1 of 5 सौरभ हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला Link Copied मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत का फैसला आने के बाद इस मामले से जुड़े लोगों की पुरानी यादें फिर ताजा हो गई हैं। पोस्टमार्टम करने वाली चिकित्सीय टीम से लेकर विवेचना करने वाले पुलिस अधिकारी तक उस वारदात को याद कर रहे हैं, जिसने पूरे देश का ध्यान मेरठ की ओर खींचा था। शव की हालत और हत्या के तरीके ने पोस्टमार्टम टीम को भी झकझोर दिया था। वहीं, पुलिस अधिकारियों के लिए यह मामला साक्ष्य जुटाने और समयबद्ध तरीके से चार्जशीट दाखिल करने की बड़ी चुनौती रहा। नीले ड्रम में शव मिलने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया था। समय बीतने के बाद भी इस हत्याकांड का जिक्र सोशल मीडिया पर होता रहा है। अब अदालत के फैसले के बाद पोस्टमार्टम और विवेचना से जुड़े लोगों ने उस समय की घटनाओं को याद किया है। 2 of 5 सौरभ हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला ड्रम और सीमेंट से शव निकालने में लगा करीब एक घंटा पोस्टमार्टम करने वाली चिकित्सीय टीम के मुताबिक, मेडिकल कॉलेज की मॉर्चरी में एक साल में करीब 1,500 से 1,800 पोस्टमार्टम होते हैं। इनमें से टीम के सदस्य लगभग 700 से 800 पोस्टमार्टम में शामिल रहते हैं। इसके बावजूद सौरभ राजपूत का मामला उनके लिए बेहद विचलित करने वाला था। टीम ने बताया कि शव को ड्रम में डालने के बाद उसमें डस्ट और सीमेंट भरा गया था। इसके ऊपर तक पानी भरे जाने से सीमेंट जम गया था और शव उसके बीच फंस गया था। टीम के अनुसार, हवा नहीं पहुंच पाने के कारण शव में सामान्य परिस्थितियों जैसी सड़न और दुर्गंध कम थी। पोस्टमार्टम हाउस में पहले ड्रम को कटर से काटा गया। इसके बाद जमे हुए सीमेंट को हटाकर शव बाहर निकाला गया। इस प् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें