खबरों के खिलाड़ी: यूपी में राज्यसभा चुनाव बना ‘शक्ति प्रदर्शन’, अखिलेश के किस ‘मास्टर स्ट्रोक’ से गरमाई सियासत विनोद अग्निहोत्री: धनराज नथवानी की उम्मीदवारी कॉरपोरेट जगत की एक अहम सिग्नलिंग है। देश के बड़े औद्योगिक घराने अब विपक्ष के साथ भी अपने रास्ते खुले रखना चाहते हैं, जो यह दर्शाता है कि विपक्ष मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही, अखिलेश यादव अपनी पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) छवि के साथ-साथ कॉरपोरेट-फ्रेंडली संदेश भी देना चाहते हैं कि सपा के सत्ता में आने पर उद्योग जगत के हित सुरक्षित रहेंगे। सपा और कांग्रेस आगामी चुनावों के लिए अपने तालमेल को बेहतर कर रहे हैं। धनराज नथवानी की उम्मीदवारी कॉरपोरेट जगत की एक अहम सिग्नलिंग है। देश के बड़े औद्योगिक घराने अब विपक्ष के साथ भी अपने रास्ते खुले रखना चाहते हैं, जो यह दर्शाता है कि विपक्ष मजबूत हो रहा है। इसके साथ ही, अखिलेश यादव अपनी पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) छवि के साथ-साथ कॉरपोरेट-फ्रेंडली संदेश भी देना चाहते हैं कि सपा के सत्ता में आने पर उद्योग जगत के हित सुरक्षित रहेंगे। सपा और कांग्रेस आगामी चुनावों के लिए अपने तालमेल को बेहतर कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में 16 अक्तूबर को होने जा रहे 10 सीटों के राज्यसभा चुनाव महज उच्च सदन की नुमाइंदगी तक सीमित न होकर आगामी राजनीतिक लड़ाइयों का बड़ा शक्ति परीक्षण बन गए …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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