शायर जमाल एहसानी का शेर है कि, ये किस मकाम पे सूझी तुझे बिछड़ने की, कि अब तो जा के कहीं दिन संवरने वाले थे…। उम्र के जिस पड़ाव पर दंपती को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए, वहां कुछ रिश्ते अदालत की दहलीज पर टूटने की कगार पर हैं। कोर्ट में पिछले दो साल में ऐसे करीब 240 आवेदन आए, जिनमें बुजुर्ग दंपतियों ने तलाक के लिए आवेदन किया है। उम्र के इस मुहाने पर तलाक लेने वालों में सिर्फ पुरुष नहीं महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें 80 वर्ष के पांच दंपती, 68 से 72 वर्ष के बीच की उम्र के करीब 40 बुजुर्ग दंपती हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सहारे की उम्र में जुदाई का फैसला: बुढ़ापे में तलाक लेने कोर्ट पहुंचे पति-पत्नी, दो साल में ऐसे 240 मामले
शायर जमाल एहसानी का शेर है कि, ये किस मकाम पे सूझी तुझे बिछड़ने की, कि अब तो जा के कहीं दिन संवरने वाले थे...। उम्र के जिस पड़ाव पर दंपती को एक-दूसरे का सहारा बनना चाहिए, वहां कुछ रिश्ते अदालत की दहलीज पर टूटने की कगार पर हैं। कोर्ट में पिछले दो साल में ऐसे करीब 240 आवेदन आए, जिनमें बुजुर्ग दंपतियों ने तलाक के लिए आवेदन किया है। उम्र के इस मुहाने पर तलाक लेने वालों में सिर्फ पुरुष नहीं महिलाएं भी शामिल हैं। इसमें 80 वर्ष के पांच दंपती, 68 से 72 वर्ष के बीच की उम्र के करीब 40 बुजुर्ग दंपती हैं। .