सर सैयद ने कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों समझी? 1875 से 1920 तक कैसे बदला कॉलेज का स्वरूप? शिक्षा को समाज बदलने का जरिया क्यों माना गया? लेखक के रूप में सर सैयद ने क्या योगदान दिया? लड़कियों की शिक्षा को लेकर क्या थी चुनौती? एएमयू में कौन-कौन से कोर्स पढ़ाए जाते हैं? सर सैयद की सोच आज के युवाओं के लिए कितनी जरूरी है? भारत की शिक्षा व्यवस्था में उनका नाम क्यों अहम है? सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्तूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था। वे शिक्षाविद्, लेखक और समाज सुधारक थे। 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय समाज में शिक्षा और रोजगार को लेकर कई चुनौतियां थीं। सर सैयद ने महसूस किया कि आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और अंग्रेजी शिक्षा तक पहुंच बढ़ाए बिना समाज की प्रगति मुश्किल होगी। उनका मानना था कि शिक्षा लोगों को नए अवसरों से जोड़ सकती है और उन्हें बदलती दुनिया को समझने में मदद कर सकती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयास शुरू किए। उनका अभियान केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं था, बल्कि सामाजिक सोच में बदलाव लाना भी उसका अहम हिस्सा था।सर सैयद के शिक्षा अभियान का एक बड़ा पड़ाव 1875 में आया, जब अलीगढ़ में मदरसतुल उलूम की शुरुआत हुई। आगे चलकर यह संस्थान मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज के रूप में विकसित हुआ। 8 जनवरी 1877 को कॉलेज की आधारशिला रखे जाने के बाद इसके विस्तार की दिशा में काम आगे बढ़ा। संस्थान में आधुनिक और पश्चिमी ज्ञान के साथ पारंपरिक विषयों को भी जगह दी गई। सर सैयद की योजना ऐसे शिक्षण संस्थान की थी, जहां विद्यार्थी आधुनिक शिक्षा हासिल कर सकें। कई वर्षों के प्रयासों के बाद 1920 में यह कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी यानी एएमयू बन गया। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सर सैयद अहमद खान जयंती: एक कॉलेज से AMU तक का सफर, कैसे बदली भारत में आधुनिक शिक्षा की तस्वीर?
सर सैयद ने कॉलेज खोलने की जरूरत क्यों समझी? 1875 से 1920 तक कैसे बदला कॉलेज का स्वरूप? शिक्षा को समाज बदलने का जरिया क्यों माना गया? लेखक के रूप में सर सैयद ने क्या योगदान दिया? लड़कियों की शिक्षा को लेकर क्या थी चुनौती? एएमयू में कौन-कौन से कोर्स पढ़ाए जाते हैं? सर सैयद की सोच आज के युवाओं के लिए कितनी जरूरी है? भारत की शिक्षा व्यवस्था में उनका नाम क्यों अहम है? सर सैयद अहमद खान का जन्म 17 अक्तूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था। वे शिक्षाविद्, लेखक और समाज सुधारक थे। 1857 के विद्रोह के बाद भारतीय सम