नीलेकणि ने कहा कि सवाल यह है कि हमें प्रश्नपत्र नाम की चीज की जरूरत ही क्यों है? क्योंकि जैसे ही प्रश्नपत्र तैयार होता है, उसे बेचने का आर्थिक प्रलोभन पैदा हो जाता है। इसका तरीका यह है कि सवालों का एक बहुत बड़ा भंडार बनाया जाए और परीक्षा वाले दिन आखिरी समय में प्रश्नपत्र तैयार किया जाए।”नीलेकणि से जब पूछा गया कि क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से परीक्षा वाले दिन प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है, तो उन्होंने हां में जवाब दिया। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इस व्यवस्था को कब और किस तरह लागू किया जाएगा। दूसरी ओर, सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाने का विकल्प भी कार्यबल के विचाराधीन है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा।इंफोसिस के सह-संस्थापक नीलेकणि ने बताया कि कार्यबल सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित बनाने पर भी विचार कर रहा है। फिलहाल देश में करीब डेढ़ लाख स्थान ऐसे हैं, जहां छात्र कंप्यूटर के जरिये परीक्षा दे सकते हैं। अगर सभी परीक्षाओं को इस व्यवस्था में लाना है, तो इन केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा। हालांकि, कार्यबल की ओर से इस बदलाव को लागू करने की कोई समयसीमा नहीं बताई गई।नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन जुलाई में किया गया था। इससे पहले मई में नीट-यूजी का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और दोबारा परीक्षा कराई गई थी। इस घटना के बाद देशभर में कई हफ्तों तक छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।नीलेकणि ने कहा कि उनकी समिति इन व्यवस्थागत समस्याओं पर काम करेगी और प्रधानमंत्री उसके सुझावों क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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