आज का शब्द: प्रवाल और धर्मवीर भारती की कविता- दो अनजान नदी की नावें ‘हिंदी हैं हम’ शब्द शृंखला में आज का शब्द है- प्रवाल, जिसका अर्थ है- मूँगा, वृक्ष के नए व कोमल पत्ते। प्रस्तुत है धर्मवीर भारती की कविता- दो अनजान नदी की नावें ये अनजान नदी की नावें जादू के से पाल उड़ातीं आतीं मन्थर चाल । नीलम पर किरणों की साँझी एक न डोरी एक न माँझी, फिर भी लाद निरन्तर लातीं सेन्दूर और प्रवाल ! कुछ समीप की कुछ सुदूर की, कुछ चन्दन की कुछ कपूर की, कुछ में गेरू कुछ में रेशम कुछ में केवल जाल । ये अनजान नदी की नावें जादू के से पाल उड़ातीं आतीं मन्थर चाल । हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें। लिंक पर क्लिक करें और जुड़ें अमर उजाला काव्य के व्हाट्सएप चैनल से https://whatsapp.com/channel/0029VaXoA27A89Mp96alfc2o 6 घंटे पहले …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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