एक्सप्लेनर: चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचाने की कोशिश में ‘दुश्मन देश’, यह कितना घातक; भारत किस तरफ, तैयारी क्या? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचाने का मतलब क्या है? अमेरिका और रूस-चीन इस रेस में क्यों जुट गए हैं? इस रेस में दोनों धड़ों की तैयारी कैसी है और कितनी प्रगति हो चुकी है? चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचने का खतरा कितना ज्यादा है? और भारत इस रेस में किस तरफ है? आइये जानते हैं… ‘परमाणु शक्ति’। यह एक ऐसा शब्द है, जिसका जिक्र होते ही दुनिया में असीमित ताकत रखने वाले वाले देशों की चर्चा होना लाजमी है। हालांकि, अब यह असीमित ताकत सिर्फ पृथ्वी तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। भविष्य के लिए जो योजनाएं तैयार की जा रही हैं, उसके तहत अब परमाणु शक्ति पैदा करने वाले न्यूक्लियर रिएक्टर्स को अंतरिक्ष से आगे चांद तक ले जाने की कवायद शुरू हो गई। जिन दो दुश्मन धड़ों के बीच यह मुकाबला होना तय है, उनमें एक तरफ है अमेरिका और दूसरी तरफ हैं उसका पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी रूस। इतना ही नहीं मुकाबले में रूस के साथ है उसका पांरपरिक सहयोगी और पड़ोसी चीन। यानी पृथ्वी पर दो पक्षों के बीच जारी परमाणु शक्ति का मुकाबला अब चांद तक पहुंचने वाला है। पहले जानें- चांद पर परमाणु संयत्र पहुंचाने का मतलब क्या है? चांद पर परमाणु संयंत्र पहुंचाने और लगाने की जो रेस शुरू हुई है, उसका सीधा मतलब यह है कि अब यह …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
एक्सप्लेनर: चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचाने की कोशिश में 'दुश्मन देश', यह कितना घातक; भारत किस तरफ, तैयारी क्या?
एक्सप्लेनर: चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचाने की कोशिश में 'दुश्मन देश', यह कितना घातक; भारत किस तरफ, तैयारी क्या? ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचाने का मतलब क्या है? अमेरिका और रूस-चीन इस रेस में क्यों जुट गए हैं? इस रेस में दोनों धड़ों की तैयारी कैसी है और कितनी प्रगति हो चुकी है? चांद पर परमाणु शक्ति पहुंचने का खतरा कितना ज्यादा है? और भारत इस रेस में किस तरफ है? आइये जानते हैं... 'परमाणु शक्ति'। यह एक ऐसा शब्द है, जिसका जिक्र होते ही दुनिया में असीमित ताकत रखने वाले वा