दिन बाद दिल्ली पहुंचे अराघची: भारत-ईरान संबंध पर हुकूमत की सोच क्या? BRICS समिट पर नजरें

ब्रिक्स बैठक से ठीक पहले ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि संगठन के भीतर किसी भी बड़े मतभेद का संदेश दुनिया में नहीं जाना चाहिए। ईरान पूरी तरह से ब्रिक्स घोषणा के पक्ष में है। तेहरान चाहता है कि समूह के सदस्य देश पश्चिम एशिया संकट पर एक सुर में बात करें। यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें ब्रिक्स देशों के बीच आंतरिक मतभेदों की चर्चा हो रही थी।ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव को कम करने के लिए यदि भारत कोई भी पहल करता है, तो ईरान उसका दिल खोलकर स्वागत करेगा। ईरान भारत को एक ऐसे विश्वसनीय देश के रूप में देख रहा है, जिसके संबंध सभी पक्षों से बेहतर हैं। ईरान का यह रुख भारत की बढ़ती वैश्विक साख और विश्वबंधु की छवि पर मुहर लगाता है।ईरानी पक्ष ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज को लेकर भी बड़ा बयान दिया है। ईरान ने कहा किया कि वह इस समुद्री रास्ते में शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत के लिए यह बयान बेहद राहत भरा है। भारत की तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। यहां शांति रहने से न केवल भारत बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।भारत इस समय बेहद सधे हुए कदमों से आगे बढ़ रहा है। देश के सामने एक तरफ ईरान के साथ अपने पुराने और रणनीतिक रिश्तों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ संबंधों को संतुलित करना है। यही कारण है कि भारत ने अभी तक किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है। सबकी नजरें अब ब्रिक्स के संयुक्त बयान पर हैं कि सदस्य देश इस संकट पर क्या रुख अपनात …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

₹900 करोड़ की दौलत, राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी: कौन हैं केविन वार्श, जो बने फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष?

केविन वार्श का सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। न्यूयॉर्क के अल्बानी में जन्मे वार्श ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हार्वर्ड लॉ स्कूल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त की। वे महज 35 साल की उम्र में फेडरल रिजर्व के गवर्नर बन गए थे, जो अमेरिकी इतिहास में एक रिकॉर्ड है। लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक बैंकर की नहीं, बल्कि एक ऐसे रणनीतिकार की है जिसके तार राजनीति और बेतहाशा दौलत, दोनों से जुड़े हैं। केविन वार्श की नियुक्ति के पीछे तीन बड़े पहलू हैं, जो उन्हें विवादों के केंद्र में रखते हैं।वार्श के पास लगभग 100 मिलियन डॉलर करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक की निजी संपत्ति है। उनके निवेश एलन मस्क की स्पेसएक्स, प्रेडिक्शन मार्केट प्लेटफॉर्म पॉलीमार्केट और कई एआई स्टार्टअप्स में हैं। सीनेट में उन पर आरोप लगे कि इतने बड़े निवेशों के साथ वे निष्पक्ष फैसले कैसे लेंगे? हालांकि उन्होंने वादा किया है कि वे पद संभालने के 90 दिनों के भीतर अपने सारे शेयर बेच देंगे, लेकिन विपक्ष उन्हें वॉल स्ट्रीट का दलाल कहकर निशाना बनाता रहा है।वार्श की शादी जेन लॉडर से हुई है, जो मशहूर कॉस्मेटिक्स कंपनी एस्टी लॉडर की वारिस हैं। जेन की अपनी निजी संपत्ति 18,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।जेन के पिता रोनाल्ड लॉडर, डोनाल्ड ट्रंप के पुराने और करीबी दोस्तों में गिने जाते हैं। यही कारण है कि वार्श की नियुक्ति को योग्यता से ज्यादा पारिवारिक रसूख और ट्रंप की निजी पसंद के तौर पर देखा जा रहा है।वार्श ने 2011 में फेड के गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वे तत्कालीन नीतियों के सख्त खिलाफ थे। अब वे सत्ता परिवर्तन के वादे के साथ लौटे हैं।विपक्षी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने उन्हें ट्रंप का ‘सॉक पपेट’ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

UP Weather: उत्तर प्रदेश में आंधी और बारिश ने मचाई तबाही, अलग-अलग जिलों में 96 की मौत; कई घायल

प्रदेश के कई जिलों में बुधवार को आंधी और बारिश ने भारी तबाही मचाई। पेड़ व बिजली के खंभे गिर गए, जिससे कई जगह बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। अलग-अलग जिलों में 96 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए। सबसे ज्यादा वाराणसी, प्रयागराज और कानपुर मंडल में लोगों की मौत हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे मकान और टीन शेड उड़ गए, वहीं, फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। तेज बारिश और धूल भरी आंधी के कारण सड़कों पर आवाजाही प्रभावित रही। कई जगह पेड़ गिरने से यातायात बाधित हो गया। मरने वालों में भदोही में 18, मिर्जापुर में 15, प्रयागराज में 17, प्रतापगढ़ और बरेली में 4-4, फतेहपुर में 10, उन्नाव और बदायूं में 6-6, सीतापुर, रायबरेली, चंदौली, कानपुर देहात, हरदोई और संभल में दो-दो, कौशांबी, शाहजहांपुर, सोनभद्र और लखीमपुर खीरी में एक-एक लोग शामिल हैं।आंधी की वजह से दिल्ली-हावड़ा रूट करीब डेढ़ घंटे के लिए बाधित हो गया। फतेहपुर में पेड़ गिरने से ओएचई लाइन टूट गई। इससे कानपुर होकर आने-जाने वाली 22 ट्रेनें प्रभावित हुई। प्रयागराज-जौनपुर रेल खंड पर थरवई और सरायचंडी रेलवे स्टेशन के बीच एक भारी-भरकम पेड़ गिर गया, जिससे ट्रेनों का ठप हो गया। लखनऊ और प्रतापगढ़ रूट पर भी असर पड़ा।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बेमौसम बारिश, आंधी और बिजली गिरने से हुए नुकसान पर पीड़ितों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को राहत पहुंचाने का काम 24 घंटे में पूरा किया जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों समेत अन्य विभागों के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर पीड़ितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि इस काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk

शांति की उम्मीद धराशायी: रूस ने यूक्रेन पर दागे 800 ड्रोन, कई क्षेत्रों में मची तबाही; छह लोगों की मौत

यह हमला बुधवार सुबह शुरू हुआ जो कई घंटों तक जारी रहा। रूसी ड्रोन ने राजधानी कीव समेत पश्चिमी शहर ल्वीव और ओडेसा बंदरगाह को निशाना बनाया। जेलेंस्की के मुताबिक, रूस का स्पष्ट लक्ष्य यूक्रेन की एयर डिफेंस प्रणाली को खत्म करना है। उन्होंने दावा किया कि ड्रोन हमलों के बाद अब रूस क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला कर सकता है।हैरानी की बात यह है कि यह हमला तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति पुतिन युद्ध खत्म होने के संकेत दे रहे हैं। ट्रंप ने चीन रवाना होने से पहले कहा था कि यूक्रेन युद्ध का अंत बहुत करीब है। वहीं, पुतिन ने भी पिछले सप्ताहांत अपने भाषण में आक्रमण खत्म होने की संभावना जताई थी। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।युद्ध की स्थिति अब बदल रही है। यूक्रेन अब केवल बचाव नहीं कर रहा, बल्कि रूस के भीतर तक हमले कर रहा है। बुधवार को ही यूक्रेन ने रूसी सीमा के अंदर ड्रोन हमले किए। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने क्रीमिया और आजोव सागर के ऊपर यूक्रेन के 286 ड्रोन्स को मार गिराया। ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ की रिपोर्ट बताती है कि रूस का वसंत अभियान विफल हो रहा है और उसे भारी जनहानि उठानी पड़ रही है।जेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगाह किया है कि यूक्रेन को अकेला न छोड़ें। उन्होंने कहा कि जब भी यूक्रेन की खबर सुर्खियों से गायब होती है, रूस और भी ज्यादा हिंसक हो जाता है। वर्तमान में दुनिया का ध्यान ईरान युद्ध पर केंद्रित है, जिसका फायदा रूस उठा रहा है। उन्होंने रोमानिया में नाटो देशों से अपील की कि रूस पर प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव को और तेज किया जाए। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...

May 14, 2026 · 2 min · National Desk