ग्रंथों में वध का वर्णन, पर पुतला दहन का जिक्र नहीं श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण और हरिवंश पुराण जैसे प्रमुख सनातन धर्म ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मथुरा जाकर रंगभूमि में कंस के वध का विस्तृत और सजीव वर्णन मिलता है। अधर्म और अत्याचार के प्रतीक कंस के अंत को असत्य पर सत्य की जीत के रूप में दर्शाया गया है। शास्त्रों में कंस वध के बाद देवताओं द्वारा पुष्प वर्षा करने और आनंद उत्सव मनाने का उल्लेख तो अवश्य है, परंतु प्रतीकात्मक रूप से कंस का पुतला दहन (पुतला जलाने) की किसी प्राचीन परंपरा का सीधा उल्लेख इन ग्रंथों में नहीं मिलता है। इसके बावजूद, रामपुर जिले की लोक-संस्कृति ने इस प्रसंग को अपने अंदाज में जीवंत रखा है, जो इसे देश के अन्य हिस्सों से अलग और खास बनाता है। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
यहां रावण नहीं कंस का होता दहन: परंपरा से परे अनूठा लोक-उत्सव, यूपी के इस जिले में जलते हैं कंस के पुतले
ग्रंथों में वध का वर्णन, पर पुतला दहन का जिक्र नहीं श्रीमद्भागवत महापुराण, विष्णु पुराण और हरिवंश पुराण जैसे प्रमुख सनातन धर्म ग्रंथों में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा मथुरा जाकर रंगभूमि में कंस के वध का विस्तृत और सजीव वर्णन मिलता है। अधर्म और अत्याचार के प्रतीक कंस के अंत को असत्य पर सत्य की जीत के रूप में दर्शाया गया है। शास्त्रों में कंस वध के बाद देवताओं द्वारा पुष्प वर्षा करने और आनंद उत्सव मनाने का उल्लेख तो अवश्य है, परंतु प्रतीकात्मक रूप से कंस का पुतला दहन (पुतला जलाने) की किसी प्राचीन परंपर