हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में स्कूलों को टाटपट्टी से मुक्त करने की घोषणाओं के बावजूद इन प्रदेशों में करीब 55 लाख बच्चों को इस सर्दी में भी जमीन पर ठिठुरते हुए पढ़ाई करनी होगी। सर्दी आने वाली है लेकिन हरियाणा में फर्नीचर खरीद प्रक्रिया करीब छह महीने से अटकी है। वहां 3.80 लाख बच्चे बगैर फर्नीचर पढ़ने के लिए विवश है। उत्तर प्रदेश में ऐसे बच्चों की संख्या करीब 50 लाख है। यूपी में इस मद में भारी भरकम बजट (1200 करोड़ रुपये) जारी हो चुका है। पंजाब का आलम यह है कि सरकारी फाइल में घोषित स्मार्ट स्कूल में भी न छत है, न फर्नीचर। प्रदेश में करीब 1.33 लाख से अधिक बेसिक स्कूल हैं, जहां 1.25 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं इनमें से प्राइमरी (कक्षा एक से पांच तक) के लगभग 45 हजार स्कूलों में अभी पर्याप्त फर्नीचर नहीं है। बिना फर्नीचर वाले बच्चों की संख्या लगभग 50 लाख है हरियाणा के 14 हजार स्कूलों के करीब 3.80 लाख बच्चे इस सर्दी भी जमीन पर बैठकर ठिठुरेंगे। सीएम नायब सिंह सैनी ने एक नवंबर तक प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों को टाटपट्टी मुक्त बनाने का एलान किया था। शिक्षा विभाग को ड्यूल डेस्क खरीदने के लिए 200 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली लेकिन सात महीने से खरीद संबंधी फाइल सीएम कार्यालय में ही अटकी हुई है। निविदा प्रक्रिया अभी चल रही है। कंपनियां भी मंजूरी के 135 दिनों बाद ही आपूर्ति कर पाएंगी। जाहिर है फरवरी 2027 से पहले स्कूली बच्चों को फर्नीचर मयस्सर नहीं हो पाएगा। शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय दाहिया भी मानते हैं कि कुछ अड़चनें आई हैं, वक्त लगेगा।उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के स्कूलों में फर्नीचर के लिए एक करोड़ 60 लाख रुपये जारी किए गए, लेकिन करीब 10 हजार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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