'ऋतब्रत को और समय न दिया जाए': चुनाव आयोग को ममता बनर्जी ने क्यों लिखी चिट्ठी, क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय हलचल काफी तेज है। चुनाव आयोग ने जुलाई की शुरुआत में टीएमसी और उसके पत्रों से जुड़े एक मामले में जांच शुरू की थी। आयोग ने 2 जुलाई और 13 जुलाई को पत्र जारी किए थे। आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी की शिकायतों पर टीएमसी से जवाब मांगा था। टीएमसी से 6 जुलाई तक अपनी टिप्पणी देने को कहा गया था। पार्टी ने तय समय पर 6 जुलाई को ही अपना जवाब जमा कर दिया था। टीएमसी ने अपने जवाब की एक कॉपी ई-मेल और स्पीड पोस्ट से ऋतब्रत बनर्जी को भी भेज दी थी।ममता बनर्जी का आरोप है कि आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को बार-बार अतिरिक्त समय दिया। इससे जांच प्रक्रिया में बेवजह देरी हो रही है। आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को जवाब देने के लिए 15 दिनों की और मोहलत दी थी। उनके लिए नई अंतिम तिथि 25 जुलाई तय की गई थी। वहीं टीएमसी के लिए समयसीमा 13 जुलाई तक बढ़ाई गई थी। ममता बनर्जी ने कहा कि 25 जुलाई की तारीख बीतने के बाद भी टीएमसी को कोई जानकारी नहीं दी गई है। पार्टी को यह भी नहीं पता चला कि ऋतब्रत ने अपना जवाब सौंपा है या नहीं।ममता बनर्जी ने 29 जुलाई को लिखे अपने पत्र में आयोग की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि इस मामले का पश्चिम बंगाल की राजनीति पर गहरा असर पड़ रहा है। इसलिए आयोग को दोनों पक्षों के लिए बराबरी का मैदान सुनिश्चित करना चाहिए।ममता बनर्जी ने लिखा कि न्याय का आधार जनता का विश्वास होता है। अगर 25 जुलाई के बाद भी ऋतब्रत बनर्जी को और समय दिया जाता है, तो इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा डगमगा जाएगा। ममता ने मांग की है कि आयोग बिना किसी देरी के इस जांच को तुरंत समाप्त करे। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें) ...